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शनिवार, 29 जून 2019

उपायुक्त कार्यालय में जनता दरबार का आयोजन

विनय मिश्रा

चाईबासा। समाहरणालय परिसर में जिले के आमजन की समस्याओं के निराकरण हेतु जनता दरबार का आयोजन किया गया।
जिला उपायुक्त अरवा राजकमल के निर्देशानुसार जिला आपूर्ति पदाधिकारी सुरेंद्र कुमार के द्वारा आम जनों की समस्याओं को सुना गया।आज कुल 16 फरियादियों के द्वारा जनता दरबार में अपनी शिकायतें पेश की गई है। जिनमें प्रमुख रूप से शिक्षा व्यवस्था, नामांकन, जाति प्रमाण पत्र, सीएसआर के तहत होने वाले नामांकन, जैसे समस्याओं के समाधान के लिए आमजन जनता दरबार में उपस्थित हुए।
शिकायत सुनने के उपरांत पदाधिकारी के द्वारा प्राप्त आवेदनों को जांच के उपरांत उपायुक्त के समक्ष प्रस्तुत किया गया।जहाँ से यह अग्रसर करवाई हेतु संबंधित विभाग को भेज दिया जाएगा।

पूर्वी सिंहभूम के नये डीसी बने रविशंकर शुक्ला

चक्रधरपुर के अनुमंडल अधिकारी के रूप में हुआ था पहला पदस्थापन



विनय मिश्रा
चक्रधरपुर। हजारीबाग के उपायुक्त रवि शंकर शुक्ला जमशेदपुर पूर्वी सिंहभूम  के नये उपायुक्त बनाये गये है श्री शुक्ला सोमवार को  अपना पदभार ग्रहण करेंगे । श्री शुक्ला भारतीय प्रशासनिक सेवा 2012 बैच के अधिकारी हैं तथा उन्होंने उपायुक्त के रूप में हजारीबाग में  अपने पदस्थापना के तीन साल पूरे कर लिए श्री शुक्ला भारतीय प्रशासनिक सेवा के तेजतर्रार अधिकारी के रूप में पहचाने जाते हैं तथा  उपायुक्त के रूप मे जमशेदपुर इनका तीसरा जिला है 1 जनवरी 2016 को लातेहार जिला के उपायुक्त रुप में पदस्थापित किये गये तथा छः महीने के पश्चात 24 जून 2016 हजारीबाग के उपायुक के रूप में पदभार ग्रहण किया था  तथा   श्री शुक्ला को 28 जून 2019 मे पूर्वी सिंहभूम,  जमशेदपुर का उपायुक्त बनाया गया हैं  गौरतलब हो कि श्री शुक्ला की पहली पदस्थापना स्थल चक्रधरपुर अनुमंडल पदाधिकारी के रूप मे रही हैं

जगुआर ने रैपिड रेस्पांस को उपलब्ध कराए आपातकालीन वाहन

ऱाष्ट्रीय स्तर पर हुआ आपदा प्रबंधन में सहयोग का करार


रांची। आपदा प्रबंधन को बेहतर और प्रभावशाली बनाने के लिए जगुआर लैंड रोवर इंडिया लिमिटेड  ने रैपिड रेस्पांस के साथ गठबंधन किया है। यह गठबंधन अखिल भारतीय स्तर पर आपसी सहयोग के निमित्त है। रैपिड रेस्पांस एक गैर सरकारी संघठन (एनजीओ) है जिसे आपदा प्रबंधन और राहत के कार्य में विशेषज्ञता हासिल है। जगुआर लैंड रोवर इंडिया ने रैपिड रेस्पांस को इस मानसून के मद्दे नज़र खासतौर पर तैयार किया गया लैंड रोवर  डिस्कवरी सपोर्ट उपलब्ध कराया है। इसका इस्तेमाल ईमर्जेंसी रेस्पांडर के रूप में राहत और मेडिकल सहयोग के साथ प्राकृतिक आपदा से त्रस्त समुदायों तक भोजन और राहत सामग्री वितरित करने के निमित्त किया जाएगा।
जगुआर के प्रेसिडेंट एवं मैनेजिंग डायरेक्टर रोहित सूरी ने कहा कि लैंड रोवर के वाहन कठिन से कठिन रास्तों को पार कर आपदाग्रस्त इलाकों तक पहुंचने की क्षमता रखते हैं। बाढ़ अथवा किसी भी विनाशकारी घटना के कारण उत्पन्न विकट स्थितियों से इसकी रफ्तार बाधित नहीं होती। इस अवसर पर जगुआर लैंड रोवर ने भारत में 10 साल पूरे होने का जश्न भी मनाया  

