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गुरुवार, 4 जुलाई 2019

नवजात शिशुओं को बचाने हेतु पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन की अनूठी पहल



विनय मिश्रा

चाईबासा। उप विकास आयुक्त  आदित्य रंजन के द्वारा नवजात शिशुओं को बचाने के लिए सार्वजनिक स्थलों पर पालना लगाए जाने संबंधित आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं।
 उप विकास आयुक्त ने बताया कि जिला उपायुक्त अरवा राजकमल की अध्यक्षता में पूर्व में संपन्न बाल संरक्षण संबंधित बैठक में सार्वजनिक स्थलों पर  पालना  लगाने  कर  निर्णय लिया गया था। इसी निर्णय के आलोक में यह व्यवस्था सुनिश्चित करवाया जा रहा है।
उप विकास आयुक्त ने बताया कि हम आए दिन समाचार पत्रों में नवजात शिशुओं को झाड़ियों,नालियों में फेकने जैसी भयावह खबर पढ़ते हैं,लेकिन अब पश्चिमी सिंहभूम जिला में ऐसे बच्चों को बचाने हेतु जिला प्रशासन के द्वारा सार्वजनिक स्थलों यथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मस्जिदों मंदिरों में पालना स्थापित किया जाएगा।
आगे उप विकास आयुक्त ने बताया कि ऐसे नवजात बच्चे से संबंधित खबर जब तक पुलिस प्रशासन या बाल संरक्षण के लोग तक आते हैं तब तक वह बच्चा किसी हादसे का या किसी जानवर का शिकार हो जाता है।
पालना कार्यक्रम के तहत प्राप्त बच्चे से संबंधित एक नोटिस भी जारी किया जाएगा,एवं संबंधित माता पिता को उस बच्चे को ले जाने की अपील की जाएगी।
इसके उपरांत भी अगर उस बच्चे का कोई भी परिवार सामने नहीं आता है ऐसे में जिला प्रशासन कानूनी कार्यवाही पूरी करते हुए उस बच्चे कि उचित देखभाल की व्यवस्था करेगी।

टोएटा किर्लोस्कर मोटर के डीलरशिप का विस्तार



रांची/धनबाद। टोएटा किर्लोस्कर मोटर ने झारखमड में डीलरशिप का विस्तार किया है। धनबाद में विश्वस्तरीय सुविधायुक्त शोरूम धनबाद टोएटा का शुभारंभ किया गया। यह देश में कंपनी का 364 वां टच प्लाइंट बन गया। यहां सेल्स, सर्विस और स्पेयर्स की सुविधा उपलब्ध होगी। टच प्वाइंट के उद्घाटन के बाद कंपनी के उप प्रबंध निदेशक एन राजा और धनबाद टोएटा के डीलर ऋतुराज सिन्हा ने बताया कि 46 हजार वर्गफुट में बनी यह इकाई झारखंड के पूर्वोत्तर क्षेत्र के ग्राहकों को खासतौर पर सेवाएं मुहैय्या कराएगी। यहां प्रशिक्षित तथा अनुभवी प्रोफेशनल्स की टीम है। कंपनी के उत्पादों की पूरी रेंज के अलावा ग्राहकों को कार सर्विसिंग, डेंटिंग-पेंटिंग सहित अन्य मेंटेनेंस की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यहां सर्विसिंग के लिए हाईटेक उपकरण लगाए गए हैं। झारखंड में यह टोएटा का 5 वां टच प्वाइंट है।

बुधवार, 3 जुलाई 2019

जर्मनी में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला में शामिल हुआ रांची का मेकॉन


