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रविवार, 15 सितंबर 2019

हर महीने के तीसरे रविवार को जांच शिविर लगाएगा मारवाड़ी युवा मंच


रांची। आज 15 सितंबर को मारवाड़ी युवा मंच, रांची शाखा के तत्वावधान में मोरहाबादी स्थित ऑक्सीजन पार्क में निःशुल्क जांच शिविर लगाया गया।

जांच शिविर के माध्यम से शुगर, रक्तचाप, की जांच की गई। शिविर में लगभग 100 लोगों ने शुगर एवं रक्तचाप की जाँच करवाई।

निःशुल्क जांच शिविर लगाने में राजगढ़िया स्पेशिलिटी का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

मारवाड़ी युवा मंच, रांची शाखा के अध्यक्ष विशाल पाड़िया ने कहा कि, नियमित जांच के माध्यम से लोगो मे रोग के प्रति जागरूकता फैलती है। उन्होंने कहा कि भागदौड़ की जिंदगी में रोगों के प्रति सचेत नियमित जांच से रहा जा सकता है।

सचिव विकास अग्रवाल ने कहा कि, युवा मंच के द्वारा, हर महीने के तीसरे रविवार को निःशुल्क जांच शिविर लगाया जा सकता है। उन्होंने शहर वासियों से आग्रह किया कि हर महीने के तीसरे रविवार को शहर वासी निःशुल्क जांच का लाभ उठा सकते है।

निःशुल्क जांच शिविर में रोहित सरावगी, विकास गोयल, समेत अन्य सदस्य शामिल थे।

राजा नरपति सिंह बालिका उचिच विद्यालय में शिक्षक-अभिभावक मीट


चक्रधरपुर। राजा नरपति सिंह बालिका उच्च विद्यालय में आज शिक्षक अभिभावक संघ की बैठक का आयोजन किया गया जिसमें बहुत संख्या में अभिभावकों की उपस्थिति रही ।कार्यक्रम का आरंभ स्वागत गान से किया गया फिर बाल संसद के परिचय साथ ही नये शिक्षकों का परिचय सह स्वागत अभिनंदन किया गया।अभिभावकों को ज्ञान सेतु के बारे में विस्तार से बताया गया और जल संरक्षण की जानकारी दी गयी।साथ ही सभी छात्राओं को प्रतिदिन विद्यालय आने के लिये प्रोत्साहित करने को कहा गया।कार्यक्रम में 99% उपस्थित बच्चियों व क्लास 10 वीं की प्रथम द्वितीय व तृतीय आने वाली छात्राओं को पुरस्कार दिया गया।मुख्य अतिथि तनवीर अख्तर अंसारी सर के द्वारा संबोधित किया गया साथ प्राचार्य आरती प्रधान के द्वारा विद्यालय की प्रगति व सभी साधनों की जानकारी दी गयी।कार्यक्रम में सभी शिक्षकों ने अपना पूरा सहयोग दिया।नजीब असरफ, शाहनाज परवीन, नीतू साहू, भवानी महतो ,राजन प्रधान,मंजू कंदयायग,जयश्री मुंडू,प्रभावती महतो श्रवण महतो शामिल हुए।

