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सोमवार, 30 जुलाई 2018

रांची के फलक पर बालीवुड के सितारे


शुरू हुई हिन्दी फिल्म हंच की शूटिंग  

 निर्माता- निर्देशक संग कलाकारों की टीम पहुंची 

रांची। ग्रीब्स मीडिया प्रोडक्शंस प्राईवेट लिमिटेड के बैनर तले बन रही हिंदी फिल्म हंच की पूरी शूटिंग झारखंड की राजधानी रांची में की जाएगी। इस फिल्म की पूरी कहानी एक सच्ची घटनाओं पर आधारित है। फिल्म की कहानी झारखंड पुलिस के जवानों की जांबाजी एवं उसके हिम्मत पर आधारित है। इस फिल्म के द्वारा जवानों के हौसले को ऊंचाई तक पहुंचाने का काम किया गया है।
यह एक थ्रिलर फिल्म है, इस फिल्म के अंदर दो बेहतरीन और दिलों को छू लेनेवाले गाने हैं, जो फिल्म प्रेमियों को खूब पसंद आयेगा। इस फिल्म में झारखंड के बहुत सारे जूनियर आर्टिस्ट को काम करने का मौका दिया गया है। झारखंड की कला-संस्कृति और यहां की सभ्यता को देश सहित पूरे विश्व में बढ़ावा देने के उद्देश्य फिल्माया जा रहा है। कला-संस्कृति विभाग के पर्यटक स्थलों को शूट का लाॅकेशन बनाया गया है। इस फिल्म में राज्य के सभी महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों को दर्शाया जा रहा है। इस संबंध में फिल्म के निर्माता फखरूद्दीन ने पत्रकारों को बताया कि
इस फिल्म की शूटिंग रांची में 22 दिनों तक चलेगी और सबसे बड़ी बात यह है कि इस फिल्म को सरकार की तरफ से प्रशासनिक सहयोग मिल रही है और हमारे ग्रीब्स मीडिया एंड प्रोडक्शन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के तरफ से यहां के सरकार को बधाई देती है और इस फिल्म के निर्माता मोहम्मद फारुखउद्दीन, निर्देशक सोमित्री शंकर घोष है, वहीं संगीतकार परेश शाह और अंजना अंकुर सिंह है।
फिल्म पीआरओ संजय पुजारी ने बताया कि ग्रीब्स मीडिया प्रोडक्शनस प्राईवेट लिमिटेड के बैनर तले बन रही हिंदी फिल्म हंच में  मुख्य भूमिका में बाॅलीवुड अभिनेता रॉक स्टार रवि किशन, सब्यसाची चक्रवर्ती, प्रियंका मंडल, अश्विनी शुक्ला, सौरभ चटर्जी, जोली भाटिया, अरशद खान, बौद्धि स्वतः मजूमदार सहित झारखंड से कई जुनियर कलाकार शामिल हैं।