रांची । मेकॉन  ने इस्पात मंत्रालय के तत्वावधान में भारत कि ओर से मुख्य आयोजनकर्ता के रूप मे  अंतर्राष्ट्रीय धातु व्यापार मेला 25 जून से  29 जून को आयोजित डुसेलडोर्फ, जर्मनी में मेटेक- 2019 मे भाग लिया । इस प्रदर्शनी में 'इंडिया स्टील पवेलियन'  लगाया गया, जिसमें मेकॉन के साथ-साथ सेल, एनएमडीसी  आरआईएनएल     केआईओसीएल  और मोइल भी शामिल थे, जिन्होंने धातु के क्षेत्र मे वैश्विक तकनीक का अन्वेषण व विकास मे भारत के योगदान  को प्रदर्शित किया ।
इंडिया स्टील पवेलियन का उद्घाटन फ्रैंकफर्ट मे  भारत के महावाणिज्य दूत प्रतिभा पारकर द्वारा स्टील उद्योग के वैश्विक दिग्गजों की उपस्थिति में 25 जून, 2019 को किया गया ।
मेकॉन ने भारतीय इस्पात उद्योग में आफ़र संभावनाओं पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया जिसमे संभावित निवेशकों को  भारत में विनिर्माण आधारों की स्थापना / विस्तार करने के लिए विचार विमर्श किया गया । इसी संदर्भ में मेकॉन के सीएमडी श्री अतुल भट्ट द्वारा भारतीय इस्पात उद्योग में अपार अवसरों पर एक प्रस्तुति दी गयी और “मेक इन इंडिया” ड्राइव मे भारत ने  इस्पात क्षेत्र के लिए पूंजीगत वस्तुओं के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा के महत्व पर जोर दिया । उन्होंने राष्ट्रीय इस्पात नीति -2017 से उत्पन्न अवसरों पर प्रकाश डाला ओर श्रीमन भट्ट ने  बताया कि  2030-31 तक 300 मिलियन टन कच्चे इस्पात की क्षमता का लक्ष्य रखा गया  है, जो वर्तमान में 138 मिलियन टन के स्तर पर है । अतिरिक्त इस्पात क्षमता लगभग  160 मिलियन टन जोड़ने के लिए, लगभग 115 बिलियन डॉलर  के विशाल निवेश की आवश्यकता होगी जिसमे लगभग 20-22 बिलियन डॉलर के पूंजीगत सामानों के आयात कि जरूरत पड़ेगी । और साथ ही 2030-31 तक वार्षिक आयात मे कुल-पुर्जो के लिए 500 मिलियन डॉलर आयात करना पड़ेगा । भारतीय बिजनेस के तीन डी को डेमोक्रेसी, डेमोग्राफी और डिमांड को प्रभाषित किया  और भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय की ओर से सभी निवेशकों को पूर्ण समर्थन और सहयोग के आश्वासन के साथ भागीदार बनाने का निमंत्रण दिया और कहा कि 2030-31 तक कच्चे इस्पात की 300 मिलियन टन कि क्षमता के लक्ष्य को मद्देनजर रखते हुये भविष्य की संभावनाओं और भारतीय इस्पात उद्योग के हितधारको व  पैनलिस्ट के विचार मांगे गए ।
वही, टाटा स्टील लिमिटेड के सीईओ और प्रबंध निदेशक व सीआईआई उपाध्यक्ष श्री टीवी नरेंद्रन ने उद्योग के दृष्टिकोण को देखते हुए कहा कि भारत एकमात्र ऐसा देश है, जिसके पास कच्चा माल और अपना विशाल घरेलू बाजार है । जो कि भारत के लिए फायदेमंद है ।

