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मंगलवार, 25 जून 2019

जनवितरण प्रणाली दुकानदारों के साथ मुख्यमंत्री ने की राज्य स्तरीय बैठक


सरकार जल्द ही पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 5 किलो के पैकेट में अनाज उपलब्ध कराएगी

राशन दुकानदार गरीबों को पूरा अनाज दें

जन वितरण प्रणाली दुकानों के सुव्यवस्थित परिचालन के लिए राज्य सरकार इन्हें मिलने वाले कमीशन के अलावा प्रतिमाह ₹1000 की एकमुश्त राशि देगी


रांची। राशन दुकान चलाना गरीबों की सेवा का काम है..यह पुण्य का कार्य है। अंत्योदय अर्थात् समाज के अंतिम व्यक्ति तक हम पहुंचे यह सरकार का प्रयास है। यही वजह रही 35 किलो अनाज गरीब तक राशन दुकानदारों के माध्यम से पहुंचाया जा रहा है। सभी को जीने और भोजन प्राप्त करने का अधिकार है। लेकिन यह शिकायत भी अक्सर मिलती रहती है कि उपभोक्ताओं को सही माप पर अनाज नहीं मिलता है। राशन डीलर भी यह शिकायत करते हैं कि उन्हें भी सही माप का अनाज नहीं प्राप्त होता है। इस शिकायत को दूर करने के लिए जल्द ही पायलट प्रोजेक्ट पर किसी एक प्रखण्ड में 5 किलो अनाज का पैकेट राशन दुकानदारों को उपलब्ध कराया जाएगा। इससे राशन दुकानदार और उपभोक्ताओं की शिकायत दूर होगी। इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता पर पूरे राज्य में इसे लागू किया जाएगा। ये बातें मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने रिम्स आडिटोरियम में राज्य के जनवितरण प्रणाली दुकानदारों के साथ हुई राज्य स्तरीय बैठक के दौरान कही।

कमीशन बढ़ा है, ग्रोसरी के दुकान के लिए मुद्रा योजना का भी मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि राशन दुकानदार लगातार मानदेय देने की बात करते हैं, लेकिन उन्हें यह बात समझनी होगी कि मानदेय सरकारी कर्मियों को दिया जाता है। पूर्व में ही सरकार द्वारा 45 रुपये के कमीशन को बढ़ा कर 100 रुपये किया गया है। आपकी आय में बढ़ोतरी के लिए सरकार आप सभी को राशन दुकान में ग्रोसरी की वस्तुएं रखने की अनुमति प्रदान करती है लेकिन उसमें PDS की वस्तुएं नहीं होनी चाहिये। ग्रोसरी की दुकान हेतु सरकार बैंकों से आपको मुद्रा लोन भी उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जन वितरण प्रणाली दुकानों के सुव्यवस्थित परिचालन के लिए राज्य सरकार इन्हें मिलने वाले कमीशन के अलावा प्रतिमाह ₹1000 की एकमुश्त राशि भी देगी।

29 लाख परिवारों को उज्ज्वला का लाभ मिला; अब 14 लाख गरीब परिवार को इसका लाभ देने में डीलरों का सहयोग चाहिए

मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्ज्वला योजना से गरीबों को आच्छादित करने में राशन दुकानदारों को सहयोग रहा है। आपके सहयोग से 29 लाख गरीब परिवारों को योजना से लाभान्वित किया गया। अब शेष बचे 14 लाख गरीब परिवारों को उज्ज्वला योजना का लाभ देना है, इस कार्य में आप सभी का सहयोग पूर्व की तरह अपेक्षित है। आयुष्मान भारत से गरीबों को आपके सहयोग से जोड़ बेहतरीन कार्य किया गया है। आप सभी को भी इस योजना का लाभ मिले इस दिशा में सरकार जल्द निर्णय लेगी।

अनाज नहीं लेने वालों का नाम उपलब्ध करायें

मुख्यमंत्री ने कहा कि जो उपभोक्ता राशन का उठाव नहीं कर रहें हैं। ऐसे लोगों का नाम अपने जिला के जिला आपूर्ति पदाधिकारी को उपलब्ध करायें। इस कार्य को प्राथमिकता के तौर पर करें। सूची प्राप्त होने के उपरांत छूटे हुए लोगों का नाम जोड़ कर उन्हें लाभान्वित किया जाएगा।

वृद्ध और बीमार का अवश्य अनाज दें-- सचिव

सचिव, खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग श्री अमिताभ कौशल ने कहा कि राशन दुकानदार अपने क्षेत्र में वृद्ध, बीमार और अकेले रहने वालों को चिन्हित करें ताकि उन्हें राशन कार्ड उपलब्ध कराया जा सके। किसी उपभोक्ता का राशनकार्ड डीलर अपने पास नहीं रखें। उपभोक्ताओं को सही माप में अनाज उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि नेटवर्क की समस्या से जल्द निजात दिलाने का प्रयास होगा। सरकार अनाज वितरण के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ताओं के आंखों की पुतली स्कैन के प्रोजेक्ट पर कार्य कर रही है। अगर यह सफल हुआ तो व्यवस्था को जल्द लागू किया जाएगा। राशन दुकानदार यह सुनिश्चित करें कि उपभोक्ता को दिये गये अनाज का E- POS मशीन के माध्यम से रसीद भी अवश्य दें।

इस मौके पर राज्य के सभी प्रमंडल से आये राशन दुकानदारों ने अपनी समस्याओं और अपनी अपेक्षाओं मुख्यमंत्री के समक्ष रखा।

