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शनिवार, 1 दिसंबर 2018

उपायुक्त ने किया जलापूर्ति योजनाओं का निरीक्षण


देवघर। उपायुक्त राहुल कुमार सिन्हा द्वारा आज मधुपुर अनुमंडल अन्तर्गत विभिन्न प्रखण्डों में चल रहे जलापूर्ति योजनाओं के साथ-साथ जलमीनार, पम्प हाउस, जल शुद्धिकरण यंत्र, मधुपुर उपकारा आदि का औचक निरीक्षण किया गया। अवलोकन के क्रम में सर्वप्रथम उपायुक्त मारगोमुण्डा जलापूर्ति योजना का निरीक्षण कर वास्तुस्थिति से अवगत हुए एवं उन्हांेने जल शुद्धिकरण यंत्र, जलमीनार, पम्पसेट हाउस, कर्मचारियों के आवासन की व्यवस्था आदि का निरीक्षण किया। साथ हीं उपायुक्त द्वारा इन प्रखण्डों में पूर्ण हो चुके विभिन्न महत्वकांक्षी योजनाओं एवं कार्यों का भी जायजा लिया गया। तत्पश्चात उपायुक्त द्वारा चेतनारी पेयजलापूर्ति जल शुद्धिकरण यंत्र की वास्तुस्थिति से अवगत होते हुए कहा गया कि तीन लाख लीटर क्षमता वाले इस संयंत्र से आस-पास के कई गाँवों को लाभ मिल रहा है। वहीं इस संयंत्र को पूरी तरह से ग्राम समिति के सदस्यों द्वारा संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मारगोमुण्डा जलापूर्ति योजना यहाँ के ग्रामीणों के लिए काफी लाभकारी सिद्ध हो रही है एवं आने वाले समय में सभी लोगों की सहभागिता और देख-रेख से मधुपुर अनुमंडल अन्तर्गत पालोजोरी पेयजलापूर्ति योजना, सारठ जलापूर्ति योजना, करौं जलापूर्ति योजना आदि की मदद से मधुपुर अन्तर्गत आने वाले सभी प्रखण्डों में पेयजलापूर्ति की जायेगी।
                        इस दौरान उपायुक्त द्वारा मधुपुर अनुमंडल अन्तर्गत शौचालय निर्माण के कार्यों का जायजा लेते हुए एन.,आर.एस.एस. के सर्वे पर विस्तृत चर्चा की गई। साथ हीं उन्होंने प्रखंड विकास पदाधिकारी, मारगोमुण्डा जोहन टुडू को निदेशित किया गया कि करोड़ों की लागत से बन रहे ग्रामीण जलापूर्ति योजना के कार्य को शीघ्रातिशीघ्र गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण कराया जाए। साथ हीं उपायुक्त द्वारा निदेशित किया गया कि मारगोमुण्डा एवं पालोजोरी में निर्माणाधीन प्रखण्ड स्तरीय स्टेडियम एवं सांस्कृतिक अखाड़ा के निर्माण कार्य को भी जल्द से जल्द गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करायी जाय। इसके अलावा उन्होंने कई और महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रखण्ड विकास पदाधिकारी को दिया।
उपायुक्त द्वारा आगे प्रखण्ड कार्यालय, मारगोमुण्डा के अन्तर्गत संचालित विभिन्न कार्यालयों का निरीक्षण कर प्रखण्ड विकास पदाधिकारी को निदेशित किया गया कि स्थापना से संबंधित सभी कार्य एवं फाॅर्म-1 के भरने से संबंधित सभी कार्यों  को प्राथमिकता के साथ पूर्ण करायें। साथ हीं उपायुक्त द्वारा मधुपुर उपकारा का औचक निरीक्षण किया गया एवं सुरक्षा व्यवस्था विधि-व्यवस्था से संबंधित विभिन्न बिन्दुओं पर विस्तृत जानकारी लेते हुए कहा गया कि कारा के अंदर स्वच्छता एवं सुरक्षा व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा जाय।