इस मंच पर अन्य पैनलिस्ट के रूप मे  सेल  के अध्यक्ष श्री अनिल चौधरी, जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड के अध्यक्ष श्री नवीन जिंदल, टी क्यू एम एंड स्टील बीजनेस व टाटा स्टील लिमिटेड के अध्यक्ष  श्री आनंद सेन, पॉल वर्थ (एस ए) के सीईओ  श्री जॉर्ज रसेल , डेनियली कोरस के सीईओ डॉ थॉमस जर्मरशुसेन , और प्राइमेटल टेक्नोलॉजीज (ग्रेट ब्रिटेन) के सीईओ श्री स्टीफन ब्राउन मौजूद रहे । इस संगोष्ठी व पैनल चर्चा  मे उद्योग के शेयरधारकों और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं ने भाग लिया और  राष्ट्रीय इस्पात नीति 2017 के उद्देश्यों को प्राप्त करने और भारतीय इस्पात उद्योग को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए उनकी राय और चिंताओं पर विचार व्यक्त करने के लिए  एक मंच सांझा  किया गया ।
मेटेक  के दौरान, मेकॉन  ने 27.06.2019 को मेसर्स टेनोवा मेटल्स डॉइच्लेन्ड जीएमबीएच  के साथ सेकेंडरी धातुकर्म के सिस्टम वीडी, वीएडी, वीओडी व आरएच के क्षेत्र में आपसी सहयोग के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किये । मेकॉन ने पावर प्लांट्स के लिए फ्ल्यू गैस डिसल्फराइजेशन सिस्टम के क्षेत्र में आपसी सहयोग के लिए 28.06.2019 को मेसर्स झेजियांग टेंगी पर्यावरण प्रौद्योगिकी के साथ समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किये ।  वही लौह और इस्पात उद्योग के वैश्विक प्रमुख उद्योगपतियों के साथ कई व्यापारिक बैठकें आयोजित की गई ताकि लौह और इस्पात उद्योग के क्षेत्र में नवीनतम प्रगति पर चर्चा की जा सके । मेकॉन ने भारतीय इस्पात उद्योग के विकास को गति प्रदान करने के लिए वैश्विक पूंजीगत वस्तु निर्माताओं और इस्पात हितधारको के साथ साझेदारी को मजबूत करने के लिए एक सम्मेलन का आयोजन  भी किया ।इस अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम में मेकॉन की सक्रिय भागीदारी ने अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान  को मजबूत किया है और मेकॉन आने वाले समय मे विभिन्न अवसरों को भुनाने के लिए अग्रसर है वही  भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में से एक है जो व्यापार को बढ़ावा देने  की पेशकश कर रहा है ।  उम्मीद है कि इस तरह के अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में उल्लेखनीय उपस्थिति से निकट भविष्य में नए व्यापार के मार्ग प्रशस्त होंगे । और मेक ईन इंडिया को मजबूती प्रदान करेगा ।

जल संचय के प्रति जागरुक रहा है जनजातीय समाज




देवेंद्र गौतम
रघुवर दास सरकार जल शक्ति अभियान के तहत जल संचय पर जोर दे रही है। यह जरूरी भी है। पूरी दुनिया में भूमिगत जल का स्तर लगातार नीचे की ओर खिसक रहा है। कुएं, तालाब या तो अतिक्रमित हो चुके हैं या सूख चले हैं। अधिकांश चापाकलों से पानी नहीं निकल रहा है। जलाशयों का जल भंडार घटता जा रहा है। नदियां प्रदूषित हो चुकी हैं। पूरे देश में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। अब एकमात्र उम्मीद आकाशीय जल पर टिकी है। उसे नदियों के रास्ते समुद्र तक जाने से रोकना होगा। मौजूदा संकट का बड़ा कारण है विकास की अंधी दौड़ में जल संचय के पारंपरिक माध्यमों का अतिक्रमण, अनदेखी और नए माध्यमों के विकास के प्रति उदासीनता। हमारे पूर्वज जल के महत्व को जानते थे और उसके संचय के प्रति जागरुक थे।
झारखंड के इलाकों में जल संचय की अनोखी तकनीक थी। पठारी भूमि होने के कारण यहां भूमिगत जल के स्तर में असमानता रही है। कहीं 10-15 फुट पर पानी मिल जाता है कहीं हजार फुट की गहराई में भी पानी नहीं है। ज्यादातर नदियां पहाड़ी होने के कारण बहुत गहरी नहीं हैं। इसीलिए यहां सूखे की मार थोड़े-थोड़े अंतराल पर झेलनी पड़ती है। ऐसे संकटकाल के लिए झारखंड की आदिम जनजातियों ने नदियों के किनारे अनंत गहराई वाले छोटे-छोटे जलाशय बना रखे थे जिन्हें दह कहा जाता था। कामिनदह, राजदह, रानीदह भंडारदह जैसे सैकड़ों दह आज भी मौजूद हैं। इनका जल कभी सूखता नहीं था।
हर दह को लेकर कुछ किंवदंतियां प्रचलित हैं। सभी के साथ एक सामान्य सी कथा प्रचलित रही है कि एक पाहन यानी पुजारी था जो अपनी बगलों में एक तरफ बकरा और दूसरी तरफ कुल्हाड़ी दबाकर दह के अंदर उतरता था और पानी के अंदर किसी गुफा के अंदर प्रवेश करथा था। गुफा के अंदर मौजूद देवस्थल में बकरे की बलि देता था और वापस लौट आता था। एक बार वह बलि देकर वापस लौटा तो उसे याद या कि कुल्हाड़ी अंदर ही छूट गई है। वह दुबारा दह में उतरा और गुफा के अंदर गया तो देखा कि कई देवी-देवता बकरे का मांस खा रहे हैं। उसे दुबारा आया देख वे क्रोधित हो गए और कहा कि अब यहां कभी आने की जरूरत नहीं है। हर दह के साथ इससे मिलती-जुलती कथा जुड़ी है।