इस अवसर पर पूरे राज्य के सभी प्रखंड से आये राशन दुकानदार उपस्थित थे।

आवासीय सहकारी समितियों के लिए प्रशासक बहाल करने का आदेश

जमीन निबंधन के लंबित सभी मामलों को निष्पादित करें

डीसी हर शनिवार को जिलों में जनसंवाद के मामलों की समीक्षा करें

सीधी बात कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने दिया आदेश

रांची। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने वर्तमान व्यवस्था के बदले राज्य की सभी सहकारी आवासीय समितियों के लिए एक प्रशासक बहाल करने और समितियों में जमीन निबंधन के लंबित सभी मामलों को निष्पादित करने का निदेश दिया है। मंगलवार को जनसंवाद केंद्र में आयोजित ‘सीधी बात’ के दौरान मुख्यमंत्री ने सहकारी आवासीय समितियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए यह आदेश दिया। रांची की न्यू एजी कॉलोनी की सहकारी आवासीय समिति से जुड़ी श्री हंसराज जायसवाल ने कहा कि वर्ष 2003 में ही इस कॉलोनी में जमीन खरीदी थी लेकिन सहकारी समिति द्वारा इसकी रजिस्ट्री अब तक नहीं की गयी है।

जनसंवाद के मामलों पर समीक्षा बैठक की रिपोर्ट सीएमओ भेजें

‘सीधी बात’ के दौरान मुख्यमंत्री ने जनशिकायतें दर्ज कराने वाले कुल 23 लोगों की फरियाद सुनी। ज्यादातर मामलों का मौके पर ही निपटारा कर दिया गया। इस दौरान वे विभिन्न विभागों के सचिवों, अधिकारियों और जिलों के उपायुक्तों एवं आरक्षी अधीक्षकों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मुखातिब हुए। मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश दिया कि वे जनसंवाद केंद्र में दर्ज शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए प्रत्येक शनिवार को शाम 4 से 5 बजे तक जिलों में समीक्षा बैठक करें। उन्होंने कहा कि यह समीक्षा बैठक जनसंवाद मुख्यालय में होनेवाली साप्ताहिक समीक्षा की तर्ज पर की जाये । श्री दास ने वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन और ऐसी अन्य योजनाओं से लगातार मिल रही शिकायतों पर गहरी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ऐसे मामलों का अपने स्तर पर त्वरित निपटारा करे तो मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र में ऐसी शिकायतें नहीं पहुंचेंगी। मुख्यमंत्री ने उपायुक्तों को यह भी निर्देश दिया कि जनसंवाद के मामलों पर हर हफ्ते होने वाली समीक्षा बैठक की रिपोर्ट सीधे सीएमओ को भेजें।

15 दिनों के अंदर पेंशन एरिअर के साथ भुगतान करें

रामगढ़ के लारीकलां ग्राम की 63 वर्षीय नारायणी मुखर्जी का विधवा पेंशन फरवरी 2014 से लंबित होने की शिकायत पर श्री दास ने रामगढ़ जिले की उपायुक्त, को 15 दिनों के भीतर नारायणी जी को पेंशन एरिअर के साथ भुगतान शुरू कराने का आदेश दिया। मुख्यमंत्री ने मामले में लापरवाही बरतने वाले दोषी पदाधिकारी को भी चिन्हित कर स्पष्टीकरण पूछने का निर्देश दिया।

बायोफेंसिंग करायें, पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा

मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने सभी जिले के उपायुक्तों को यह निर्देश दिया है कि राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में पक्की चहारदीवारी की जगह बायोफेंसिंग करवाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बायोफेंसिंग से निर्माण लागत में कमी भी आएगी एवं साथ ही पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। मुख्यमंत्री ने जनसंवाद में दर्ज गोड्डा के पोड़ैयाहाट प्रखण्ड के सर्वौदय उच्च विद्यालय, बकसरा में चहारदीवारी का निर्माण नहीं होने पर यह निदेश दिया।

बकाया मानदेय का भुगतान सुनिश्चित करें

गोड्डा जिले के आंगनबाड़ी प्रशिक्षण केन्द्र में गार्ड के रुप कार्यरत ठेदिउस सोरेन को मार्च 2015 से मार्च 2016 तक का मानदेय भुगतान नहीं की शिकायत पर श्री दास ने मौके पर ही उपायुक्त, गोड्डा को एक सप्ताह में बकाया मानदेय का भुगतान सुनिश्चित कराने का आदेश दिया।

अधिग्रहित जमीन का मुआवजा एक सप्ताह में दें

धनबाद के गोविंदपुर प्रखण्ड के देवली ग्राम के मदन लाल केसरी की रैयती जमीन को भू-अर्जन कार्यालय ने वर्ष 2012 में अधिग्रहण करने के एवज में मुआवज़े का भुगतान नहीं होने पर उपायुक्त, धनबाद ने कहा कि रैयत को 15 अगस्त 2019 तक मुआवज़े का भुगतान कर दिया जाएगा। जमीन अधिग्रहण में बकाया मुआवजे के भुगतान से जुड़ी पलामू जिले की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने डीडीसी, पलामू को अन्य योजना के लिए आवंटित राशि से एक सप्ताह के भीतर मुआवजा का भुगतान कराने का आदेश दिया।

नया ट्रांसफार्मर लगाएं, बिजली आपूर्ति प्रारम्भ करें

सिमडेगा के बिरकेरा गांव के अम्बा टोली में ट्रांसफार्मर जले होने की शिकायत पर 15 जुलाई 2019 तक नया ट्रांसफार्मर अधिष्ठापित कर विद्युत आपूर्ति शुरू कराने का आदेश दिया।