शुक्रवार, 30 नवंबर 2018

समृद्ध किसान, स्वस्थ भारत हमारा संकल्पः बाबा रामदेव



बाबा रामदेव बोले मैं कर्म से संन्यासी, जन्म से मैं किसान

झारखंड के किसान देश के सबसे प्रगतिशील किसान बने यह संकल्प लेकर जाइए


रांची। योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में विकास की अभूतपूर्व प्रगति के लिए झारखंड सरकार बधाई की पात्र है। बहुत सारी चुनौतियां इस क्षेत्र में विद्यमान थीं उन चुनौतियों को अवसर के रूप में तब्दील करके मुख्यमंत्री ने एक कीर्तिमान बनाया है। आगे बहुत कुछ और करना है।

कुछ जिलों को ऑर्गेनिक के तहत चिन्हित करके वहां पर गेहूं, धान, तिलहन, दलहन, शाक, सब्जियों और जड़ी बूटियां इत्यादि पैदा करिए जो भी आप उत्पादित करेंगे पतंजलि एक श्रेष्ठ उत्पादन मूल्य के साथ सब को क्रय करेगा।

बाबा रामदेव ने कहा कि आप झारखंड जो भी नैसर्गिक, प्राकृतिक और जैविक खाद का उपयोग करके उत्पादन करेगा, पतंजलि उसको खरीदेगा। झारखंड के किसानों को समृद्धि मिलेगी और देश के लोगों को स्वास्थ्य मिलेगा, यह हमारा संकल्प है।

किसानों को किराए पर मिलेगा ट्रैक्टर : टीआर केशवन


टैफे का जेफॉर्म एप लॉन्च


रांची। किसानों को अब किराए पर कृषि उपकरण व ट्रैक्टर उपलब्ध होगा। इस दिशा में ट्रैक्टर निर्माता कंपनी टैफे ने ‘जेफार्म’ और ‘जेफार्म सर्विसेज सेवा लान्च किया है। इस संबंध में कंपनी के प्रेसिडेंट व सीओओ टीआर केशवन ने संवाददाताओं को बताया कि टैफे ने वर्ष 1964 में चेन्नई में कृषि उत्पादकता बढ़ाने और भारत की बढ़ती खाद्य मांगों को पूरा करने के लिए उन्नत कृषि प्रौद्योगिकियों के साथ किसानों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से जेफार्म इंडिया की स्थापना की थी। जेफार्म सर्विसेज टैफे की एक पहल है, जो छोटी और बड़ी जोत के खेतों, स्थानीय मौसम पूर्वानुमान, मंडी की ताजा कीमतों, कृषि समाचार और सलाह के लिए ट्रैक्टर और कृषि उपकरणों के किराये के माध्यम से कृषि मशीनीकरण समाधानों तक आसान पहुंच बढ़ाती है।
छोटे और सीमांत किसान, जो भारत में 85 प्रतिशत से अधिक भूमि पर खेती करते हैं, ट्रैक्टर या उपकरण नहीं खरीद सकते हैं। जेफार्म सर्विसेज इन किसानों को ट्रैक्टर और उपकरण रखने वाले मालिकों के साथ अपने किसान-से-किसान प्लेटफार्म के माध्यम से जोड़कर इस अंतर को समाप्त करती है। किसान निम्नलिखित ऐप या टोल-फ्री नम्बर से निकटतम उपकरण का पता लगा सकते हैं और बुक कर सकते हैं
जेफार्म सर्विसेज एंड्रायड ऐप या टोल फ्री हेल्पलाइन- 1800-4-200-100/1800-208-4242
मुफ्त में उपलब्ध यह ऐप ट्रैक्टर मालिकों, तथा ट्रैक्टर एवं उपकरण मालिकों द्वारा संचालित कस्टम हायरिंग सेंटर्स (सी.एच.सी.) को, सीधे उन किसानों से जोड़ता है जिनको कृषि मशीनीकरण समाधान की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि जेफार्म सर्विसेज ने 2017 में अपनी स्थापना के बाद से भारत के 6 राज्यों में 65,000 से अधिक किसानों के जीवन को प्रभावित किया है। वर्तमान में, जेफार्म सर्विसेज (जे.एफ.एस) कृषि मशीनी करण को सभी के लिए व्यवहारिक और सस्ता बनाते हुए राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, गुजरात, बिहार और ओडिशा में सक्रिय है।