ऐसी मान्यता है कि इनकी गहराई सात खाट की रस्सियों के बराबर थी। जाहिर है कि यह जल संचय की आदिम प्रणाली थी। सूखा पड़ने पर दहों का जल मनुष्य के काम आता था। अब इन दहों की गहराई मनुष्य के कमर भर भी शेष नहीं बची है। इनके अंदर गाद भर गया है। आधुनिक समाज को इन दहों की उपयोगिता की जानकारी ही नहीं है। अन्यथा इनकी सफाई कराई जाती और संकटकाल में इनमें संचित जल का उपयोग किया जाता। लेकिन अफसोस की बात है कि मानवशास्त्रियों और पुरातत्वविदों का भी इनकी ओर ध्यान नहीं गया।

मंगलवार, 2 जुलाई 2019

झारखंड कैबिनेट के फैसले

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★ विधानसभा का सत्र -- 22 से 26 जुलाई
चतुर्थ झारखंड विधान सभा के त्रयोदश (मानसून) सत्र के औपबंधिक कार्यक्रम 22 से 26 जुलाई 2019 तक आहुत करने की अनुशंसा करने की स्वीकृति दी गई.

★ पीएमसीएच, धनबाद, एमजीएम चिकित्सा महाविद्यालय, जमशेदपुर एवं दुमका, पलामू एवं हजारीबाग में स्थापित नए चिकित्सा महाविद्यालयों के विभिन्न विभागों में शैक्षणिक संवर्ग के प्राध्यापक एवं सह प्राध्यापक के रिक्त पदों को भरे जाने के लिए झारखंड चिकित्सा शिक्षा सेवा (नियुक्ति प्रोन्नति एवं सेवा शर्त नियमावली) 2018 के प्रावधानों को शिथिल कर संविदा के आधार पर Walk-in-Interview के माध्यम से नियुक्ति करने की स्वीकृति दी गई.

★ राजकीय श्रावणी मेला- 2019 के मद्देनजर विधि व्यवस्था संधारण के लिए दिनांक 15 जुलाई 2019 से दिनांक 15 सितंबर 2019 तक 27 अस्थाई मेला ओ.पी. एवं 15 अस्थाई यातायात ओ.पी.के गठन की स्वीकृति दी गई.

★ लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान प्रतिनियुक्त किए गए अर्द्धसैनिक/सैप बलों के मानदेय भुगतान के लिए वित्तीय वर्ष 2019-20 में स्थापना व्यय बजट मुख्यशीर्ष "2055-पुलिस-109- जिला पुलिस-AF जिला कार्यकारी दल, लोकसभा चुनाव- 09-मानदेय" के अंतर्गत झारखंड आकस्मिकता निधि से 4 करोड़ 71 लाख 54 हजार रुपए मात्र अग्रिम के रूप में स्वीकृत करने की घटनोत्तर स्वीकृति दी गई.