शुक्रवार, 28 जून 2019

अधिसूचनाः गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग


स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी और विस्तार के लिए सरकार प्रतिबद्धः रामचंद्र चंद्रवंशी


★ राज्य की सवा तीन करोड़ आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध

★ आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत राज्य के 36.65 लाख परिवारों का बन चुका गोल्डन कार्ड

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 नीति आयोग द्वारा जारी स्वस्थ राज्य प्रगतिशील भारत रिपोर्ट के दूसरे संस्करण में झारखंड, राजस्थान और हरियाणा को वार्षिक वृद्धिशील प्रदर्शन में अव्वल राज्य घोषित
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रांची। स्वास्थ्य, चिकित्सा और परिवार कल्याण मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने कहा कि झारखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और उसे बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है. मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास के नेतृत्व में जन-जन तक स्वास्थ्य सुविधाओं को पहुंचाने की कोशिशें लगातार जारी है. पिछले साढ़े चार सालों में सरकार ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई योजनाएं लागू की हैं, जिसका फायदा राज्य की सवा तीन करोड़ जनता को मिल रहा है. यही वजह है कि मंगलवार को नीति आयोग द्वारा जारी स्वस्थ राज्य प्रगतिशील भारत रिपोर्ट के दूसरे संस्करण में झारखंड, राजस्थान और हरियाणा को वार्षिक वृद्धिशील प्रदर्शन में अव्वल राज्य घोषित किया गया है. नीति आयोग द्वारा मिली यह रैंकिंग पूरे झारखंड के लिए गौरव की बात है. श्री चंद्रवंशी ने आज सूचना भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे.
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र की बेहतरी और सरकारी अस्पतालों को सुदृढ़ बनाने और मूलभूत सुविधाएं बहाल कर दी गई हैं और जो कमियां रह गई हैं उसे दूर किया जा रहा है.

गोल्डन कार्ड बनाने में झारखंड का पूरे देश में तीसरा स्थान
स्वास्थ्य मंत्री चंद्रवंशी ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन में झारखंड का काफी बेहतर प्रदर्शन रहा है. उन्होंने बताया कि पूरे देश में गोल्डन कार्ड जारी करने में झारखंड का तीसरा स्थान है औऱ सूचीबद्ध अस्पतालों द्वाला लाभुकों के इलाज में छठे पायदान पर है. श्री चंद्रवंशी ने बताया कि पिछले साल 23 सितंबर को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने रांची से ही जन आरोग्य् योजना का शुभारंभ पूरे देश में किया था. इसके उपरांत झारखंड में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम से आच्छादित 57.15 लाख लाख परिवारों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ दिया जा रहा है. यहां के 36.65 लाख लाभुकों का गोल्डन कार्ड बन चुका है.

आयुष्मान भारत योजना के तहत 1,84,258 लाभुक करा चुके हैं इलाज
झारखंड में आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में 1,84,258 लाभुक अपना इलाज करा चुके हैं. इन लाभुकों ने लगहभग 181 करोड़ का इलाज कराया है, जबकि राज्य के बाहर जाकर 1930 लाभुकों ने कुल 4.32 करोड़ रुपए का इलाज कराया है. श्री चंद्रवंशी ने बताया कि आय़ुष्मान भारत योजना के तहत लाभुकों के बेहतर इलाज को लेकर सरकार पूरी तरह चौकस है. उन्होंने बताया कि आय़ुष्मान भारत के तहत राज्य के 636 अस्पताल सूचीबद्ध हैं. इनमें 218 सरकारी और 418 निजी अस्पताल शामिल हैं. इनमें लाभुकों के इलाज में कोताही बरतने के मामले 20 अस्पतालों को निलंबित कर कारण पृच्छा पूछा गया है, जबकि 25 अस्पतालों को जुर्माना और 2 अस्पतालों को सूचीबद्ध अस्पतालों की लिस्ट से स्थाय़ी रुप से हटा दिया गया है.