बारूदी धमाकों के बीच कैसे रहेंगे बाघ


रांची। 30 जुलाई को वर्ल्ड टाइगर डे के मौके पर झारखंड की राजधानी रांची में बाघ विशेषज्ञों की कार्यशाला आयोजित हुई। इसमें झारखंड में बागों के एकमात्र पनाहगाह पलामू टाइगर प्रोजेक्ट पर मुख्य रूप से चर्चा की गई। पूरे देश में बाघों की जनसंख्या बढ़ी है लेकिन झारखंड में तेजी से घटी है। 2010 में जहां देश में 1706 बाघ थे वह 2014 की गणना में 2226 तक पहुंच गए। 2014 में पलामू टाइगर रिजर्व में मात्र छह बाघ पाए गे थे लेकिन इस वर्ष फरवरी माह के बाद किसी बाघ को देखे जाने की पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अभयारण्य के आसपास की मानव आबादी और गौपालकों के मवेशियों के कारण बाघों का विकास बाधित हो रहा है। फिलहाल वन विभाग ने कोर एरिया के 8 गावों को हटाने और अन्यत्र बसाने का प्रस्ताव तैयार किया है। अभ्यारण्य के बफर एरिया के 189 गावों को भी परियोजना के लिए नुकसानदेह बताया जा रहा हैं।
कार्यशाला में सभी बिंदुओं पर तो चर्चा की गी लेकिन नक्सलियों के कारण वन्य जीवन पर पड़ते दुष्प्रभाव पर कोई चर्चा नहीं की गई। जहां आ दिन सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ चलती हो, जहां आए दिन लैंड माइन विस्फोट होते हों वहां वन्य जीवन कैसे सुरक्षित रह सकता है। बाघ मांसाहारी जीव अवश्य होता है लेकिन वह शांत माहौल में रहना पसंद करता है। शोर-शर्राबे और रात-दिन बारूदी धमाकों के बीच वह नहीं रह सकता। यदि 2014 में छह बाघ थे तो वे शोर-हंगामे के कारण किसी और इलाके में चले गए होंगे। नक्सलियों के आतंक के कारण वन विभाग के लोग और वन्य जीवन के विशेषज्ञ अभ्यारण्य में काम नहीं कर पाते। निगरानी के लिए लगाए गए कैमरे सुरक्षित नहीं रह पाते। क्योंकि वे वन्यजीवों के साथ नक्सलियों की गतिविधियों को भी रिकार्ड करते हैं। लिहाजा नक्सली उन्हें तोड़ डालते हैं। व्यावहारिक बात यह है कि सिर्फ मानव बस्तियों को हटा देने या गौपालकों के मवेशियों को अलग स्थान पर ले जाने भर से बाघों के विकास की गारंटी नहीं की जा सकती। 1130 वर्ग किलोमीटर में फैले स अभ्यारण्य में वन विभाग से कहीं ज्यादा पहुंच नक्सलियों की है। वे सुरक्षा बलों से लड़ने की तैयारी में रहते हैं। सुरक्षा बलों के साथ बाघों के खतरे को बनाए रखने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं हो सकती। पलामू टाइगर रिजर्व की सुरक्षा के लिए ग्रामीणों से अधिक खतरनाक नक्सलियों की मौजूदगी है। वे दूसरे इलाकों में चले जाएं तभी वहां का वन्य जीवन आबाद हो सकेगा।

रविवार, 29 जुलाई 2018

मेरे वास्तविक जीवन से प्रेरित किरदार है भैरवीः तोरल


सब टीवी पर शीघ्र प्रसारित होने वाले सीरियल नमूने के कलाकार तोरल रासपुत्र का साक्षात्कार



तोरल रासपुत्र झलक दिखला जा, बालिका बधु, मेरे सांई और ससुराल सिमर का जैसे लोकप्रिय टीवी सीरियलों में काम कर चुकी हैं। सब टीवी पर जल्द ही शुरू होने वाले नए सीरियल नमूने में वे भैरवी का किरदार निभा रही हैं। तोरल रासपुत्र से बातचीत के कुछ अंश....


सवालः ‘नमूने’ में अपने किरदार भैरवी के बारे में बताएं?

तोरलः यह सकारात्मक, प्यार एवं परवाह करने वाली, आत्मनिर्भर और बहुत ही सशक्त किरदार है। वह अपने पति से बहुत प्यार करती है, जोकि जीवन में हंसना भूल चुका है। उसके अंदर गजब का सेंस ऑफ ह्यूमर भी है।


सवालः क्या आपने इस भूमिका के लिये कोई तैयारी की है? आपने इस भूमिका के लिये किस तरह तैयारी की?

तोरलः  सच कहूं, तो ऐसा कुछ भी नहीं है। यह जितना स्वभाविक होगा यह शो उतना ही मजेदार होगा। मैं बिलकुल अलग तरह का किरदार निभा रही हूं और मुझे लगता है कि यदि मैं इस भूमिका के लिये तैयारी करूंगी तो मजा चला जायेगा।

सवालः क्या आपको किसी चुनौती का सामना करना पड़ा?