सिंचाई के लिए माइक्रो लिफ्ट की मरम्मत कराएं

हजारीबाग के केंदुवा गांव के किसानों की सिंचाई की समस्या पर श्री रघुवर दास ने उपायुक्त, हजारीबाग को अनटायड फंड से 15 जुलाई 2019 तक माइक्रो लिफ्ट की मरम्मत कराने का आदेश दिया।

जल्द मिलेगा मुआवजा

उग्रवादी हिंसा में दिनांक 30 अक्टूबर 2012 को मारे गए खूंटी के 13 वर्षीय सुशील पूर्ति के परिजनों को अब तक मुआवजा नहीं दिये जाने की बात पर गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री सुखदेव सिंह ने कहा कि मृतक के फरियादी पिता थॉमस पूर्ति को 7 जुलाई 2019 तक मुआवजा का भुगतान हो जाएगा।

मिलेगा 19 माह से लंबित मानदेय

बोकारो के ऊर्जा विभाग के जैना सब डिवीजन में आउटसोर्सिंग एजेंसी विस्थापित एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी के माध्यम से शिबू काली मुखर्जी सहित अन्य 80 विद्युतकर्मियों के लंबित 19 माह के मानदेय का भुगतान पर विभाग के अधिकारियों ने कहा कि जून माह के अंत तक सभी को बकाया मानदेय का भुगतान हो जाएगा।

किसानों के हित में तालाब की मरम्मत हो

देवघर जिला के बलथर गाँव स्थित बड़ा तालाब का घेराव वर्ष 2015 में टूट जाने पर खेतों में तालाब के पानी के साथ बालू का जमाव से किसानों को नुकसान की शिकायत पर श्री रघुवर दास ने उपायुक्त, देवघर को अनटायड फंड से राशि स्वीकृत कर जल्द से जल्द तालाब की मरम्मति कराने का आदेश दिया।

सतगावाँ की बसोडीह पंचायत के ग्रामीणों से रू-ब-रू हुए मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास सीधी बात कार्यक्रम में कोडरमा के सतगावाँ की बसोडीह पंचायत के ग्रामीणों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए रू-ब-रू हुए। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को क्षेत्र की समस्याओं से अवगत कराया। एक ग्रामीण ने पंचायत में नाली बनवाने का आग्रह किया, इसपर श्री दास ने तुरंत उपायुक्त, कोडरमा को अनटायड फंड से नाली का निर्माण कराने का निर्देश दिया। 

मुख्यमंत्री जन संवाद में नाली निर्माण के लिए 50 लाख स्वीकृत


4.3 किमी नाली निर्माण की मिली स्वीकृति

बासोडीह के ग्रामीणों की मांग हुई पूरी

रांची। मुख्यमंत्री जनसंवाद के तहत मंगलवार को सूचना भवन में आयोजित सीधी बात कार्यक्रम में कोडरमा जिला के सतगांवा प्रखंड स्थित बासोडीह के ग्रामीणों ने पतालडीह - देवड़ी- गावां - सतगावां पथ स्थित बासोडीह में 4.3 किमी सड़क किनारे नाली निर्माण का अनुरोध किया। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को बताया कि नाली निर्माण नहीं होने की वजह से पानी उनके घरों में प्रवेश कर जाता है, जिससे उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

मुख्यमंत्री ने तत्काल कोडरमा डीसी को नाली निर्माण कराने का दिया निदेश-- कोडरमा डीसी ने अनटाइडफण्ड से तत्काल 50 लाख रुपये स्वीकृत किया

ग्रामीणों के अनुरोध पर मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने तत्काल संज्ञान लेते हुए कोडरमा के उपायुक्त को नाली निर्माण कराने का निदेश दिया। कोडरमा के उपायुक्त ने मुख्यमंत्री के आदेश का अनुपालन करते हुए कार्यपालक अभियंता पथ प्रमंडल कोडरमा को नाली निर्माण के लिए जिला के अनटाइड फण्ड से तत्काल 50 लाख रुपये स्वीकृत किया। जल्द ही उक्त सड़क के किनारे नाली निर्माण की शुरू होगा।

सीएम रघुवर दास ने किया रिम्स का औचक निरीक्षण

★ रिम्स में मरीजों को मिले निजी अस्पताल जैसी व्यवस्था

★ नया ओपीडी बनाए, सरकार पूरा सहयोग करेगी

★ चिकित्सक भगवान का रूप

★ गरीब, असहाय की सेवा करें उनका आशीर्वाद बहुत फलेगा


रांची। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने रिम्स का औचक निरीक्षण करने के दौरान कहा कि रिम्स को हमें प्रोफेशनल तरीके से चलाना है। राज्यभर से लोग यहां इलाज कराने आते हैं। लोगों को अच्छा इलाज और अच्छी व्यवस्था मिले, इसके लिए हमसब को मिलकर प्रयास करना होगा। रिम्स में भी लोगों निजी अस्पताल जैसी व्यवस्था मिले, इसके लिए रिम्स प्रशासन कड़ाई के साथ व्यवस्था लागू करे। एक मरीज के साथ एक ही अटेंडेंट रहे, इसे सुनिश्चित करें। इमरजेंसी में भी यह नियम लागू करायें। उक्त बातें उन्होंने रिम्स के निदेशक डॉ दिनेश कुमार सिंह से कहीं। वे आज रिम्स का औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे।

