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शनिवार, 10 अगस्त 2019

संसद और मीडिया परस्पर सहयोगी: वेंकैया नायडू



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*★उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू और मुख्यमंत्री रघुवर दास ने "देश के विकास में छोटे राज्यों की भूमिका" विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित किया।
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*★ छोटे राज्यों के गठन से विकास और गुड गवर्नेंस को मिल रहा बढ़ावा*

*-- द्रौपदी मुर्मू, राज्यपाल*
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*★अगले 10 वर्षो में दुनिया के विकसित देशों की बराबरी करेगा झारखंड*

*--रघुवर दास, मुख्यमंत्री*
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रांची। स्वतंत्र लोकतांत्रिक व्यवस्था का मीडिया अहम् अंग है. संसद और मीडिया परस्पर एक-दूसरे के सहयोगी हैं क्योंकि ये दोनों जनसरोकार और जन भावनाओं को प्राथमिकता देते हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति जनता का विश्वास बना रहे, इसके लिए मीडिया की निष्पक्षता काफी मायने रखती है। भारतीय संविधान में भी मीडिया की स्वतंत्रता को मौलिक अधिकारों के विस्तारित रूप में देखा जा सकता है. उपराष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडू ने रांची के रेड्डीशन ब्लू में प्रभात खबर के स्थापना दिवस पर "देश के विकास में छोटे राज्यों की भूमिका" विषय पर आय़ोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए ये बातें कही. उपराष्ट्रपति ने कहा कि जन समर्थन और जनता का विश्वास जीते बगैर कोई भी आंदोलन सफल नहीं हो सकता है और इसमें मीडिया कारगर रोल निभा सकता है. मीडिया के सहयोग से ही विकास की गति को तेज की जा सकती है और समाज के अंतिम पंक्ति में बैठे लोगों को सरकार की योजनाओं की जानकारी देने के साथ उसका फायदा दिलाया जा सकता है.

*आजादी की लड़ाई से ही मीडिया निभाता आ रहा है अहम् रोल*

उपराष्ट्रपति ने कहा कि मीडिया का महत्व इसी बात से लगाया जा सकता है कि आजादी की लड़ाई के दौरान इसका इस्तेमाल लोगों तक संदेश पहुंचाने में किया जाता था. देश की स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे कई नेताओं द्वारा हिंदी समेत विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में समाचार पत्रों का
प्रकाशन किया जाता है. इन समाचार पत्रों के जरिए लोगों को आजादी की लड़ाई ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ बगावत फूंकने के लिए प्रेरित करने में होता था. हालांकि आज के दौर में मीडिया में काफी बदलाव आए हैं. आज प्रिंट मीडिया के साथ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और न्यू मीडिया दस्तक दे चुकी है. लेकिन, मीडिया का स्वरुप चाहे कोई भी हो, उसे जन सरोकार से हमेशा जुड़े रहना
चाहिए. यह मीडिया के साथ जनता और देश के हित में है.

*लिखे हुए शब्दों की मर्यादा हमेशा बरकरार रहेगी*

श्री नायडू ने कहा कि मीडिया में आ रहे बदलावों के बीच भी समाचार पत्रों की अपनी अलग अहमियत है, क्योंकि लिखे हुए शब्दों की मर्यादा हमेशा बरकरार रहती है. एक बार अगर समाचार पत्र में कुछ छपा तो उसे बदला नहीं जा सकता है. इतना ही तकनीक ने प्रिंट मीडिया को पाठकों तक पहुंच को काफी आसान बना दिया है. आज समाचार पत्रों के आनलाइन संस्करण से इसकी लोकप्रियता बढ़ी है. देश-दुनिया में कोई भी व्यक्ति कहीं से भी किसी भी समाचार पत्र के किसी भी संस्करण को देख और पढ़ सकता है. इतना ही नहीं, पुरानी समाचार पत्रों को भी कभी आसानी से पढ़ा जा सकता है. इस तरह प्रिंट मीडिया को आधुनिक तकनीक से काफी सशक्त बना दिया है.