कर्तव्यनिष्ठा की प्रतिमूर्ति हैं एसपी इंद्रजीत माहथा


चाईबासा। कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी और लगन के बलबूते इंसान सफलता की सीढ़ियां चढ़ता जाता है।  कम समय में ही लोगों के बीच लोकप्रियता हासिल करने में सफल हो जाता है। ऐसी ही एक शख्सियत हैं पश्चिम सिंहभूम के पुलिस आरक्षी अधीक्षक इंद्रजीत माहथा। श्री माहथा वर्ष 2009 बैच के आईपीएस हैं। अपनी बेहतरीन कार्यशैली से उन्होंने पुलिस महकमे में तो एक विशेष पहचान स्थापित कर ही ली है, इसके अलावा जनता के बीच भी उन्होंने अच्छी खासी लोकप्रियता अर्जित की है। अपने सेवाकाल के दौरान वह जहां भी पदस्थापित रहे, अपनी प्रतिभा प्रदर्शित कर जनता का दिल जीतने में सफल रहे हैं। श्री माहथा का भारतीय पुलिस सेवा में चयन होने के बाद पहला पदस्थापन राजधानी रांची के हटिया में एएसपी के पद पर हुआ। यहां उन्होंने अपनी बेहतरीन कार्यशैली का परिचय देते हुए बखूबी अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। मृदुभाषी, अनुशासन प्रिय और अपराध नियंत्रण के प्रति सदैव सक्रिय रहने वाले श्री माहथा अपने दायित्वों के प्रति सजग रहते हैं। सरायकेला-खरसावां जिले के पुलिस अधीक्षक पद पर रहते हुए उन्होंने अपराध नियंत्रण और नक्सली गतिविधियों को काबू करने की दिशा में कई उल्लेखनीय कार्य किए, जिसे उक्त जिले की जनता आज भी याद कर उनके प्रति सम्मान का इजहार करती है। सरायकेला-खरसावां जिले के निवासियों को उन्होंने बेहतर विधि व्यवस्था देने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब सरायकेला-खरसांवा से उनका स्थानांतरण अन्यत्र हुआ, तब वहां के निवासियों ने उनका स्थानांतरण रुकवाने के लिए सड़कों पर उतर कर आंदोलन भी किया। विभागीय कार्यों का निष्पादन और थानों में लंबित मामलों के जल्द से जल्द निपटान के लिए वह सदैव प्रयासरत रहते हैं। अपने मातहत कर्मियों को भी वह हमेशा निर्देशित करते रहते हैं कि मामलों को जल्द से जल्द निपटायें। उनका यह प्रयास होता है कि किसी भी मामले में निर्दोष व्यक्ति को नहीं फंसाया जाए। श्री माहथा तकरीबन ढाई वर्षों तक पलामू में भी एसपी के पद पर पदस्थापित रहे। पलामू के अति उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण में उन्हें सफलता मिली। अपनी बेहतरीन कार्य कुशलता की बदौलत श्री माहथा जनता के चहेते पुलिस अधिकारियों की सूची में अग्रिम पंक्ति में हैं। शहर को अपराध मुक्त बनाने की दिशा में वह सदैव प्रयासरत रहते हैं। आम जनता के साथ उनका मैत्रीपूर्ण संबंध होता है। पुलिस-पब्लिक फ्रेंडली वातावरण निर्माण के लिए वह सतत प्रयासरत रहते हैं। उनका मानना है कि पुलिस जनता की सेवक और रक्षक हैं। इसी रूप में जनता के साथ उनका मित्रवत व्यवहार होना जरूरी है। फिलवक्त श्री माहथा पश्चिम सिंहभूम चाईबासा जिले के एसपी हैं। जिले में अपराध पर काबू पाने के लिए उन्होंने सभी थानों को विशेष रूप से दिशा निर्देशित किया है। अपराध नियंत्रण उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने आदिवासियों के स्वशासन को भी मान सम्मान दिया है। कोल्हान- पोड़ेया हाट के इलाके में परंपरागत मानकी-मुंडा प्रशासन प्रचलित है। 1832 के कोल विद्रोह के बाद तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने विलकिंसंस रूल्स के जरिए इस व्यवस्था को संवैधानिक मान्यता भी प्रदान की थी। आजादी के बाद लंबे समय तक इस व्यवस्था की उपेक्षा की गई। इंद्रजीत माहथा ने मानकी-मुंडा प्रशासन और पंचायती राज व्यवस्था के बीच एक संतुलन कायम किया। तमाम मानकियों और मुंडाओं को पहचान पत्र जारी किया और काम करने की आजादी दी। रघुवर सरकार ने भी उन्हें मालगुजारी की रसीद काटने का अधिकार देकर उनका मान बढ़ाया। विभागीय कार्यों के प्रति सजग और सक्रिय रहना श्री माहथा की दिनचर्या में शामिल है। वे कहते हैं कि जनता को स्वच्छ शासन-प्रशासन देना  सरकारी अधिकारियों का दायित्व बनता है। इस दिशा में सकारात्मक प्रयास के साथ जुटे रहना चाहिए। चाईबासा क्षेत्र के सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों में उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के प्रति भी गंभीरता दिखाते हुए ग्रामीणों का दिल जीत लिया है। वह आम जनता के मित्र हैं, तो अपराधियों के लिए जानी दुश्मन के समान हैं। वह खासकर ग्रामीण युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जुड़े रहकर अपने उज्जवल भविष्य निर्माण के प्रति संवेदनशील रहने की अपील करते हैं। श्री माहथा की कार्यशैली अन्य पुलिस कर्मियों के लिए अनुकरणीय हैं। उनका व्यक्तित्व प्रेरणास्रोत है।
प्रस्तुति : विनय मिश्रा