मरीज के परिजन रिम्स प्रबंधन का सहयोग करें
मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि ज्यादा भीड़ रहने से न केवल चिकित्सकों को इलाज करने में परेशानी होती है, बल्कि मरीज को भी हल्ला-गुल्ला से परेशानी होती है। मरीज के परिजन इसमें रिम्स प्रबंधन का सहयोग करें। रिम्स प्रबंधन लोगों को पास जारी करे। गेट पर पास दिखाकर ही मरीज के परिजन को अंदर जाने दें। बीच-बीच में जांच करते रहे कि कोई अतिरिक्त व्यक्ति तो अंदर नहीं आ गया है। ऐसे लोगों से बाहर जाने का अनुरोध करे। नहीं मानने पर कड़ाई से उन्हें बाहर करें।

पंखे और एसी लगायें 
मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इमरजेंसी में तत्काल पंखे लगाने का निर्देश देते हुए कहा कि जब तक एसी नहीं लग जाता है, तब तक पंखे जरूर लगवायें। पहले से ही घायल या बीमार मरीज को गर्मी से और ज्यादा परेशानी होती है। साथ ही पूरे रिम्स में सेंट्रलाइज्ड एसी लगाने व अन्य जरूरी कार्यों के लिए अनुमानित लागत का अनुमान लगाकर दें। राज्य सरकार सीएसआर समेत अन्य साधनों से इस राशि की व्यवस्था करेगी। उन्होंने रिम्स परिसर को साफ-सुथरा रखने का भी निर्देश दिया।

चिकित्सक भगवान का रूप
वार्ड में उपस्थित चिकित्सकों से  मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉक्टर भगवान का रूप माने जाते हैं। गरीब व असहाय की सेवा करें। इनसे जो आशीर्वाद मिलेगा, वह बहुत फलेगा। वे लगातार मरीजों के संपर्क में रहें। गरीब के चेहरे पर मुस्कान देखने से जो सुकून मिलेगा, वह सुकून किसी ओर चीज से नहीं मिल सकता है। चिकित्सक रोजाना समय से वार्ड का भ्रमण करें।

नयी ओपीडी बनायेंगे
रिम्स निदेशक दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि रिम्स की ओपीडी काफी पुरानी हो चुकी है। यहां मरीजों व उनके परिजनों के बैठने आदि के लिए समुचित व्यवस्था नहीं हो पा रही है। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि नयी व बड़ी ओपीडी बनाने के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी करें। सरकार पूरी तरह से सहयोग करेगी। रिम्स में मरीजों के परिजनों के लिए वेटिंग रूम बनायें। वहां पानी, शौचालय के साथ ही सस्ती दर पर भोजन की भी व्यवस्था करें।