*जन सरोकारों के प्रति जवाबदेह बने मीडिया*

उपराष्ट्रपति ने कहा कि मीडिया को जन सरोकारों के प्रति जवाबदेह बने रहना होगा. जन समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का दायित्व निभाना होगा. इससे जनता का विश्वास न सिर्फ सरकार के प्रति बल्कि मीडिया के प्रति भी बढ़ेगा. लेकिन, मीडिया को अपनी मर्यादा का भी ख्याल रखने की जरूरत है. समाज में सनसनी और भ्रामकता फैलाने वाली खबरों को प्रसारित करने से बचना चाहिए. इसके साथ फेक और पेड न्यूज से भी दूरी बनाए रखनी होगी. मीडिया के लिए यह भी जरूरी है कि दलीय राजनीति से दूरी बनाए रखकर जनहित से जुड़े मुद्दे उठाने चाहिए. यह न सिर्फ मीडिय़ा बल्कि समाज और देश के हित में है.

*हिंदी के बिना हिंदुस्तान का आगे बढ़ना मुमकिन नहीं*


उपराष्ट्रपति ने कहा कि हिंदी के बिना हिंदुस्तान का आगे बढ़ना मुमकिन नहीं है. हिंदी पूरे देश को एक सूत्र में जोड़ती है. लोगों को एक-दूसरे के करीब लाती है. लेकिन, यह भी जरूरी है कि हर व्यक्ति को अपनी मातृभाषा जरूरी सीखनी चाहिए. घरों में हमें अपनी भाषा में बातचीतकरना चाहिए. इससे अपनापन महसूस होता है. उन्होंने यह भी कहा कि भाषा और भावनाएं एक साथ चलती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि हमारी शिक्षा व्यवस्था में आज बदलाव लाने की जरूरत है, क्योंकि इसमें कहीं न कहीं कुछ दोष हैं, जो लोगों को अपनी परंपरा, संस्कृति और इतिहास से दूर कर रही है.

*संसदीय व्यवस्था में चर्चा और वाद-विवाद के बाद ही होता है कोई निर्णय*

उपराष्ट्रपति ने इस बात पर बल दिया कि भारतीय संसदीय व्यवस्था में कोई भी निर्णय सांसदों-विधायकों के बीच चर्चा और वाद-विवाद के बाद लिया जाता है. जम्मू कश्मीर में धारा 370 समाप्त करने में भी इसी व्यवस्था का पूरी तरह पालन किया गया.

*लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में हो रहा फायदा*

राज्यपाल श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि इससे गुड गवर्नेंस और विकास को बढ़ावा मिल रहा है. खासकर झारखंड जैसे राज्य को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिल रहा है. खनिज संपदा से समृद्ध इस राज्य में संसाधनों का इस्तेमाल यहां के लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में हो रहा है. छोटे राज्यों के गठन से पंचायत स्तर तक विकास और जन कल्याणकारी योजनाओं को क्रियान्वित करने में आसानी हो गई है. लोगों को इसका सीधा फायदा मिल रहा है. इन राज्यों में सुविधाओं का विस्तार हुआ है और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हो रही है.

*शासन-प्रशासन तक जनता की पहुंच हो गई है आसान*

राज्यपाल ने कहा कि छोटे राज्यों के गठन से शासन-प्रशासन तक जनता की पहुंच काफी आसान हो गई है. लोग अपना समस्याओं को अपने जन प्रतिनिधियों के पास सीधे रख सकते हैं. इससे उनकी समस्याओं का समाधान तेजी से हो रहा है. यह बात न सिर्फ छोटे राज्यों के गठन तक सीमित है, बल्कि पंचायती राज व्यवस्था मे भी काफी कारगर साबित हो रहा है. उन्होंने इस मौके पर मीडिया के रोल पर बोलते हुए देश के विकास में इसे काफी अहम बताया.

*देश के विकास में मीडिया का सकारात्मक रोल*

संगोष्ठी को संबोधित करते हुये मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि समाचार पत्रों का भी एक राष्ट्रीय दायित्व है। वे देश एवं राज्य के विकास में अपनी सकारात्मक भूमिका निभा सकते है. पत्रकारिता एक मिशन है. मीडिया से देश-दुनिया की जानकारी प्राप्त होती है. मीडिया समाज का आईना होता है. उन्होंने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता होनी चाहिये. समाचार पत्र के कारण ही लोगों को संसद एवं विधानसभी की कार्रवाही की जानकारी प्राप्त होती है. उन्होंने कहा कि शब्द का महत्व होता है इसलिये जो कुछ भी लिखे सोच समझ कर लिखे.