कृषि विकास दर में झारखंड ने लगाी छलांगः डीके तिवारी

रांची। झारखंड राज्य के विकास आयुक्त डीके तिवारी ने कहा कि आज देश दुनिया के लोग झारखंड में इकट्ठे हुए हैं, यह समझने और सीखने के लिए कि भारत के प्रधानमंत्री के सपने को साकार करने के लिए क्या प्रयास झारखंड में किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए तमाम किसान बधाई के पात्र हैं। विशेष रूप से जो सब्जी का उत्पादन करते हैं। इन 4 सालों में झारखंड फल और सब्जी उत्पादन में द्वितीय स्थान पर पहुंच गया है, टमाटर के उत्पादन में पांचवें स्थान पर, मटर, बींस, गोभी, भिंडी पैदा करने में। हम सर्वाधिक कम कीटनाशक और खाद के उपयोग से उत्पादन कर रहे हैं इस तरह से हमें जैविक उत्पादन की तरफ आगे बढ़ना है।

श्री डीके के तिवारी ने कहा कि राज्य सरकार काफी कार्य कर रही है। फूड पॉलिसी देश की सबसे अच्छी पॉलिसी बनी है। पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़े प्लांट की स्थापना यहां की गई है। सफल के द्वारा वही मटर वही मकई अब दिल्ली के लोग खा रहे हैं। और हमें सिंगापुर जैसे देशों से भी ऑर्डर मिला है झारखंड के कटहल के लिए भी आर्डर प्राप्त हुआ है

आज हमने कृषि क्षेत्र में विकास दर में 18 से 19% की छलांग लगाई है। इसके लिए सभी किसान बधाई के पात्र हैं। सरकार ने कई योजनाएं चलाई हैं। कृषि यंत्रों का वितरण,  साॅइल हेल्थ कार्ड की परिकल्पना केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर की है जिससे कि किसानों को यह बताया जाए कि वास्तव में कौन सी खाद का उपयोग कहां करना है। झारखंड का नाम पूरे देश में हो रहा है। प्रधानमंत्री ने भी कहा है कि पूरे देश में यही एक ऐसा राज्य है जिसमें किसानों को एक भी प्रीमियम की राशि नहीं देनी पड़ रही है। पूरी प्रीमियम राशि का वहन सरकार द्वारा किया जा रहा है। आज एक एमओयू होने जा रहा है जिसका नाम सुजलाम सुफलाम है लेकिन हमारे सामने चुनौतियां भी हैं। सोयल हेल्थ कार्ड बन गए हैं लेकिन उसका उपयोग भी करें। आम लीची काजू को आगे बढ़ाना है। नए उन्नत शील कृषि औजारों का उपयोग करना है। मछली पालन और गोपालन में नई तकनीक अपनानी है। जल संचयन करके तीन फसलें 1 वर्ष में लेनी है। जलवायु  प्रतिरोधी अन्य फसलों को भी अपनाना है जिससे कि सुखाड़ का सामना ना पड़े। सरकार के सामने भी कई चुनौतियां हैं। फल सब्जी का भंडारण करना, किसानों को सही समय पर लोन और क्रेडिट मिले जो कि अन्य राज्यों की तुलना में हम थोड़ा पीछे हैं। यह सरकार के सामने मुख्य चुनौतियां हैं। और डेयरी मत्स्य पालन सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में मिलकर यदि हम काम करेंगे तो यह पूरा विश्वास है कि आय को हम चौगुनी करने में संभव हो पाएंगे।

इस समारोह और कार्यक्रम की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही है कि किसानों को अपना आत्म सम्मान और गौरव मिला है। आज ये गर्व से कह सकते हैं कि मैं एक किसान हूं।

समिट के अनुभव का लाभ उठाएं किसानः द्रौपदी मुर्मू


फूड प्रोसेसिंग सेक्टर एक उभरता हुआ क्षेत्र, इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मिलेगा महत्वपूर्ण योगदान
झारखण्ड भारत का पहला राज्य जहां किसानों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम की हुई है शुरुआत