मुर्गी पालनः एक लाभदायक व्यवसाय


प्रस्तुतिः समरेंद्र कुमार

मुर्गी पालन के जरिए ग्राणीण इलाकों के किसान आय का अतिरिक्त साधन जुटा सकते हैं। शिक्षित बेरोजगार भी इसे अपना सकते हैं। साथ ही घर के औरतें और बच्चे भ अपने फालतू समय में इस धंधे को आराम से कर सकते हैं। घर में अगर मुर्गियों पाली जायें तो उनके रख-रखाव तथा खुराक पर अधिक खर्च नहीं पड़ता चूंकि घर का बचा- खुचा भोजन, सब्जी के बेकार पत्ते और अनाज के बचावन से उनके लिए अच्छा भोजन, सब्जी के बेकार पत्ते और अनाज के बचावन से उनके लिए अच्छा भोजन प्राप्त हो सकता है तथा उसके बदले हमें बढ़िया मांस और बलदायक अंडे प्राप्त होते हैं।
इस व्यवसाय में मुख्य रूप से तीन प्रकार का धंधा हो सकता है
क) अंडा और मांस उत्पादन के लिए मुर्गीपालन
ख) चूजा उत्पादन।
ग) पौष्टिक आहार मिश्रण तैयार करना तथा आहार, चूजा अंडा, मांस एवं मुर्गी खाद का क्रय विक्रय।
मुर्गीपालन के लिए आवश्यकता
अधिक अंडा उत्पादन के लिए हमारे देश या विदेश में सबसे अच्छे नस्ल की सफेद मुर्गी होती है जिसे व्हाइट लेग हार्नकहते हैं। मांस उत्पादन के लिए कोरनिस, न्यूहेपशायर, असील, चटगाँव आदि नस्लें हैं। मुर्गीपालन के लिए हमेशा ऐसी मूर्गियां पाली जानी चाहिए और बड़े अंडे देने वाली हों। अच्छी मुर्गी का चुनाव करते समय निम्न बातों को ध्यान में रखना चाहिए। अच्छी मुर्गी के सिर चौड़े अता विस्तृत होते हैं, सकरे या गोलाकार नहीं। कलंगी लाल और चमकदार होती है। पेट बड़ा होता है तथा त्वचा कोमल लचीली होती हैं। जघनास्थी चौड़ा तथा योनिमूख अंडाकार होता है।
मुर्गी फार्म खोलने कें लिए आवश्यक वस्तूएं
क) मुर्गीपालन घर
ख) दाना, पानी देने के लिए बर्तन
ग) ब्रूडर
घ) उन्नत नस्ल के चूजे या बड़ी मुर्गियाँ
ङ) रोगों से बचाव के लिए टीका औषधि तथा दवा
च) अंडा देने का बक्सा
छ) रोशनी या बिजली का प्रबंध
ज) हाट-बाजार जहाँ व्यापार किया जायेगा
झ) आमदनी खर्च का हिसाब- किताब
उन्नत नस्ल की मुर्गियाँ साल भर में लगभग 250-300 अंडे देती हैं जबकि देशी मुर्गियाँ केवल 50-60 अंडे। इन मुर्गियों को साल भर अंडा देने के बाद बेच देना चाहिए क्योकि इनकी अंडा देने की क्षमता घट जाती है तथा दाना खिलाने में लाभ के वनस्पति अधिक खर्च बैठता है। मुर्गीपालन में आहार पर 65-70 प्रतिशत खर्च बैठता है। इसलिए कमजोर तथा कम अंडा देने वाली मुर्गियाँ की बराबर छटाई करते रहना चाहिए।
चूजों (चेंगनों) का पालन पोषण
किसान भाइयों के लिए चूजों का पालन पोषण करना मुश्किल नहीं है। चूजे चाहे मुर्गी बैठा कर अंडा से निकाले गए हों, मुर्गी उन्हें आसानी से अपने पंख के नीचे ले लेती हैं। इसके लिए रात चूजे दिए जाते हैं। दिन में मुर्गियों के साथ छोटे- छोटे चूजे घुमते रहते हैं तह दाना चुगते रहते हैं। जब अंडा से फूट कर निकलता है उस समय उसका वजन लगभग 35 से 40 ग्राम होता है तथा वे बहुत कोमल तथा नाजुक होते हैं। इस समय विशेष सावधानी की आवश्यकता है।
छोटे चूजों की बढ़ोतरी के लिए उचित मात्रा में गर्मी का इंतजाम किया जाना चाहिए। अगर चूजे के घर के बाहर का वातावरण काफी ठंडा हो तो चूजे के घर के अंदर ऊँचे स्थान पर किसी बर्तन में आग जलाकर घर को गर्म रखा जा सकता है। जहाँ बिजली की आपूर्ति हो वहाँ बिजली चूल्हे या लैम्प जलाकर काम किया लिया जा सकता है। चूजों को किसी कमरे में तीन इंच गहरे लकड़ी के बुरादे, धान के छिलके, पुवाल की कुट्टी या भूसी जिन्हें लीटर कहते हैं, पर रखकर पालते हैं।
मुर्गियों की कुछ जातियाँ तथा उनका चुनाव
मुर्गियों की भिन्न- भिन्न जातियों में से मुर्गीपालन व्यवसाय को ध्यान में रखकर इनमें से चुनाव करना चाहिए
क)  अधिक अंडा देने वाली व्हाइट लेग हार्न, मिनार्का आदि।
ख) विपुल मांस देले वाली- असील, कार्निस, व्हाइट राक।
ग) मांस और अंडा दोनों के लिए- रोड आइलैंड रेड, अस्ट्रालार्प इत्यादि।
भारत में पाली जाने वाली मुर्गियों को दो बड़े समूहों में बाँटा जा सकता है- एक देशी और दूसरा उन्नत या विदेशी। देशी मुर्गियाँ छोटे और कम अंडे देती हैं। औसत साल में 50 से 55 अंडे। अत: व्यवसाय के लिए इनका चुनाव ठीक नहीं है। विदेशी नस्लों में जो हमारी जलवायु के अनुरूप ढल जाती गयी हैं उनमें व्हाइट लेग हार्न तथा रोड आइलैंड रेड प्रमुख हैं। केवल अंडा प्राप्त करने के लिए व्हाई लेग हार्न सबसे अच्छा है। यह सफेद रंग की, लाल तूरावाली और पीली पैर वाली मुर्गी है। यह साल में  200 से 250 अंडे देती है। वैसे सफल मुर्गी पालक इससे 300 अंडे तक प्राप्त हो सकते हैं। अगर मांस और अंडे दोनों के लिए मुर्गी पालना हो तो रोड आइलैंड रेड तथा ब्लैक अस्ट्रालार्प  काफी अच्छा है। यह लाल अथवा भूरा होता है इसमें मांस की मात्रा अधिक होती है। साथ ही यह साल में औसतन 160-200 अंडे देती है। मांस पैदा करने वाली नस्ल को ब्रोआयालर्स नस्ल कहते हैं। केवल मांस पैदा करने के लिए व्हाइट कार्निस’ ‘व्हाइट रौकऔर न्यूहैम्पशायरनस्ल की मूर्हियाँ अच्छी होती है। 2 महीने में 4 किलो दाना खिलाकर 1 किलो की मुर्गी तैयार हो जाती है।
मुर्गीपालन के लिए हमेशा ऐसी मुर्गियाँ पाली जाए जो अधिक और बड़े अंडे देने वाली हों\ अच्छी मुर्गी का चुनाव करते वक्त निम्न लक्षणों को ध्यान में रखना चाहिए। अच्छी मुर्गी के सिर चौड़े तथा विस्तृत होते हैं सकरे या गोलाकार नहीं। कलंगी लाला और चमकदार होती हैं आंखे, तेजस्वी होती है, छाती विस्तृत और चौड़ी होती है। पेट बड़ा होता है। त्वचा कोमल तथा लचीला होता है। जघनास्थी विस्तृत तथा चौड़ी होता है तथा योनिमुख अंडाकार और मुलायम होता है।
नर का चुनाव करते वक्त यह ध्यान में रखना चाहिए कि अच्छे नर से अच्छी संतति प्राप्त होती है। अत: अच्छे लक्षण और प्रजनन कार्यसक्षम मुर्गा का ही चुनाव करना चाहिए। आजकल हमारे देश में देशी मुर्गियों का सुधार करने के लिए उन्हें विदेशी मुर्गों से नस्ल सुधार कराया है। इसके उत्पन्न संकर मुर्गियों की अंडा देने की सक्षम बढ़ती है। इसके अतिरिक्त कई मुर्गी फार्मों में अंडा देने वाली माँसल मुर्गियों की अनेक विदेशी नस्लों से संकरन द्वारा उप नस्ल भी पैदा की जाती है। जो काफी अधिक अंडा देती है जैसे- एस्ट्रोव्हाइट, हाईलाइन आदि।
मुर्गी घर