*झारखंड के लोगों के सपने को पूरा कर रही हमारी सरकार*

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखण्ड के लोंगों के सपने पूरा करने का काम हमारी सरकार ने किया है. आने वाले 10 वर्षों में झारखण्ड विकसित देशों के समकक्ष खड़ा रहेगा. इसके लिये हमारी सरकार हर सेक्टर में काम कर रही है. पर्यटन को विकसित कर राज्य के युवाओं को रोजगार के नये अवसर उपलब्ध कराये जा रहे हैं. झारखण्ड अलग होने के बाद उग्रवाद हमें विरासत में मिली थी लेकिन अब राज्य में उग्रवाद अंतिम सांसे गिन रहा है. हमने सरेंडर पॉलिसी भी बनाई है ताकि मुख्यधारा से भटके लोग हमारी बनाई गई पॉलिसी की मदद से सरेंडर कर अपने आने वाले भविष्य को संवार सके. उन्होंने कहा कि राज्य में अमन, शांति के लिये पुलिस-प्रशासन दिन रात काम कर रही है. इसके लिये वे बधाई के पात्र है.

*हर क्षेत्र में विकास की लिखी जा रही इबारत*

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने 18 वर्ष पूर्व झारखण्ड, छत्तीसगढ़ एवं उतरांचल तीन नये राज्य दिये लेकिन झारखण्ड में पिछले 14 वर्षों से स्थायी सरकार नहीं रहने के कारण इस क्षेत्र का विकास नहीं हो पाया. 2014 में जनता ने राज्य में स्थायी सरकार के लिये वोट किया और हमारी सरकार आने के बाद पिछले साढ़े चार वर्षो से लगातार राज्य में विकास के नये आयाम गढ़े जा रहे है. शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क आदि क्षेत्रों में अप्रत्याशित कार्य हुये है. मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखण्ड बने हुये 19 वर्ष हुये है लेकिन झारखण्ड का इतिहास पुराना और गौरवशाली है. धरती आबा बिरसा मुण्डा, सिदो कान्हू जैसे झारखण्ड के वीर सपूतों ने देश की स्वतंत्रता में अपना खून बहाया है.

*धारा-370 समाप्त होने से पूरे देश के लिए अब एक ही कानून*

मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे राज्यों बनने से गुड गर्वेनेंस एवं विकास में आसानी होती है. देश के विकास में छोटे राज्यों का अहम योगदान होता है. झारखंड में तेजी से हो रहे विकास कार्य इसी ओर इशारा कर रहे हैं. नए राज्य के गठन से लोगों को अपने शासन-प्रशासन से करीब आने का मौका मिलता है. जम्मू कश्मीर से धारा 370 एवं 35A के हटने का जिक्र करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि अब जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख में भी संसद द्वारा बनाये कानून लागू होंगे. जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख में विकास का मार्ग प्रशस्त होगा. कश्मीर घाटी आतंकवाद मुक्त हो, देश के अन्य हिस्सों में जिस तरह विकास हो रहा है, उसी तरह कश्मीर में भी विकास होगा.

*उपेक्षित इलाकों में विकास की किरण पहंचाने में सहूलियत*

संगोष्ठी में अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रधान संपादक श्री आशुतोष चतुर्वेदी ने कहा कि छोटे राज्यों के गठन से उन इलाकों में विकास की किरण पहुंचाने में सहूलियत हो गई है जो लंबे समय से उपेक्षित थे. छोटे राज्यों के गठन से लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में और बिजली-पानी-सड़क के विकास का मार्ग तेजी से प्रशस्त हुआ है. इससे स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार सहित अन्य सभी क्षेत्रों का सम्यक और समान तरीके से विकास हो रहा है. झारखंड के संदर्भ में छोटे राज्यों का गठन काफी सार्थक साबित हुआ है. मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास के नेतृत्व में झारखंड अब तेजी से विकसित हो रहे राज्यों की कतार में शामिल हो चुका है.

*इस मौके पर विभिन्न क्षेत्रों में उल्खेनीय योगदान करने वाले शख्सियतों को झारखंड गौरव सम्मान से नवाजा गया.*

*समारोह में राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश नारायण सिंह, सांसद श्री संजय सेठ, महापौर श्रीमती आशा लकड़ा, चीफ पोस्मास्टर जेनरल, झारखंड सर्किल श्रीमती शशि शालिनी कुजूर, राज्यसभा के सेक्रेटरी जेनरल दीपक वर्मा सहित कई गणमान्य उपस्थित थे.

उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने किया मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना का शुभारंभ


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झारखण्ड के 13 लाख 60 हजार किसान के खाते में 442 करोड़ रुपये डीबीटी के माध्यम से भेजा गया
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● खेती का लाभदायक बनाना केंद्र व राज्य सरकार का लक्ष्य होना चाहिए

● जबतक गांव का विकास नहीं, तबतक सम्पूर्ण विकास की कल्पना निरर्थक

---एम वेंकैया नायडू, उपराष्ट्रपति
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★अर्थव्यवस्था के मेरुदंड किसानों को नमन

★राज्य के 35 लाख किसानों को दिसंबर तक केंद्र सरकार 2 हजार करोड़ और राज्य सरकार 3 हजार करोड़ की आर्थिक सहायता देगी

★ सभी जिलों में 5 हाजर मीट्रिक टन का एक कोल्ड स्टोरेज बनेगा

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रांची। आज भारत आगे बढ़ रहा है। लेकिन जबतक किसान व गांव का विकास नहीं होगा, तबतक संपूर्ण विकास की कल्पना व्यर्थ है। आज झारखण्ड जैसे कृषि प्रधान राज्य में किसानों की आर्थिक समृद्धि और खेती को लाभदायक बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना का शुभारंभ करते हुए मुझे खुशी हो रही है। खुशी इस बात की भी है कि यहां के किसान केंद सरकार की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना और राज्य सरकार की मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना से लाभान्वित हो रहें हैं। वैसे भी केंद्र और राज्य सरकार का लक्ष्य कृषि को लाभदायक बनाना होना चाहिए। अन्नदाता की आय को दोगुना करने का प्रयास सरकार का होना चाहिए। यह हो भी रहा है इसके लिए गंभीर प्रयास हो रहें हैं। यह ऐतिहासिक योजना किसानों के लिए अवश्य लाभकारी साबित होगा। ये बातें उपराष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडू ने कही। उपराष्ट्रपति आज हरमू मैदान मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना के शुभारंभ कार्यक्रम में कही।

केंद्र और राज्य मिलकर कार्य करें


उपराष्ट्रपति ने कहा कि कृषि का क्षेत्र प्रकृति पर आधारित है। लेकिन किसानों को एक मजबूत आधार प्रदान करने हेतु फसल बीमा योजना, सिंगल विंडो सिस्टम के साथ साथ किसानों के हित मे कई योजनाएं संचालित हैं। वनवासियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कार्य हो रहा है। केंद्र और राज्य सरकार के सम्मलित प्रयास से किसानों का कल्याण सुनिश्चित हो रहा है।

जल संचयन भी है जरूरी


उपराष्ट्रपति ने कहा कि पूरे देश में जल संचयन हेतु जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। ताकि भूगर्भीय जल सुरक्षित हो। झारखण्ड में भी उस दिशा में कार्य हो रहें हैं। जल संचयन, डीप बोरिंग, परकोलेशन टैंक का निर्माण, तालाबों का जीर्णोद्धार सरकार द्वारा किया जा रहा है जल संचयन में और किसानों के लिए लाभदायक साबित होगा। कृषि के क्षेत्र में गुणात्मक परिवर्तन होना बेहद जरूरी है।
35 लाख किसानों को दिसंबर तक मिलेगा योजना का लाभ
मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि आज खुशी का दिन है। झारखण्ड के मेरुदंड किसान भाई बहनों को नमन। 13 लाख 60 हजार 380 किसानों के खाते में आज प्रथम किस्त के तहत 442 करोड़ रुपये भेज दिए गए हैं। किसान भाई के लिए उक्त राशि कृषि कार्य हेतु जरूरी संसाधन जुटाने में सहायक होगा। यह सब किसानों के सशक्तिकरण हेतु किया जा रहा है। क्योंकि राज्य के 76% लोग ग्रामीण क्षेत्र में निवास करते हैं कुल भूमि का 68 प्रतिशत कृषि एवं संबंधित कार्य पर आधारित है, करीब 83 प्रतिशत खेत 5 एकड़ से कम आकार के हैं जो कुल भूमि का 37 प्रतिशत है। राज्य के किसान आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण कर्ज के जल में घिर जाते हैं। यही वजह है कि केंद्र व राज्य सरकार ने 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का संकल्प लिया है। इसी संकल्प को मूर्तरूप देने हेतु राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना लागू की गई, जिसका आज शुभारंभ किया जा रहा है।

दिसंबर 35 लाख किसानों के बीच 5000 करोड़ की आर्थिक सहायता

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिसंबर 2019 तक राज्य के 35 लाख किसानों को केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री कृषि सम्मान निधि योजना के तहत 2 हजार करोड़ एवं राज्य सरकार की मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना के तहत 3 हजार करोड़ यानी 5 हजार करोड़ रुपये दिए जाएंगे।