तोरलः यह किरदार मेरे वास्तविक जीवन से प्रेरित है। मैंने अब तक जितनी भी भूमिकाएं निभाई हैं, सब काफी गंभीर किस्म की रही हैं, जिसमें लंबे-लंबे संवादों के साथ काफी सारा ड्रामा रहा है। मुझे लगता है कि इस भूमिका के लिये काफी सारी स्वाभाविकता और स्थिति के अनुसार होने वाली कॉमेडी चाहिये। इसे करना काफी मजेदार है।

सवालः यह किरदार कितना वास्तविक है?

तोरलः ‘नमूने’ की भैरवी की तरह, मैं असलियत में अपने परिवार को बहुत प्यार करती हूं और उनकी परवाह करती हूं। मुझे हमेशा मुस्कुराते रहना और हंसना अच्छा लगता है। चूंकि, मैं जुगाड़ू इंसान नहीं हूं, इसलिये असलियत में मैं अपने किरदार की तरह बहुत चुलबुली नहीं हूं।

सवालः क्या आपने पी.एल देशपांडे की कोई किताब पढ़ी है?

जवाबः स्कूल में मुझे याद है कि मैंने उन पर एक चैप्टर पढ़ा था। मैं उनके बारे में काफी कुछ जानती हूं और इस शो में काफी कुछ जानने का मौका मिलेगा।

सवालः क्या आपके जीवन में इस तरह के नमूने हैं?

तोरलः  नहीं, इस तरह के तो नहीं। मेरे जीवन में इस तरह का कोई नमूना नहीं है। हालांकि, मुझे लगता है कि हर कोई एक ‘नमूना’ है, क्योंकि कोई परफेक्ट नहीं होता। 

सवालः आपने जिस तरह की भूमिकाएं निभाई हैं, उससे यह किरदार कितना अलग है?

जवाबः भैरवी की सारी बातें बहुत सरल हैं। इस शो में उसके किरदार से लेकर उसके लुक तक। वह बहुत स्वाभाविक और मजेदार है। अब तक मैंने केवल गंभीर भूमिकाएं ही निभाई हैं और मैं टेलीविजन पर इसी तरह की और भूमिकाएं निभाना चाहूंगी।


सवालः इस शो में दर्शकों को क्या देखने को मिलेगा?

तोरलः हंसना और मुस्कुराना बहुत जरूरी होता है। यह शो बहुत ही मजेदार है और इसमें यह देखना मजेदार होगा कि किस तरह परिवार छोटी-छोटी समस्याओं से घिर जाता है और आखिरकार उन्हें समझ में आता है कि ये समस्याएं जीवन में इतनी बड़ी नहीं हैं। यह शो जीवन में उन छोटी-छोटी खुशियों का महत्व समझायेगा, जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।

सवालः फैन्स को क्या उम्मीद हो सकती है? क्या दर्शकों को तोरल का अलग रूप देखने को मिलेगा?

तोरलः यह पूरी तरह से अलग है। उन्होंने कभी भी तोरल का यह रूप नहीं देखा होगा और ना ही मैंने देखा है। इसमें संवाद बहुत बड़े नहीं हैं और मेरी बॉडी लैंग्वेज और हाव-भाव ही शब्दों से ज्यादा बोलेंगे।