रांची। माननीया राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि हमारा झारखंड राज्य एक कृषि प्रधान राज्य है। यहाँ की 70 प्रतिशत से अधिक आबादी गाँवों में निवास करती है एवं कृषि ही उनके आजीविका का मुख्य साधन है। यहाँ कई प्रकार के अनाज, सब्जियों एवं फलों जैसे चावल, दलहन, टमाटर, गोभी, मटर, इमली, शरीफा, काजू, कटहल आदि के प्रमुख उत्पादों में से एक है। कृषि क्षेत्र का झारखण्ड के अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। उक्त बातें माननीया राज्यपाल श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने खेलगांव, रांची में आयोजित  दो दिवसीय ग्लोबल एग्रीकल्चर एंड फूड सम्मिट 2018 के समापन अवसर पर अपने संबोधन में कहीं. उन्होंने कहा कि समारोह में सम्मिलित होकर मुझे अपार प्रसन्नता हो रही है। इस अवसर पर मैं आप सभी आगन्तुकों का हार्दिक स्वागत करती हूँ।

राज्यपाल श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि हमारी कृषि वर्षा आधारित है, लेकिन देखा गया है कि कई बार अच्छी बारिश होने के बावजूद हम सिंचाई कार्य में वर्षा जल का बेहतर उपयोग नहीं कर पाते हैं। पठारी इलाके होने के कारण पानी का तेजी से बहाव हो जाता है। सिंचाई की कमी रहने के कारण अधिकांश कृषि भूमि में वर्षा आधारित धान की एक-फसली खेती की जाती है। हमें एक-फसल तक सीमित न रहकर बहुफसली खेती की ओर ध्यान देना होगा।

राज्यपाल श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि किसानों को जल संचयन पर अधिक जोर लगाना होगा. जल संचयन के प्रति जागरुक होकर इसे अपनाना होगा क्योंकि इससे सबसे अधिक फायदा किसानों को ही होगा। हमारा मकसद एवं सोच है कि हमारे किसान आत्मनिर्भर बने। इस मकसद को पाने के लिए हमारे  कृषि वैज्ञानिकों तथा इस विधा से जुड़े लोगों को पूरी निष्ठा एवं लगन से काम करना होगा। उन्हें किसानों के बीच खेतों में जाना होगा तथा कौन-सा भू-भाग किस प्रकार की खेती एवं फसल के लिए बेहतर होगा, इसकी जानकारी किसानों को सुलभ करानी होगी, तभी Lab to Land का Concept पूरी तरह से सफल होगा। विदित हो कि जब तक हमारे गाँवों का पूरी तरह से विकास नहीं होगा, तब तक हमारा देश खुशहाल नहीं हो पायेगा।

उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य की भूमि सब्जी पैदावार, वानिकी एवं फूल पैदावार की नज़रिये से भी अच्छी है। यहाँ के किसान इन सबकी खेती करें तो उन्हें अच्छी आमदनी हो सकती है। प्रसन्नता की बात है कि दलहन की अच्छी पैदावार के लिए राज्य को कई बार कृषि कर्मण पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका है। झारखण्ड में जैविक खेती के लिए भी अत्यन्त संभावनायें है। सब्जियाँ, फलों और मसालों को भी जैविक तरीके से तैयार किया जाता है और काजू प्रसंस्करण, औषधीय पौधों की प्रसंस्करण, शहद उत्पादन और मांस, अण्डा, दुग्ध उत्पादों के लिए बहुत अधिक संभावनायें है। मछली उत्पादन के क्षेत्र में झारखण्ड ने प्रगति की है।हमारे राज्य में मुर्गीपालन, बकरीपालन आदि के क्षेत्र में भी असीम संभावनायें हैं। जरूरत है कि लोगों को इसके प्रति भी जागरूक किया जाय.

राज्यपाल श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि वर्तमान में फूड प्रोसेसिंग सेक्टर एक उभरता हुआ क्षेत्र है और इससे राज्य की अर्थव्यवस्था में योगदान की संभावना को देखते हुए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में देखा जाता है। कच्ची सामग्रियों की उपलब्धता, टमाटर, आलू, मक्का, काजू, मटर, तेलहन, दलहन इत्यादि, जीवनशैली में बदलाव और सरकार की एग्रीकल्चर एवं फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में प्रोत्साहन नीतियाँ झारखण्ड में इस उद्योग के विकास और संवर्धन में व्यापक भूमिका निभा रही है।