★ लोकसभा चुनाव-2019 के सुचारू रूप से संचालन एवं इस दौरान विधि-व्यवस्था के संधारण के लिए वित्तीय वर्ष 2019-20 में स्थापना व्यय बजट मुख्यशीर्ष "2055-"पुलिस के अंतर्गत विभिन्न लघुशीर्ष/उपशीर्ष/इकाई के अंतर्गत झारखंड आकस्मिकता निधि से ₹55 करोड़ मात्र अग्रिम के रूप में स्वीकृत करने के प्रस्ताव पर घटनोत्तर अनुमोदन की स्वीकृति दी गई.

★ झारखंड माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 के अंतर्गत कर दर से संबंधित निर्गत अधिसूचना संख्या एस.ओ. 41 दिनांक 29 जून 2017 में कतिपय संशोधन से संबंधित अधिसूचना के निर्गमन पर स्वीकृति दी गई.

★ कोडरमा जिला अंतर्गत (तिलैया (पिपराडीह)-जयनगर बगड़ो (डोमचांच पिपचो पथ पर) कुल लंबाई 18.55 किलोमीटर को ग्रामीण विकास विभाग (ग्रामीण कार्य प्रक्षेत्र) से पथ निर्माण विभाग को हस्तांतरित करते हुए पुनर्निर्माण कार्य के लिए 41 करोड़ 34 लाख 61 हजार रुपये मात्र का प्रशासनिक स्वीकृति दी गई.

★ देवघर जिला अंतर्गत "घीया मोड़ (सारठ-बस्ती-पलाजोरी पथ पर)-मधुपुर-बांसबूटिया कुंजबौना पथ पर कुल लंबाई 10.753 किलोमीटर को ग्रामीण विकास विभाग (ग्रामीण कार्य प्रक्षेत्र) से पथ निर्माण विभाग को हस्तांतरित करते हुए चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य के लिए 36 करोड़ 63 लाख 59 हजार 6 सौ रुपये मात्र की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई.

★ झारखंड जल संसाधन संवेदक निबंधन नियमावली, 2018 में संशोधन की स्वीकृति दी गई.

★ स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग झारखंड सरकार द्वारा संचालित शव वाहनों, 108, इमरजेंसी मेडिकल एंबुलेंस सर्विस (EMAS) एवं मोबाइल मेडिकल यूनिट में प्रयुक्त होने वाले वाहनों को रोड टैक्स में छूट प्रदान करने की स्वीकृति दी गई.

★ झारखंड Procurement Policy-2014 में आंशिक संशोधन करने की स्वीकृति दी गई.

★ जन वितरण प्रणाली दुकानदारों को किरासन तेल वितरण योजना में प्रति लीटर कमीशन रु 1 (1 रुपये) मात्र में राज्य सरकार द्वारा वाहन की जा रही 50% राशि अर्थात 50 पैसा प्रति लीटर को ई-पोस मशीन से प्रिंट स्लिप के आधार पर ना कर जिला आपूर्ति पदाधिकारी के लॉगिन से सीधे भुगतान किए जाने की स्वीकृति दी गई.

★ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 में उल्लेखित विभिन्न योजनाओं की पारदर्शिता और उचित कार्यान्वयन के लिए सतर्कता समितियों के पुनर्गठन की स्वीकृति दी गई.

★ खनिज क्षेत्र विकास प्राधिकार बाजार फीस नियमावली, 2010 के अध्याय-II, के नियम 20 (क) में निहित प्रावधान के आलोक में प्राधिकार द्वारा राजकीय कोष में जमा कुल राशि का 80% के विरुद्ध वेतनमान अंतर्गत प्राधिकार को राशि विमुक्त करने के लिए झारखंड आकस्मिकता निधि से कुल रुपए दो करोड़ अग्रिम की स्वीकृति दी गई.