कुन्दा प्रखंड के बनियाडीह में तिरंगा सम्मान यात्रा

 नक्सलियों के गढ़ में राष्ट्र प्रेम का अलख जगा रहे समाजसेवी सुधांशु सुमन

रांची। सूबे के उग्रवाद प्रभावित जिले चतरा के सुदूरवर्ती गांवों में तिरंगा सम्मान यात्रा अभियान के माध्यम से समाजसेवी सुधांशु सुमन राष्ट्र प्रेम का अलख जगाने में जुटे हैं। श्री सुमन तिरंगा यात्रा के दौरान ग्रामीणों के बीच राष्ट्रीय ध्वज के महत्व और इसके उद्देश्य को बताते हुए समाज से भटके लोगों को समाज की मुख्य धारा से जुड़ने की अपील भी कर रहे हैं। इस क्रम में रविवार को जिले के अति उग्रवाद प्रभावित प्रखंड कुंदा के बनियाडीह गांव में ग्रामीणों संग तिरंगा सम्मान यात्रा निकाली गई। पूरा गांव राष्ट्र भक्ति से ओतप्रोत गाने और नारों से गुंजायमान होता रहा। इस बीच श्री सुमन खासकर ग्रामीण युवक-युवतियों को राष्ट्र प्रेम के प्रति प्रेरित करते रहे। उन्होंने ग्रामीणों से उनकी समस्याओं की भी जानकारी ली और उसके समाधान के लिए आश्वस्त किया।  तिरंगा सम्मान यात्रा में काफी संख्या में ग्रामीण महिलाएं व पुरुष शामिल हुए।

बच्चों को दी ट्रैफिक नियमों की जानकारी

रांची।

निर्मला कॉन्वेंट हाई स्कूल में बच्चों को ट्रैफिक नियम की जानकारी दी गई।  इस अवसर पर विद्यालय में बच्चों के  जेब्रा क्रासिंग , लाल ,पीले ,हरे लाइटों बारे में बताया गया।साथ ही ट्रैफिक के विभिन्न चिन्हें के बारे में बताया गया। बच्चें के अपने अभिभावके के हेलमेट पहनने तथा गाडी चलाते वक्त मेबाइल का प्रयोग न करने के लिए बताने के कहा गया । विद्यालय की षिक्षिका श्रीमती मीनू सिंह तथा स्वाती कुमारी ने बच्चें का मार्गदर्षन किया। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य श्री विजय कुमार षर्मा ने कहा -आज के भाग दैड के समय में लेग गाडी चलाते वक्त सुरक्षा के नियमें की अनदेखी कर रहे हैं,जिसका भुगतान उन्हें तथा उनके परिवार के करना पडता है।
मैके पर विद्यालय के प्राचार्य श्री विजय कुमार शर्मा सचिव श्रीमती सीमा शर्मा, परिक्षा संचालक श्री गोपाल चन्द्र दास एवं सभी शिक्षक शिक्षिकाएँ उपस्थित थे।

मारवाड़ी युवा मंच ने दिया निःशुल्क सेवा के लिए एंबुलेंस

रांची। मारवाड़ी युवा मंच राँची शाखा, के द्वारा ज़िंदगी मिलेगी दोबारा फाउंडेशन को मिला एक एंबुलेंस जो संस्था के साथ रहकर गरीबों की सेवा करेगी

 मारवाड़ी युवा मंच राँची शाखा के द्वारा मानव उत्थान व गरीब मरीजो को निःशुल्क एम्बुलेंस उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ज़िंदगी मिलेगी दोबारा फाउंडेशन को एक एम्बुलेंस दिया गया।

इस एंबुलेंस का उद्घाटन  गरीब  मरीजों के परिजन लालू चंद्रवंशी, जतिन दास,  बुधनी देवी  के कर कमलों से  कराया गयाl यह एम्बुलेंस झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी युवा मंच के पूर्व अध्यक्ष स्व विनय जालान की पुण्यस्मृति में दिया गया। एम्बुलेंस मारवाड़ी युवा मंच राँची शाखा और ज़िंदगी मिलेगी दोबारा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में चलेगा।

एम्बुलेंस गरीब मरीजो के लिए निःशुल्क है। एम्बुलेंस में स्वास्थ्य सुरक्षा से संबधित सभी जीवन रक्षक उपकरण मौजूद रहेंगे। एम्बुलेंस 24 × 7 गरीब मरीजों के लिए उपलब्ध रहेगा।