घर बनाते समय निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए
1. घर ऊँची सतह पर बनाए।
2. अधिक धुप, ठंढक तथा वर्षा से मुर्गियों का बचाव होना चाहिए।
3. घर को छरने के लिए एस्बेस्टस या घास फूस, पुवाल या ताड के पत्ते या खपड़ा का प्रयोग करना चाहिए।
4. मुर्गी घर का फर्श बाहर की जमीन से 10 इंच ऊँचा होना चाहिए तथा संभव हो तो पक्का बनाना चाहिए जिससे चूहा, सांप आदी बिल  न बना सके।
5. मुर्गी घर की दिवार मजबूत, आंशिक रूप से खुली तथा तीन ओर से बंद रहे कि हवा के आने जाने की पूरी गूंजाइश रहे।
मुर्गियों के लिए सन्तुलित आहार
मुर्गियों के स्वास्थ एवं उत्पादन क्षमता बनाये रखने के लिए पानी, शर्करा, चिकनाई, प्रोटीन, खनिज पदार्थ तथा विटामिन आवश्यक है। जिस आहार पर पलने वाली मुर्गियाँ अधिक स्वस्थ रहें, उनकी बढ़ोतरी अच्छी हो और वे अंडा अधिक दें उसे सन्तुलित आहार कहा जाता है। मूर्गिपालक आहार का मिश्रण स्वयं घर में तैयार कर सकते हैं मगर कठिनाई होने से वे बाजार से तैयार मिश्रण खरीद कर अपनी मुर्गियों को खिला सकते हैं। चूजों को पहली खुराक अंडे से निकलने के 48 घंटे बाद दी जाती है। चूजों के लिए साफ पानी का प्रबंध हमेशा रहना चाहिए।
मुर्गियों में बीमारियाँ तथा उनसे बचाव
मुर्गियों की उचित देखभाल, सन्तुलित आहार, साफ तथा हवादार घर और अच्छी नस्ल का चुनाव करने से रोग की सम्भावना बहुत कम होती है। याद रखें मुर्गियों में शुरू सी रोग निरोधक उपायों का अमल करना आर्थिक दृष्टि से लाभप्रद होता है चूंकि संक्रामक रोग जो जाने पर मुर्गियों को बचाना कठिन होता है। मुर्गी के बीमार पड़ते ही उसे स्वस्थ मुर्गियों नके झुंड से अलग कर देना चाहिए तथा पशुचिकित्सक से सलाह लेकर ही चिकित्सा करनी चाहिए। जो आदमी बीमार मुर्गियों की देखभाल करें उन्हें स्वस्थ मुर्गियों के पास जाने से पहले कपड़ा बाले लेना चाहिए तथा हाथ आदि किटाणूनाशक दवाओं से धो लेना चाहिए। जिस घर में बीमार मुर्गी रह चुकी हों उसमें नई मुर्गियों रखने से पहले चूना से पोताई करवा देनी चाहिए। साथ ही समय-समय पर डी.डी.टी. आदि का छिड़काव भी करना चाहिए।
आमतौर पर मुर्गियों में रानीखेत या टूनकी, चेचक, खुनी दस्त, कोराईजा या सर्दी, कृमि रोग, परजीवी जन्य रोग तथा पोषाहार सम्बन्धी रोग होते हैं। इनके इलाज के लिए मुर्गीपालकों को चाहिए कि वे अपने निकट के मवेशी अस्पताल के पशुचिकित्सक से सलाह लेकर ही इलाज करावें। कभी- कभी अज्ञानतावश लापरवाही से सभी मुर्गियाँ मर सकती हैं अत: इस सम्बन्ध में सावधानी आवश्यक है।
मुर्गियों से उत्पादित अंडों एवं मांस का व्यापार
मुर्गी पालन से उत्पादित अंडो एवं मांस की खपत या व्यापार की व्यवस्था सही ढंग से न जो तो इस व्यवसाय को चलाना संभव न होगा। चूंकि फार्म में उत्पादित सामानों का एक या दो दिन से अधिक रखना संभव नहीं। इसके लिए सहकारी मुर्गीपालन संस्थाओं का होना आवश्यक है। सहकारी मुर्गीपालन संस्था द्वारा रोजाना अंडों को वितरण किया जाना चाहिए। अंडो एवं मांस की बिक्री में उत्पादक, वितरक तथा उपभोक्ता का वापसी विचार एवं एक दूसे पर विश्वास का भाव होना चाहिए। अन्यथा कभी ऐसा होता है कि उत्पादक से वितरक ही ज्यादा मुनाफा कमा लेता है। अत: हमारे देश में राष्ट्रीय सहकारी कृषि, व्यापार संस्थान द्वारा अंडो की बिक्री का काम लिया जाना चाहिए इससे किसान भाइयों को अधिक लाभ होगा और उन्हें प्रोत्साहन मिलेगा।
मुर्गीपालन के सम्बन्ध में याद रखने वाली कुछ मुख्य बातें
मुर्गीपालन का व्यवसाय शुरू करने से पहले मुर्गीपालकों को निम्नलिखित कुछ बातों को ध्यान रखना आवश्यक हैं-
1. व्यवसाय पहले अनुभव के लिए छोटे रूप में प्रारंभ करना चाहिए. फिर धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए।
2. व्यवसाय शुरू करने से पहले मुर्गी के घर. उपकरण एवं चारा दाना का प्रबंध कर लेना चाहिए।
3. ज्यादा अंडा देने वाली मुर्गियों, अंडा या एक दिन का चेंगना खरीद कर यह व्यवसाय शुरू  किया जा सकता है। हमेशा अधिक अंडा देने वाली उत्तम नस्ल की मुर्गियों का ही चुनाव करें। सरकारी मुर्गी फार्म से आप जब भी अंडा देने वाली मुर्गियाँ खरीदें तो यह अवश्य देख लें कि उन्हें रानिक खेत और चेचक का टीका लगा चुका हो।
4. 8-10 मुर्गियों के लिए एक ही मुर्गा रखना पर्याप्त है और यदि निर्जीव अंडा पड़ा करना है तो मुर्गा रखने की जरूरत नहीं है।
5. मुर्गी का घर ऊँची जगह पर होना चाहिए ताकि जमीन में नमी न रहे, चूंकि नमी से बीमारी फैलती है।
6. बिजली को पालने में विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है चूजों के एक डेढ़ महीने तक पंख नहीं निकलते इसलिए पंख निकलने तक उन्हें दुसरे तरीकों से गर्म रखना चाहिए।
7. बिजली एवं स्वच्छ पानी का प्रबंध मुर्गी फार्म में अवश्य होना चाहिए।
8. मुर्गियों के लिए आरामदायक तथा हवादार दड़बा बनाना चाहिए। हवादार बनाने के लिए दड़बे के चारों ओर तार की जाली लगा दें। दड़बे में 55 से 75 डिग्री फारेनहाइट का बीच तापक्रम रहने से मुर्गियों को पूरा आराम मिलता है।
9. मुर्गियों को डीप लिटर पद्धति में रखने से समय तथा जगह की बचत होती है तथा मेहनत भी कम पड़ता है। लीटर को खाद के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।
10 मूर्गियों को हमेशा संतूलित आहार देना चाहिए। एक बड़ी मुर्गी 24 घंटे में लगभग 4 औंस दाना खाती है। मुर्गियों को हमेशा स्वच्छ पानी मिलना चाहिए।
11. हमेशा यद् रखें कि मुर्गियों में शुरू से ही रोग निरोधक उपायों का अमल करना आर्थिक दृष्टि से लाभप्रद होता है। मुर्गियों को रानीखेत तथा चेचक का टीका अवश्य लगवाएं। चूजों के आहार में खुनी दस्त की बीमारी से बचाव हेतु दवा अवश्य मिलाना चाहिए। इसके अतिरिक्त कृमि के लिए हर एक दो माह में कृमिनाशक दवाइयां देना चाहिए ।
12. अंडा एवं मुर्गा बेचने के लिए शहर के नजदीक यह व्यवसाय शुरू करना चाहिए जिससे इनकी खपत आसानी से हो सके तथा बाजार तक अंडा, मुर्गा ले जाने में सुविधा रहे।
13.पशुपालन विभाग द्वारा मुर्गीपालकों को दी जाने वाली सुविधाओं को अवश्य लाभ उठावें।
14. मुर्गीपालन व्यवसाय शुरू करने से पहले इसमें होने वाले आय-व्यव की रूप रेखा अवश्य बना लें और आय-व्यय का पूरा हिसाब रखें।
स्रोत: जेवियर समाज सेवा संस्थान, राँची