महीने भर में स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों का हो पुनरोद्धारः सुनील वर्णवाल


मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव ने की जनसंवाद में दर्ज मामलों की समीक्षा
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रांची। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुनील वर्णवाल ने राज्य के सभी विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों के भवनों की स्थिति का ऑडिट कर एक माह के अंदर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। उन्होंने सभी जिलों के उपायुक्तों को कहा है कि जरूरत के अनुसार विद्यालय भवनों और आंगनबाड़ी केंद्रों की मरम्मत या पुनर्निर्माण का कार्य अनटाइड फंड या स्कूली शिक्षा विभाग में उपलब्ध फंड से प्राथमिकता के आधार पर पूरा करायें। श्री वर्णवाल ने पूरी तरह जर्जर हो चुके स्कूल भवनों को तत्काल ध्वस्त करने का भी निर्देश दिया ताकि इनकी वजह से किसी तरह का हादसा न हो। श्री वर्णवाल ने मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र की साप्ताहिक समीक्षा के दौरान रांची के तमाड़ प्रखंड अंतर्गत सरजामडीह मध्य एवं बालिका विद्यालय की जर्जर स्थिति को लेकर दर्ज करायी गयी शिकायत के आलोक में यह निर्देश दिया। उन्होंने करीब दो साल पूर्व दर्ज करायी गयी इस शिकायत पर संतोषजनक कार्रवाई न करनेवाले शिक्षा विभाग के एडीपीओ के खिलाफ कार्रवाई करने का भी आदेश दिया।

रामगढ़ जिले में सड़क दुर्घटना में मृत महेंद्र प्रसाद के परिजनों द्वारा राष्ट्रीय पारिवारिक हित लाभ योजना के तहत सहायता राशि का भुगतान न किये जाने की शिकायत पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया कि मृत्यु की स्थिति में तत्काल मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की व्यवस्था लागू की जाये।

धनबाद के राजगंज प्रखंड में पैक्स की ओर से उपलब्ध कराये गये धान बीज की रोपनी के बाद समय पूर्व बाली निकल आने के चलते 2013-14 में किसानों की फसल बर्बाद हो गयी थी। इस मामले में पूर्व में यह बताया गया था कि बीमा कंपनी की गारंटी की रकम से रिकवरी कर किसानों को मुआवज़ा भुगतान किया जाएगा। अब तक किसानों को मुआवजा नहीं दिये जाने पर प्रधान सचिव ने मामले को अगली ‘सीधी बात’ में मुख्यमंत्री के समक्ष रखने का निर्देश दिया। उन्होंने कृषि विभाग के नोडल अधिकारी को स्पष्ट रूप से चेतवानी दी कि अगली ‘सीधी बात’ तक मुआवजे का भुगतान नहीं किए जाने पर दोषी पदाधिकारी को चिन्हित कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

गोड्डा जिला के वार्ड सदस्य मो. अजहर परसा को जून 2017 से प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं किए जाने की शिकायत पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुनील वर्णवाल ने पंचायती राज से इस संबंध में स्पष्ट दिशानिर्देश साथ एक रिपोर्ट की मांग की है।

कोडरमा के गांव पहाड़ सिंह खैरा, गहड़ाबाद, महावरयान, पुरूभरबाद, लोहानीगंजबाद तथा मनीअहराबाद में खेतों में सिंचाई की उचित व्यवस्था के लिए वहां के किसानों ने पाईपलाईन की मांग की, इस पर श्री वर्णवाल ने विभाग को योजना कि स्वीकृति जल्द से जल्द कराने का निर्देश दिया।

गढ़वा के कांडी प्रखण्ड अंतर्गत खरौंधा ग्राम के भुरवा टोला में 31 मई 2018 को चक्रवाती तूफान के कारण 63 ग्रामीणों के घर क्षतिग्रस्त हो गये थे। ग्रामीणों को मुआवजा नहीं दिये जाने की शिकायत पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव ने जिला के नोडल अधिकारी को एक सप्ताह के भीतर मुआवजे का भुगतान करने का निर्देश दिया।