वित्तीय वर्ष 2019-20 के बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र की छह नई योजनाओं को लागू करने की तैयारी
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2019-20 के बजट में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए छह नई योजनाओं को शामिल किया गया है. इसमें नवजात शिशुओं के लिए बेबी किट केयर योजना, 104 हेल्थ हेल्पलाइन सर्विसेज योजना के साथ, ममता वाहन योजना संचालन, कॉमन सर्विस सेंटर के द्वारा टेलीमेडिसीन के माध्यम से होम्योपैथिक उपचार योजना, शहरी स्लम एरिया में मोहल्ला क्लिनिक योजना, मुख्यमंत्री आरोग्य कुंजी योजना और बाइक एंबुलेंस योजना शामिल है. इनमें मुख्यमंत्री आरोग्य कुंजी योजना के लिए सरकार ने 8.20 करोड़ रुपए और 104 हेल्थ हेल्पलाइन सर्विसेज योजना के लिए 5 करोड़ रुपए की स्वीकृति दे दी है. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि नवंबर 2017 से 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन हो रहा है. यह सेवा आपात स्थितियों के लिए 24 घंटे 108 कॉल सेंटर से दी जा रही है. उन्होंने बताया कि फिलहाल 319 एंबुलेंसों का परिचालन राष्ट्रीय व राज्यमार्गों के साथ अलग- अलग जिलों में किया जा रहा है, जिसका फायदा लोगों को मिल रहा है.

देवघर स्थित एम्स में एडमिशन की प्रक्रिया शुरू, तीन मेडिकल कॉलेजों को भी शुरू करने की जोरशोर से चल रही तैयारी
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि देवघर स्थित एम्स में पहले बैच की पढ़ाई इसी साल से शुरू होने जा रही है. यहां 50 सीटों पर दाखिले के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. इसके अलावा हजारीबाग, पलामू और दुमका में मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भी एमबीबीएस की 100-100 सीटों के लिए पढ़ाई 2020-21 से शुरु करने को लेकर जोरशोर से तैयारी चल रही है. इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ मैनपावर की बहाली की प्रक्रिया जल्द शुरू कर दी जाएगी. उन्होंने बताया कि 885 करोड़ 25 लाख 42 हजार रुपए की लागत से इन तीन मेडिकल कॉलेजों का निर्माण किया जा रहा है. इसके साथ कोडरमा और चाईबासा में भी जिला अस्पतालों को उत्क्रमित कर मेडिकल कॉलेज खोलने की योजना को सरकार की स्वीकृति मिल चुकी है. इन दोनों मेडिकल कॉलेज के भवन निर्माण के लिए सरकार ने कुल 314.35 करोड़ रुपए की स्वीकृति दे दी है.

रिम्स को विश्वस्तरीय संस्थान बनाएंगे, मरीजों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं
श्री चंद्रवंशी ने कहा कि रिम्स झारखंड का सबसे बड़ा मेडिकल कॉलेज है. यहां राज्य के अलग-अलग इलाकों से इलाज कराने के लिए मरीज आते हैं. यही वजह है कि सरकार का फोकस रिम्स को विश्वस्तरीय संस्थान बनाने पर है ताकि यहां इलाज के लिए आनेवाले मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सके. सुपरस्पेशियलिटी क्लिनिक में दूसरे पाली में भी मरीजों का इलाज किया जा रहा है. इसके साथ डेंटल कॉलेज में नामांकन हेतु डेंटल काउंसिल की स्वीकृति, 40 सालों बाद रेडियोडायग्नोसिस की डिग्री व डिप्लोमा सीटों को एमसीआई ने मान्यता दे दी है. स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि रिम्स में एमबीबीएस की सीटों में इजाफे को भी अप्रूवल मिल चुका है. अब यहां 150 सीटों की बजाय 180 सीटों पर एडमिशन लिया जाएगा. मैनपावर की कमी को दूर करने के प्रति भी सरकार गंभीर है.  सुपरस्पेशियलिटी विभागों में 47 चिकित्सकों के पद पर बहाली प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जबकि अन्य पदों पर बहाली की प्रक्रिया जारी है अथवा जल्द शुरू कर दी जाएगी. स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि रिम्स में जल्द ही स्टेट ऑफ हार्ट आईसीयू की शुरूआत कर दी जाएगी.

कुष्ठ और यक्ष्मा रोगियों की पहचान के लिए 1 जुलाई से चलेगा अभियान
स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी ने संवाददाताओं को बताया कि राज्य में कुष्ठ और यक्ष्मा रोग के खात्मे के लिए सरकार कृतसंकल्प है. इस दिशा में इन दोनों रोगियों की पहचान के लिए पूरे राज्य में 1 से 14 जुलाई तक अभियान चलाया जाएगा. इसके लिए खोजी दल बनाए जाएंगे. यह दल कुष्ठ औऱ यक्ष्मा रोगियों की पहचान व चिन्हित कर जानकारी देंगे. इसके उपरांत उनका इलाज कराया जाएगा.

इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी, रिम्स के निदेशक डॉ डीके सिंह, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक रामलखन प्रसाद गुप्ता सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे.