उन्होंने कहा कि झारखण्ड के किसान मेहनती एवं प्रगतिशील है, राज्य में विविध जलवायु परिस्थितियाँ है, जोे फसलों के विस्तृत श्रृखंला के कृषि के लिए उपयुक्त है। राज्य को उपजाऊ मिट्टी, प्रचुर मात्रा में पानी, अनुकूल जलवायु और कम लागत वाले श्रम, राज्य में खाद्य  प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करता है। पूर्वी भारत में  कृषि के क्षेत्र में आदर्श राज्य के रूप में झारखण्ड का नाम स्थापित हो, साथ ही देश के एक बड़ी आबादी के लिए खाद्य उत्पादों की मांग को पूरा करे, ऐसा प्रयास करना है। प्रसन्नता का विषय है कि झारखण्ड सरकार 2022 तक किसानों की आय को दोगुनी करने के लिए माननीय प्रधानमंत्री के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में प्रयासरत है और सरकार द्वारा इसे हासिल करने के लिए पहल की जा रही है।

राज्यपाल श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि झारखण्ड भारत का पहला राज्य है, जो किसानों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम शुरू किया है, जो विभिन्न सरकारी योजनाओं, मौसम, कृषि उत्पादों के लिए मूल्य निर्धारण, मिट्टी के  हेल्थ कार्ड, बीज उर्वरक, फसल बीमा और ऋण के बारे में जानकारी प्रदान करना है। 

उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि यह कार्यक्रम ग्लोबल एग्रीकल्चर एंड फूड प्रोसेसिंग सम्मिट उद्योग, खाद्य सुरक्षा और कृषि प्रौद्योगिकी, कृषि विपणन और बुनियादी ढांचे पर अपना ध्यान केन्द्रित करने के साथ आपकेे लिए व्यवहारिक और ज्ञानवर्द्धक रहा होगा।

राज्यपाल श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि झारखण्ड की अनुकूल परिस्थितियाँ आपको प्रेरित करेगी और हमारे राज्य के लिए एग्रीकल्चर एंड फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में सतत् विकास को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करेगी। हमें उम्मीद है आपके सहयोग एवं समर्थन से हम इसे प्राप्त करने में सक्षम होंगे। मैं इस अवसर पर आप सभी को झारखण्ड में निवेश करने के लिए आमंत्रित करती हूँ।

भारत का आर्गेनिक हब बनेगा झारखंडः रघुवर दास


पतंजलि खरीदेगी मधु और ऑर्गेनिक उत्पाद
 2022 तक राज्य के किसानों की आय चार गुनी करने का आह्वान
राज्य के किसानों को हर तरह की सुविधा मुहैया कराने का वादा


रांची। मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि राज्य में ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए झारखण्ड सरकार सभी 24 जिलों में जैविक उत्पाद कलस्टर सेंटर का निर्माण कराएगी और उसकी ब्रैंडिंग झारखण्ड जैविक (JJ) के तहत की जाएगी। पतंजलि के साथ करार कर सरकार सभी जैविक उत्पादों के लिए बाजार भी मुहैया कराएगी। किसानों को नई और आधुनिक उपकरण सस्ती दरों पर मिले इसलिए मुख्यमंत्री ने राज्य के गरीब और आदिवासी किसानों के लिए रियायत पर कृषि उपकरण उपलब्ध कराने की योजना का भी ऐलान किया।

मुख्यमंत्री ने बाबा रामदेव को धन्यवाद देते हुए कहा कि झारखण्ड के मधु को पतंजलि खरीदेगी और झारखण्ड सरकार इसके लिए पतंजलि की मदद से राज्य में ही मधु प्रोसेसिंग प्लांट लगाने जा रही है। साथ ही मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि सभी किसान आज प्रति बूंद, ज्यादा फसल के नारे को अपने जीवन में आत्मसात करें। जल संचय और सूक्ष्म सिंचाई से हम राज्य में कृषि क्रांति ला सकते हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए ही झारखण्ड सरकार ने ग्लोबल एग्रीकल्चर एंड फूड समिट का आयोजन किया है।

समापन समारोह में झारखण्ड सरकार के प्रयासों को सराहते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि झारखण्ड में देश के अग्रणी कृषि राज्य बनने की क्षमता है और मुख्यमंत्री रघुवर दास के नेतृत्व में यहां के मेहनतकश किसान कृषि के हर क्षेत्र में नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। बाबा रामदेव ने मंच से वादा किया कि ऑर्गेनिक तरीके से उपजाए गेंहूं, चावल, तिल, दलहन, साग, सब्जियां और जड़ूी बुटियां, को पतंजलि श्रेष्ठ उत्पादन मूल्य के साथ बाय बैक कर लेगा।