शनिवार, 14 सितंबर 2019

...और नायक से खलनायक बन गए गडकरी




देवेंद्र गौतम
मोटर वाहन अधिनियम में भारी-भरकम जुर्माने के प्रावधान के पक्ष में केंद्रीय परिवहन मंत्री का तर्क किसी के गले नहीं उतर पा रहा। यहां तक कि भाजपा शासित राज्य भी उसे हू-ब-हू लागू करने को तैयार नहीं। सबसे पहले पीएम मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के गृह प्रदेश गुजरात से ही इनकार के स्वर फूटे। गुजरात सरकार ने जुर्माने की राशि में 90 फीसद कटौती कर दी। विपक्षी दलों के शासन वाले प्रदेशों ने इसे लागू करने से पूरी तरह मना कर दिया। बिहार और झारखंड जैसे राज्यों ने इसे लागू करने के लिए तीन माह का समय तय किया। एक सितंबर को इसे लागू किए जाने के बाद देश के विभिन्न इलाकों में पुलिस और जनता के बीच हिंसक टकरावों की खबरें आने लगीं। दिल्ली में बहुत से लोगों ने निजी वाहनों पर चलना बंद कर दिया। बसों और मेट्रो में भीड़ बढ़ गई। स़ड़कों पर चालान का आतंक पसरने लगा। लेकिन गडकरी साहब इसके बाद भी कहते रहे कि यह स़ड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता लाने के लिए किया गया है। राजस्व इकट्ठा करना सरकार का मकसद नहीं है। यह अलग बात है कि झारखंड जैसे छोटे राज्य में 60 घंटे के अंदर 25 लाख का जुर्माना वसूल लिया गया। देशभर में करोड़ों की वसूली हो गई।
यह पहला मौका है जब नितिन गडकरी की सोच पर सवालिया निशान लगा। वे उसी जमात का हिस्सा नज़र आने लगे जो मोदी सरकार के मंत्रियों और उनके भक्तों की विशिष्टता रही है। सत्ता का अहंकार गडकी के अंदर इससे पहले कभी परिलक्षित नहीं हा था। उनके मंत्रालय में 2014 से लेकर अभी तक जितने काम हुए उन्हें सराहा गया। उनके मंत्रालय के प्रदर्शन को मोदी सरकार की उपलब्धि माना गया। वे कभी किसी तरह के विवाद में नहीं रहे। उटपटांग बयानबाजी से भी दूर रहे। लेकिन न्यू मोटर व्हेकिल एक्ट ने उन्हें जनता की नज़र में नायक से खलनायक बना दिया। उन्होंने आर्थिक मंदी में आम जनता की वित्तीय स्थिति पर सोचने की कोई जरूरत नहीं समझी। यदि तमाम राज्य सरकारें उनके तर्क से सहमत होकर जबरिया चालान काटने में लगी रहतीं तो देश में गृहयुद्ध तक की नौबत सकती थी। गडकरी जी इतने अमानवीय, जिद्दी और असंवेदनशील हो सकते हैं किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। भारी जुर्माना लगाने से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आ जाएगी यह गडकरी की सोच हो सकती है। दुर्घटनाओं का कारण जर्जर सड़कें और ट्रैफिक सिग्नलों की गड़बड़ी भी हो सकती है यह बात उनके जेहन में नहीं आई। उन्होंने अमेरिका, जर्मनी और फ्रांस की नकल करनी चाही लेकिन उनकी सड़कों का अपनी सड़कों से उनकी यातायात प्रणाली की अपनी प्रणाली से तुलना करके नहीं देखी। बड़े गर्व के साथ उन्होंने कहा कि उनका भी चालान कटा है। तो क्या भारत का हर नागरिक उनकी तरह धनी है कि लाख-पचास हजार से उसे फर्क नहीं पड़ता।
2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान जब भाजपा की ओर से नितिन गडकरी का प्रधानमंत्री के वैकल्पिक उम्मीदवार के रूप में नाम आ रहा था तो लोग उत्साहित थे कि एक सुलझे हुए नेता के हाथ में सत्ता की लगाम आ सकती है जो कम से कम बिना किसी तैयारी नोटबंदी और जीएसटी जैसा पागलपन भरा निर्णय नहीं लेंगे। लेकिन अब लोगों को लग रहा है कि अच्छा हुआ कि ऐसी नौबत नहीं आई अन्यथा सत्ता हाथ में आने पर गडकरी तो इससे भी ज्यादा क्रूर और अमानवीय हो सकते थे।
भाजपा नेताओं के साथ समस्या यह है कि सत्ता में आने के बाद उनकी नजर विकसित देशों पर लगी रही और वे भारत की मूलभूत समस्याओं को पूरी तरह भूल गए।  