जल, जंगल ज़मीन नारा नहीं, हमारी विरासतः सीएम रघुवर दास

 झारखंड मंत्रालय में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की समीक्षा बैठक .
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★ साढ़े चार साल में 36,310 हेक्टेयर वन संवर्द्धन का कार्य हुआ

★ जल-जंगल-जमीन हमारे लिए नारा नहीं है

★ आनेवाली पीढ़ी को हमें हरा भरा प्रदेश देना है

★ मुख्यमंत्री जन वन योजना का काफी अच्छे परिणाम


रांची। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि जल-जंगल-जमीन हमारे लिए महज नारा नहीं है। हमें विरासत में हरा भरा प्रदेश मिला है, आनेवाली पीढ़ी को हमें हरा भरा प्रदेश देना है। इसी को ध्यान में रख कर प्राकृतिक वनों को फिर से बढ़ाये जा रहे हैं। इसका नतीजा है कि साढ़े चार साल में 36,310 हेक्टेयर वन संवर्द्धन का कार्य हुआ है। पहली बार बांस-बखार की सफाई का काम भी किया गया। इसके भी काफी अच्छे नतीजे आये हैं। वन क्षेत्र में बांस उगाकर वहां के स्थानीय निवासी अच्छी आमदनी कर सकेंगे। उक्त बातें मुख्यमंत्री ने झारखंड भवन में आयोजित वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की समीक्षा बैठक में कहीं।

पिछले चार सालों में 69,750 हेक्टेयर वनभूमि पर पौधरोपण किया गया
मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि यह झारखंड के लिए उपलब्धि है कि झारखंड में कुल भौगोलिक क्षेत्रफल में 33.21 प्रतिशत वन हो गये हैं। अब राज्य के 26,475 वर्ग किमी क्षेत्र में वन व वृक्ष हैं। झारखंड में करम वृक्ष की पूजा की जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए पिछले वर्ष करम के पौधों का रोपन अभियान चलाया गया। इसमें पूरे राज्य में 60 हजार करम के पौधे लगाये गये हैं। वर्ष 2011 से 2014 तक राज्य में 20,068 हेक्टेयर वनभूमि में पौधरोपण किया गया, वहीं पिछले चार सालों में 69,750 हेक्टेयर वनभूमि पर पौधरोपण का काम किया जा चुका है।

जंगलों में रहनेवाले लोगों को  सड़क, पानी आदि मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराएगी सरकार
मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि सरकार ने जंगलों में रहनेवाले लोगों को वन पट्टा दे दिया है। अब उन्हें सड़क, पानी आदि मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराना भी सरकार का काम है। डीएफओ से रिपोर्ट मंगाये कि कहां-कहां इसकी जरूरत है।

मुख्यमंत्री जन वन योजना का काफी अच्छे परिणाम
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री जन वन योजना का काफी अच्छे परिणाम आये हैं। इस योजना में पौधे लगाने के लिए राज्य सरकार 75 प्रतिशत अनुदान देती है। इससे अब तक 1116 किसान लाभांवित हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने यह संख्या और बढ़ाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण में भी वन विभाग की अहम भूमिका हो सकती है। वन विभाग ऐसी योजनाएं बनाये ताकि बरसात का पानी वन क्षेत्रों में ही रोका जा सके। इसके लिए छोटे-छोटे चेक डैम, बोरा बांध आदि बनाये जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को खेत की मेढ़ पर पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करें। साल-सागवान जैसे पेड़ उनके लिए लंबी अवधि में काफी लाभदायक साबित होंगे। वनोपज के वेल्यू एडिशन को बढ़ावा देने का निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि महुआ से काफी अच्छे लड्डू बनते हैं। ग्रामीणों को इसके लिए प्रेरित करें। इससे अवैध शराब का निर्माण भी रुकेगा और महिलाओं को अच्छी आमदनी भी होगी। डीएफओ को इसके लिए लगायें, जो ग्रामीणों को इसके लिए जागरूक और प्रशिक्षित करे। इस वर्ष सात जुलाई से छह अगस्त तक नदी सह वन महोत्सव मनाया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसे जन आंदोलन बनायें। ज्यादा से ज्यादा लोगों को इससे जोड़ें।

बैठक में वन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री इंदुशेखर चतुर्वेदी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ सुनील कुमार बर्णवाल, पीसीसीएफ श्री संजय कुमार समेत अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।

पेयजल स्वच्छता एवं जल संसाधन विभाग के कार्य प्रगति की समीक्षा

सीएम रघुवर दास ने कहा-

★ 30 सितंबर तक सभी आदिम जनजाति टोलों में पाइप लाइन से पानी पहुंचाने का कार्य पूरा करें