 बाबा रामदेव के कहा कि वो झारखण्ड सरकार के साथ मिलकर यहां के किसानों की समृद्धि के लिए काम करेंगे। डेयरी के क्षेत्र में भी बाबा रामदेव ने झारखण्ड के किसानों को नई तकनीक सिखाने का भरोसा दिया।

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने झारखण्ड के अन्नदाता किसानों का धन्यवाद करते हुए कहा कि झारखण्ड के किसान भाइयों की मेहनत से 3 साल में कृषि फसल विकास दर में 19%  बढ़ोतरी हुई है। इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक 2013-14 में कृषि फसल विकास दर -4.5% थी जो 2016-17 में बढ़कर +14.2% हो गई है। ग्लोबल सम्मिट में राज्य के 20,000 से अधिक किसानों ने भाग लिया।

ग्लोबल एग्रीकल्चर एंड फूड समिट 2018 की उपलब्धियां


जागरूकता बढ़ी

फ़ख्र है कि मैं तो झारखण्ड का किसान हूँ……हमसब तबियत से किसान हैं…आज खुश होकर और आत्म विश्वास से लबरेज होकर लौट रही हूं… हम उन पुरखों को उनका कल लौटाएंगे… उन्होंने हमें खेत दिए लेकिन आधुनिकता की इस दौड़ में उन पुरखों का सपना कहीं पीछे छूट गया था…लेकिन अब नहीं…धन्यवाद मुख्यमंत्री जी आपने हमारी सोई हुई आत्मा को जगा दिया अब हम गांव की आत्मा यानी कृषि को पुनर्जीवित करेंगे…. बोकारो से आई इस महिला कृषक के इस उद्गार ने मानो ग्लोबल एग्रीकल्चर और फ़ूड समिट 2018 के आयोजन को सफल बना दिया….मौका था ग्लोबल एग्रीकल्चर और फूड समिट के समापन समारोह का।

समिट में करीब 20 हजार किसानों ने लिया भाग

6000 लोगों को मिलेगा प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार

6 सेक्टर में हुए सेमिनार से लाभान्वित हुए देश के किसान

दो दिवसीय ग्लोबल एग्रीकल्चर और फूड समिट 2018 के दौरान झारखण्ड समेत देश के 16 राज्य के करीब 20 हजार किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम के उद्घटान समरोह में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री राधा मोहन सिंह ने भाग लिया जबकि समापन समारोह में योगगुरु बाबा रामदेव का आगमन हुआ।

273 करोड़ का निवेश से खुशहाल बनेंगे झारखंड के किसान

इस समिट के माध्यम से फूड प्रोसेसिंग के 50 यूनिट की आधारशिला रखी गई। करीब 1500 प्रत्यक्ष और 4500 से ज्यादा अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन हुआ। किसानों को नई तकनीक स्व अवगत कराने के उद्देश्य से 6 सेक्टर यथा मत्स्य, बागवानी, फूड प्रोसेसिंग,  एग्रीकल्चर इको सिस्टम, वर्ल्ड बैंक सेशन समेत अन्य विषयों पर मंगोलिया, फिलीपींस, इजराइल, चीन, ट्यूनीशिया से आये विशेषज्ञ से अपनी बात राज्य के किसानों से साझा किया। उनके प्रश्नों के माकूल जवाब उन्हें प्राप्त हुए। किसानों को कृषि कार्य में उपयोग होने वाले यंत्रों की जानकारी दी गई ताकि आधुनिक प्रणाली अपना कर किसान ज्याद पैदावार सुनिश्चित कर सकें।

160 स्टाल में मिली महत्वपूर्ण जानकारी

ग्लोबल एग्रीकल्चर और फूड समिट 2018 में 160 स्टॉल लगाए गए। इनमें 70 स्टाल झारखण्ड के किसानों के थे। जहां किसानों ने अपने उत्पाद का प्रदर्शन किया। चीन, मंगोलिया, फिलिपींस, ट्यूनीशिया के भी स्टॉल लगाए गए, जहां किसानों को विदेश में उत्पादित हो रहे फसलों की जानकारी मिली।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...