मुर्गे की सभी प्रजातियों से आगे निकल गया झाबुआ का कड़कनाथ



समरेंद्र कुमार
हाल के वर्षों में मध्य प्रदेश के इलाकों में पाया जाने वाला जंगली प्रजाति का मुर्गा कड़कनाथ अपने औषधीय गुणों के कारण बेहद लोकप्रिय हुआ है। इस प्रजाति का मुर्गा अन्य प्रजातियों के मुर्गों से बेहतर होता है। इसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक और फैट की मात्रा न के बराबर पायी जाती है। इसमें विटामिन-बी-1, बी-2, बी-6, बी-12, सी, , नियासिन, केल्शियम, फास्फोरस और हीमोग्लोबिन भरपूर होता है। यह स्वास्थ्य के लिए अन्य मुर्गों की तुलना में ज्यादा लाभकारी है। इसका रक्त, हड्डियां और सम्पूर्ण शरीर काला होता है। यह दुनिया में केवल मध्यप्रदेश के झाबुआ और अलीराजपुर में पाया जाता है।
किसी जमाने में इसका शिकार किया जाता था। लेकिन अब इसका बाजाप्ता पालन किया जाने लगा है। झाबुआ, अलीराजपुर और देवास जिले में कड़कनाथ मुर्गा-पालन की 21 सहकारी समितियों का पंजीयन हुआ है। इनमें 430 सदस्य हैं। चार समितियों द्वारा व्यवसाय शुरू कर दिया गया है। एप के माध्यम से कोई भी कड़कनाथ मुर्गा खरीदने के लिए ऑनलाइन डिमांड कर सकता है। भविष्य में ऑनलाइन आर्डर के साथ होम डिलीवरी की भी सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।