★ जल संचयन पर जोर रहे


रांची। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि 30 सितंबर तक सभी आदिम जनजाति टोलों में पाइप लाइन से पानी पहुंचाने का कार्य पूरा करें। 6,676 जनजाति बहुल टोलों में पाइप लाइन से पेय जल कार्य प्रगति पर है। 75% जनजातीय टोलों में 15 अक्टूबर तक कार्य पूरा करें। नदियों पर वीयर योजना के तहत 6 से 10 फीट के बांध बनाकर वर्षा के जल को रोकने की योजना बनाएं। मुख्यमंत्री ने झारखण्ड मंत्रालय में पेयजल स्वच्छता और जल संसाधन विभाग की समीक्षा करते हुए यह निदेश दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 में झारखंड में पेयजल एक चुनौती थी। अलग राज्य बनने के बाद 14 सालों में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई थी। 2015 के शुरू में महज 12% आबादी तक पेयजल की सुविधा थी जो साढ़े 4 साल में बढ़कर कर 34.77% हो गई.

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2015 से पहले किसी आदिम जनजाति टोलों के लिए पेयजल कार्यक्रम नहीं था. 2015 के बाद योजनाएं बनीं और काम शुरू हुआ। 2,251 आदिम जनजातीय दोनों में पेयजल पहुंचाने का कार्य शुरू हुआ है.162 टोलों में कार्य पूरा हो गया है तथा 30 सितंबर तक सभी आदिम जनजाति टोलों में पाइप लाइन से जल जाए यह सुनिश्चित करें।

इसी तरह राज्य गठन के 14 साल बाद पहली बार मुख्यमंत्री जन जल योजना के तहत आदिवासी बहुल 11,124 टोलों के लिए पेयजल का अभियान शुरू हुआ है. इनमें 6676 टोलों में कार्य शुरू हो गया है. 15 अक्टूबर तक 75 % लगभग 5000 से अधिक टोलों में पाइप लाइन से पेयजल पहुंच जाए यह सुनिश्चित करें.

मुख्यमंत्री ने कहा कि गैर जनजातीय आबादी के 28469 गांव में पाइप लाइन से जल पहुंचाने का कार्य डीएमएफटी, 14वें वित्त आयोग के फंड, आकांक्षी जिलों के लिए प्राप्त आवंटन, विधायक निधि से कार्य हो रहा है. इसकी लगातार मोनिटरिंग होनी चाहिए।

 पिछले साढे 4 वर्षों में बढ़ कर शत-प्रतिशत घरों में शौचालय उपलब्ध
बैठक में स्पष्ट हुआ कि 2 अक्टूबर 2014 को 16.25% घरों में टॉयलेट था जो उस समय के राष्ट्रीय औसत 38.7% से पीछे था और आज झारखंड आज शत-प्रतिशत हो गया है, जो राष्ट्रीय औसत 99.26% से अधिक है. मुख्यमंत्री ने कहा कि जो भी घर परिवार छूटे हुए पाए जाते हैं अथवा पुराने स्लिप शौचालय हैं उन सब को तत्काल पूरा करें.

6 से 10 फीट के बांध बनाकर वर्षा के जल को रोेकें
जल संसाधन विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नदियों पर वीयर योजना के तहत 6 से 10 फीट के बांध बनाकर वर्षा के जल को रोकने की योजना बनाएं इससे भूगर्भ जल स्तर भी बढ़ेगा तथा पेयजल और सिंचाई भी संभव हो सकेगा.

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2015-16 में लघु सिंचाई प्रक्षेत्र में 6 चेक डैम की योजनाएं पूर्ण थी, जिससे केवल 290 हेक्टेयर भूमि सिंचित होती थी लेकिन 2019 तक लघु सिंचाई प्रक्षेत्र में 1300 चेक डैम का निर्माण हुआ जिससे 70,067 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई क्षमता में वृद्धि दर्ज की गई. मुख्यमंत्री ने कहा कि लघु सिंचाई प्रक्षेत्र क्षेत्र में 2015- 16 में 239 मध्यम सिंचाई योजना लागू थी, जो 2016 से 2018-19 तक 571 मध्यम सिंचाई योजनाएं लागू हुई, जिससे सिंचाई क्षमता बढ़कर 30,700 हेक्टेयर भूमि हो गई.

बैठक में पेयजल स्वच्छता एवं जल संसाधन विभाग के मंत्री रामचंद्र सहिस, मुख्य सचिव डॉ डीके तिवारी, अपर मुख्य सचिव सह जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉक्टर सुनील कुमार वर्णवाल, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की सचिव आराधना पटनायक सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे.

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...