शक्तिपीठ सेक्टर टू में सामूहिक श्राद्ध तर्पण संस्कार



रांची। गायत्री युग तीर्थ शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में पीठासीन शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा रांची में शान्तिकुंज प्रतिनिधि धर्मनाथ झा के सौजन्य से सामूहिक श्राद्ध तर्पण संस्कार का कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया । यह 28 सितंबर तक चलेगा। आज करीब एक दर्जन से अधिक  परिजनों ने भागीदारी की । कार्यक्रम कर्मकाण्ड का कार्यान्वयन झा ने किया और इस पर्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि
पितृपक्ष पितरों के श्रद्धा अभिव्यक्त करने का यह महापर्व है ।
 पितृपक्ष अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने,उनका स्मरण करने और उनके प्रति अपनी आस्था निष्ठा व श्रद्धा भाव अभिव्यक्त करने का महा पर्व है । मान्यता है कि  इस अवधि में हमारे पितर अदृश्य जगत में अपने  पुत्र-पौत्रों के यहां विचरण करते हैं। विशेष रूप से वे तर्पण की कामना करते हैं। श्राद्ध से पितृगण प्रसन्न होते हैं और श्राद्ध करने वालों को सुख-समृद्धि, सफलता, आरोग्य और संतानरूपी फल भी देते हैं।
उन्होंने इस संबंध में जानकारी दी कि परम पूज्य गुरुदेव श्री राम शर्मा आचार्य युगऋषि द्वारा लिखित मैं कौन हूं, हमारे मरने के बाद क्या होता है ,मरणोतर श्राद्ध संस्कार जैसी कुछ साहित्य का अध्धयन किया जा सकता है। आगे
पितृपक्ष में  हमें कुछ प्रयास
करने को कहा:-
*पशु-पक्षियों को भोजन कराएं।
* गरीबों और ब्राह्मणों को अपने सामर्थ्यनुसार दान करें।
*कोई शुभ और नए कार्य की शुरुआत इस अवधि में न करने चाहिए। पितृ तर्पण कार्य के बाद विशिष्ट मंत्रों  के माध्यम से पितरों की आत्मा की शांति व सद्गति प्राप्ति तथा   अपने आंतरिक विकास के लिए भी यज्ञाहुतियां दीं गयीं ।
इस कार्यक्रम में शक्तिपीठ की ओर से परिजनों के लिए अधिकतर साधन सामग्री में बर्तन, थाली परात तगाड़ी, केला पत्ता, कुश पवित्री, चावल तिल,जौ आटा, दूध, दही, फूल चन्दन ईत्र आदि की व्यवस्था की गई थी । कुछ परिजन द्वारा भी अपनी ओर से लायी गई थी।
अंत में
वंदना प्रार्थना एवं मंगल कामना करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया।
इसमें भागीदारी रही कर्मेंद्र कुमार, ललित वर्मा,श्रीनिवास शर्मा,प्रमोद कुमार, राजेश प्रसाद, रामचरण यदुवंशी, रणवीर सिंह , मनोज कुमार पाण्डेय सहितअन्य अनेक लोगों की।