एम्बुलेंस देने के दौरान मारवाड़ी युवा मंच राँची शाखा के अध्यक्ष तुषार विजयवर्गीय ने कहा की, आज ना जाने कितने गरीब परिवारों के पास पैसा ना होने के कारण एम्बुलेंस उपलब्ध नही हो पाता है। ऐसे में गरीब परिवार के लोगो को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कभी कभी तो गरीब परिवार के मरीजो की जान चली जाती है। ऐसे में हमारी उपलब्ध कराई एम्बुलेंस सेवा गरीब परिवारों के लिए वरदान साबित होगी।

ज़िंदगी मिलेगी दोबारा फाउंडेशन के अध्यक्ष अश्विनी राजगढ़िया ने कहा कि हमारी संस्था के द्वारा चलाया जा रहे एम्बुलेंस ने समय पर पहुँच कर कई मरीजो की जान बचाई है। आज तक 1400 से अधिक सेवाएं रिम्स में रहकर दे चुकी हैं! सरकारी अस्पताल का एम्बुलेंस चलता तो है लेकिन सरकारी तंत्र की तरह ही चलता है। जो प्राइवेट एम्बुलेंस होते है वो गरीबो से मोटी रकम वसूलते है। ऐसे में गरीब अपने को असहाय महसूस करते है। ऐसे गरीब परिवार के मरीजो के लिए हमारी संस्था की निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा लेकर उनके द्वारा सदैव तत्पर रहती है।

उन्होंने एम्बुलेंस देने के लिए मारवाड़ी युवा मंच का धन्यवाद दिया और कहा मारवाड़ी युवा मंच राँची शाखा हमेशा समाज के लिए काम करते आई है।

इस अवसर पर पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष प्रवीण छाबड़ा, मुख्यालय उपाध्यक्ष अभिषेक अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष वरुण जालान, सचिव दीपक गोयनका, कोषाध्यक्ष शुभम सिंघानिया, उपाध्यक्ष सचिन मोतिका, एम्बुलेंस प्रभारी संजय बजाज, अमित सेठी,आशीष डालमिया, दीपक जालान, अभिषेक चौधरी, पवन मुरारका, अजय डिडवानिया, रौनक झुनझुनवाला, विवेक बागला समेत अन्य दोनों संस्थाओं के सदस्य मौजूद थे।             
जिंदगी मिलेगी दोबारा के अध्यक्ष अश्विनी राजगढ़िया, सचिव जेपी सिंघानिया, रमन साबू ,सौरभ मोदी, विवेक बआगला लोग मौजूद थे।                                                           

*जिंदगी मिलेगी दोबारा संस्था अपील करती है जिनका एंबुलेंस बेकार पड़ा हुआ है या रखा हुआ है वह संस्था के नाम पर से  दे सकते हैं संस्था उनका आभारी रहेगी।

*अध्यक्ष                                         
ज़िन्दगी मिलेगी दोबारा फ़ाउंडेशन
अश्विनी राजगढ़िया                           9709000007*

दो अगस्त को छात्र आक्रोश रैली, सीएम आवास का घेराव



रांची। झारखंड प्रदेश NSUI की बैठक कांग्रेस भवन में हुई। बैठक में तय किया गया कि भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) झारखंड के तत्वावधान में छात्र आक्रोश रैली दिनांक 2 अगस्त 2018 को निकाली जाएगी। यह रैली रांची प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से निकलेगी जो मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेगी || इस रैली में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड एनएसयूआई के प्रभारी उमेश तंवर  उपस्थित रहेंगे |
 बैठक में प्रदेश अध्यक्ष आमिर हासमी, उपाध्यक्ष इंदरजीत सिंह, अनिकेत राज, ओम प्रकाश, सैफ आलम, विक्की ठाकुर,प्रताप शेखर, रोहित पांडेय,अभिजीत, विवेक सिंह, सोनू सिंह ,ज़ैद, मुशर्रफ, प्रसेनजित, आकाश रजवार, एवं तमाम कार्यकर्ता शामिल थे

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...