वित्तीय वर्ष 2015-16 में श्रम अधीक्षक, गढ़वा के आदेश पर दलित विकास मंच, गढ़वा एवं जन सहभागी केन्द्र, गढ़वा ने बाल श्रमिक सर्वेक्षण का कार्य किया था, जिसके एवज में उन्हें अब तक भुगतान नहीं किया गया है। इसपर श्री वर्णवाल ने विभाग के अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि भुगतान पर रोक लगाना कतई सही नहीं है। उन्होंने संविदा के नियमों का पालन नहीं किए जाने पर संबन्धित श्रम अधीक्षक, गढ़वा सहित सभी दोषी पदाधिकारिओं को चिन्हित कर कार्रवाई करने एवं उपायुक्त, गढ़वा के साथ बैठक कर एक सप्ताह में मामले को निष्पादित करने का निर्देश दिया।

गढ़वा जिले के निवासी रंजीत चौधरी की 11 नवम्बर 2008 अनुमंडल पदाधिकारी, गढ़वा के सरकारी वाहन से हुई दुर्घटना में मृत्यु पर जिला न्यायधीश, गढ़वा ने दिनांक 24 मार्च 2015 को सरकार की तरफ से इनके आश्रित पिता राजकुमार चौधरी को क्षतिपूर्ति राशि के रूप में 2,23000/रु० का भुगतान 6% वार्षिक सूद के साथ दिये जाने का आदेश दिया था। न्यायालय के आदेश के बावजूद अब तक मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किए जाने पर श्री वर्णवाल ने गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग को एक सप्ताह के भीतर आवंटन उपलब्ध कराने का आदेश दिया।

जलपथ प्रमंडल, रांची से कनीय अभियंता के पद से 31 जनवरी 2016 को सेवानिवृत ब्रज किशोर शर्मा को अब तक उपादान की राशि एवं पेंशन की स्वीकृति नहीं दिये जाने की शिकायत पर विभाग के नोडल अधिकारी ने 15 जुलाई 2019 तक भुगतान कर पेंशन शुरू कराने का आश्वासन दिया।

बोकारो जिले में वर्ष 2014 के विधान सभा चुनाव के दौरान शिव कुमार सिंह ने स्वच्छता प्रमंडल, चास के आदेशानुसार बेरमो, चन्द्रपुरा, चास के बूथों में कुल 126 अस्थायी शौचालयों का निर्माण करवाया था। कार्य के एवज में बकाया राशि का भुगतान उन्हें अब तक नहीं जाने की शिकायत पर श्री वर्णवाल ने जिला के नोडल अधिकारी को एक सप्ताह के भीतर भुगतान करने का आदेश दिया।

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री सचिवालय के अपर सचिव रमाकांत सिंह, संयुक्त सचिव मनोहर मरांडी के अलावा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

बद से बदतर हुई बाटा रोड की हालत


चक्रधरपुर । नगर परिषद क्षेत्र के प्रसिद्ध बाटा रोड की स्थिति  जर्जर के साथ साथ  बद से भी बदतर  बन गई है। जरा सी बारिश होने से यह रोड  कादा कीचड़ में तब्दील हो जाता है  इस जर्जर रोड के गड्ढे  बारिश के पानी से भर जाते हैं और लोगों का चलना फिरना दुश्वार हो जाता है लोगों को काफी परेशानियों का सामना इस रोड पर चलने पर करना पड़ता है ।पवन चौक और गुदरी बाजार से सटी यह नामी-गिरामी बाटा रोड आज अपनी स्थिति पर आंसू बहा रही है जबकि यहां रोजाना लाखों का कारोबार होता है डीलर और होलसेलर की दुकानों की तादाद सबसे अधिक इसी रोड पर है शहर और दूरदराज के  ग्रामीण क्षेत्रों से छोटे  दुकानदार इसी रोड के दुकानदारों से खरीदारी अपना करते हैं पर इस रोड के होलसेलर दुकानदार कभी जर्जर रोड पर ध्यान नहीं देते है इन्हें सिर्फ अपनी  बिजनेस की पड़ी है जबकि इसी रोड पर लाखों का कारोबार कर  के अपनी जेब भर रहे हैं यदि यह चाहे तो सारे दुकानदार मिलकर  बाटा रोड की स्थिति को सुधार सकते हैं  पर  इन्हें लगता है कि कोई ठेकेदार इस जर्जर रोड का ठेका ले और सरकारी राशि पर रोड को बना डाले।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...