पोस्टल विभाग के पेंशनर्स एसोसिएशन की बैठक, आंदोलन जारी



रांची। आज रांची जीपीओ में पोस्टल/आरएमएस पेंशनर्स एसोसिएशन की बैठक केडी राय व्यथित की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई.
बैठक को सम्बोधित करते हुए स्टेट सेक्रेटरी ने कहा कि आज देश भर में पेंशनर्स अपनी 10 सूत्री मांगों के समर्थन में आंदोलन कर रहा है. मीटिंग के बाद हम लोग धरना-प्रदर्शन कर मांगों का ज्ञापन माननीय प्रधानमंत्री को प्रेषित किये जाने के लिए वरिष्ठ डाकपाल,रांची जीपीओ को सौंपेगे.
पिछले माह के एक दिवसीय धरने की चर्चा करते हुए सचिव ने कहा कि हमारी 9 सूत्री मांगों पर चीफ पीएमजी कार्यालय में गम्भीरता से विचार किया जा रहा है.23 अगस्त को पूरे झारखण्ड में पेंशन अदालत लगाई गई और स्थल पर पेंशनर्स की समस्याओं का समाधान किया गया.पहचान पत्र बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है.एटीएम कार्ड जारी किया जा रहा है.अंतिम कार्यदिवस पर पेंशन भुगतान सुनिश्चित किया गया है.पेंशन भुगतान के लिए डाकघरों में 5दिन काउंटर खोले जाने का आदेश निर्गत कर दिया गया है.
प्रशासन गम्भीरता से पेंशनर्स की समस्याओं को ले रहा है.
ये केवल हमारे सांगठनिक रूप से सक्रिय होने से हुआ है.
आज पूरे राज्य में पेंशनर्स एसोसिएशन की यूनिट गठित की जा चुकी है.
जयपुर की 1-2 नवम्बर को आयोजित  ऑल इंडिया कॉन्फ्रेंस में झारखण्ड से 1 प्रतिनिधि और 5 पर्यवेक्षक भाग लेने जा रहे हैं.
अगले महीने से झारखण्ड की नव गठित यूनिट को सक्रिय बनाने के लिए   धनबाद,जमशेदपुर, दुमका,गिरिडीह,पलामू,हज़ारीबाग,गुमला का दौरा किया जाएगा.
सभा को पूर्व डाक अधीक्षक अमरनाथ मिश्रा,पूर्व सहायक डाक अधीक्षक आरएन पांडेय सहित त्रिवेणी ठाकुर,दिनेश्वर शर्मा,बॉयस टोप्पो,हसीना तिग्गा आदि ने सम्बोधित किया.
सभा के बाद 10 सूत्री मांगों के समर्थन में परिसर के बाहर धरना दिया गया .धरना के पश्चात एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल वरिष्ठ डाकपाल से मिलकर मांगो का ज्ञापन जो माननीय प्रधानमंत्री के नाम था,सौंपा सौंपा.
मुख्य मांगें
1.बहाली के समय दिए प्रशक्षिण अवधि की गणना कर प्रोन्नति में पेंशनर्स को  इसका लाभ देना
2.1.1.1996 से पोस्टमेन/मेलगार्ड के बढ़े हुए वेतन /पेंशन का पुनरीक्षण कर अविलम्ब  लागू करना
3.MACPके लाभ को 1.1.2006 से समस्त केंद्रीय पेंशनर्स पर  लागू करना
4.जो पोस्टल डिस्पेंसरी सीजीएचएस में covert की गई हैं,उसमे पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति को सुनिश्चित करना
5.non-CGHS क्षेत्र में रहने वाले ऐसे पेंशनर्स जो CGHS में इंट्री किये है,उनके लिए CGHS की दर का पुनर्निर्धारण। आदि

किड्स जोन स्कूल में हिंदी दिवस पर कई प्रतियोगिताएं


चक्रधरपुर। किड्स जोन इंग्लिश मीडियम स्कूल में हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी भाषा का सेमिनार, निबंध कंपटीशन करवाया गया जिसमें क्लास 1 से क्लास 7 के लगभग 100 बच्चों ने भाग लिया। वहीं क्लास  मोंटेसरी से क्लास यूकेजी तक ड्राइंग, पेंटिंग आदि का कंपटीशन कराया गया जिसमें सुहाना, आशिया सलमान, ज्योति, कीर्ति, रेयान, उजमा,  आफिया आदि बच्चों ने भाग लिया जिसमें सारी शिक्षिकाओं में  गौरी मैडम, राकीबा परवीन, नूर शमा ,जयन्ती कुमारी, सादमा,प्याली  चटर्जी, नाजिया सुल्ताना ,अंजलि साव, सोनिया छाबरा ,शालिनी तियू  आदि बच्चों को प्रोत्साहित किया।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...