हाल ही में कड़कनाथ नस्ल पर मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच विवाद की स्थिति बनी थी और दोनों राज्यों ने इस नस्ल पर अपना दावा जताया था। दोनों राज्यों ने इस काले पंख वाले चिकन किस्म के लिए 'जीआई टैग' के लिए चेन्नई में भौगोलिक संकेतक पंजीयन कार्यालय के साथ आवेदन किया था।

मध्यप्रदेश पशुपालन विभाग के अतिरिक्त उप निदेशक डॉ भगवान मंगहानी ने कहा था कि प्रदेश को काला पक्षी के लिए जीआई टैग प्राप्त होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि ग्राम विकास ट्रस्ट ऑफ झाबुआ ने 2012 में कड़कनाथ प्रजनन में शामिल आदिवासी परिवारों की ओर से जीआई टैग के लिए आवेदन किया था। डॉ. मंगनानी के अनुसार राज्य द्वारा संचालित हैचरी हर साल कड़कनाथ विभिन्न प्रकार के 2.5 लाख मुर्गियों का उत्पादन करती है।

मध्यप्रदेश ने झाबुआ में 1978 में कड़कनाथ के पालन के लिए पहला पोल्ट्री स्थापित किया था, लेकिन छत्तीसगढ़ ने अपने उत्पादन में समय की एक अवधि में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था।

एक निजी कंपनी ग्लोबल बिजनेस इनक्यूबेटर प्राइवेट लिमिटेड (जीबीआईपीएल) के अध्यक्ष श्रीनिवास गोगिनेनी के मुताबिक छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में घरेलू वातावरण में एक अनोखे तरीके से पक्षी का पालन किया गया था। अंततः इसे झाबुआ जिले की नस्ल मान लिया गया और मध्य प्रदेश का दावा स्वीकार कर लिया गया।



सोमवार, 24 जून 2019

जेसीआई रांची की महिला विंग के सावन सिंधारा कार्यक्रम के पोस्टर का अनावरण


रांची। जेसीआई रांची के महिला विंग के तत्वावधान में हर साल की तरह. सावन सिंघारा कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इससे संबंधित पोस्टर का शारदा बाबु लेन में स्थित जेसीआई रांची के कार्यालय में अनावरण किया गया .
संस्था की प्रवक्ता सूचि जैन ने बताया, हर साल की तरह इस साल भी सावन सिंधारा को बिलकुल नए और अनोखे अंदाज़ में प्रस्तुत किया जायेगा .
यह कार्यक्रम खास कर महिलाओं के लिए आयोजित किया जाता है जिसमे उनके लिए रांची और देश के बड़े-छोटे शहरो के नए सामान की खरीददारी करने का मौका मिलता है .
यह कार्यक्रम 13 और 14 जुलाई को रांची क्लब मल्टी पर्पस हॉल में होना निश्चित हुआ है .
इस फेयर में कुल 59 स्टाल होंगे जिसमे 55 A/C तथा 4 नन A/C स्टाल में महिलाएं शौपिंग का लुत्फ़ उठा सकती है . डिज़ाइनर साड़ी, लहेंगा, कुर्ती ,फैशन असेसरिएस, आर्टिफीसियल ज्वेलरी  जैसे कई प्रोडक्ट एक छत के निचे मिलेंगे . साथ ही साथ लजीज व्यंजन का भी लुत्फ़ उठा सकती है .
रांची, कोलकाता,मुंबई,टाटा,धनबाद,दिल्ली,सूरत जैसे कई बड़े-छोटे सहरो से महिला उद्यमी इस फेयर में भाग लेने आ रही है.
इस फेयर में प्रवेश शुल्क बिलकुल मुफ्त रखा गया है, इतना ही नहीं बल्कि आने वाले सभी ग्राहक को डिस्काउंट बुकलेट दिया जायेगा जिसमे रांची सहर के 24 प्रतिष्ठित प्रतिष्ठानों के डिस्काउंट कूपन मिलेंगे ,जहा से खरीददारी कर ग्राहक हजारो के डिस्काउंट ले सकते है.
बच्चो के लिए खास किड्स जोन बनाया जायेगा, जिस से की बच्चे किड्स जोन का और महिलाएं शौपिंग का आनंद उठा सके .सुबह 10 बजे से रात्रि 8 बजे तक यह मेला खुला रहेगा .
सावन सिंधारा के उद्घाटन के लिए श्री संजय सेठ जी का आना निश्चित हुआ है .
कार्यक्रम के प्रमुख स्पोंसर :
रिंस ऐन स्विर्ल , शारदा ग्लोबल प्ले स्कूल, हौंडा - ऑटोमोबाइल पार्टनर, ट्रेंड्स इवेंट - इवेंट पार्टनर , ओ .ऍम .जी - फ़ूड पार्टनर.
कार्यक्रम का संचालन राखी मंत्री ,खुसबू मोदी एवं राधिका मोदी कर रही है
स्टाल बुकिंग के लिए हेल्प लाइन नंबर :   802335092 ,9304819001 , 9005300673

मौके पर अध्यक्ष दीपा बंका , सचिव कंचन महेश्वरी, राखी मंत्री ,राधिका मोदी ,खुसबू मोदी ,बिना अग्रवाल, स्वाति जैन,नैना मंत्री, रंजना रंजन,स्वेता मोदी, जुली अग्रवाल , सुनीता मोदी
,रजनी धन्धानिया , आशा पोद्दार, नम्रता जैन ,सूचि जैन आदि मौजूद थी .     

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...