फसल बीमा के लिए 70 करोड़ का प्रावधान
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को विपरीत परिस्थितियों में हुई फसल की क्षति की भरपाई करने हेतु प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना भी चलाई जा रही है। किसानों को यह जानकर खुशी होगी कि वर्ष 2018 से इस योजना में प्रीमियम का भुगतान राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा है। किसानों को इसके लिए कोई भुगतान नहीं करना पड़ता है। वर्ष 2018 में खरीफ मौसम में फसल के बीमा करने हेतु सरकार द्वारा लगभग 64.00 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों के प्रीमियम मद में किया गया और 2019 में 70 करोड़ रुपये का प्रावधान बीमा के लिए किया गया है। किसानों के ऋण भार को कम करने के लिए सरकार द्वारा ब्याज अनुदान योजना चलाई जा रही है। इस योजना में कृषकों को कृषि कार्य हेतु दिए गए अल्पकालीन कृषि ऋण पर कृषि ऋण के भुगतान में अतिरिक्त 3 प्रतिशत का सूद माफ किया जाता है। इस योजना हेतु राज्य सरकार द्वारा 2019 में 20 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

50 हजार मोबाइल फोन वितरण करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को कृषि संबंधित नई तकनीक मौसम पूर्वानुमान एवं प्राकृतिक आपदाओं तथा बाजार व्यवस्था की अद्यतन जानकारी हेतु मोबाइल फोन वितरण की योजना शुरू की गई है। वर्ष 2018 में लगभग 7000 मोबाइल फोन का वितरण किया गया एवं 2019 में 50000 मोबाइल फोन वितरण करने का लक्ष्य है। इस योजना में किसानों को मोबाइल फोन हेतु 2000 रुपए उनके खाते में डीबीटी के माध्यम से उपलब्ध कराए जाते हैं। साथ ही राज्य भर में 207 कृषि सिंगल विंडो सिस्टम की स्थापना की गई है। राज्य में अब तक 17 लाख से ज्यादा किसानों को साइल हेल्थ कार्ड दिए गए हैं। छोटे और सीमांत किसानों को 45 हजार से ज्यादा पंपसेट वितरित किए गए हैं। कृषकों को 50 प्रतिशत अनुदान पर बीज उपलब्ध कराया जाता है।
राज्य के किसान अन्न भंडार और राज्य का खजाना भी भरेंगे

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के किसान 8 हजार 500 करोड़ रुपये का उत्पादित फसलों का निर्यात कर रहें। उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि -4 प्रतिशत का कृषि विकास दर आज साढ़े 4 वर्ष बाद 14 प्रतिशत हो गया। अब राज्य किसान अन्न भंडार तो भरेंगे ही राज्य के खजना भी भरेंगे। हम सब को मिलकर सोचना होगा कि हमारी कृषि व्यवस्था में मूल्यवृद्धि कैसे हो, वैल्यू एडिसन कैसे हो।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रधानमंत्री का सपना साकार करना लक्ष्य
इस अवसर पर राज्य के कृषि मंत्री श्री रणधीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि "मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना" के तहत राज्य के एक से पांच एकड़ तक की भूमि वाले 35 लाख किसानों को सरकार द्वारा न्यूनतम पांच हजार और अधिकतम 25 हजार रुपये दिए जाएंगे. साथ ही साथ प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को प्रति वर्ष 6 हजार रुपये दिए जा रहे हैं. इस तरह से दोनों योजनाओं से झारखंड के किसानों को हर साल कम से कम 11 हजार और अधिकतम 31 हजार रुपये का लाभ मिल सकेगा.

कृषि मंत्री श्री सिंह ने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि के तहत प्रथम किस्त की राशि राज्य के 8.06 लाख किसानों को डीबीटी के माध्यम से भेजी जा चुकी है़. उन्होंने कहा कि आज का दिन झारखंड के सभी किसानों के लिए ऐतिहासिक दिन है. "मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना" का शुभारंभ देश के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू के कर कमलों से हुआ है. इस योजना के तहत आज प्रथम किस्त की राशि राज्य के 13 लाख 60 हजार 380 किसानों को उपलब्ध कराई गई है. शेष बचे किसानों को प्रथम किस्त की राशि जैसे-जैसे किसानों का डाटा बेस एंट्री और अपडेशन का कार्य पूरा होता जाएगा हर हफ्ते भेजी जाएगी. दूसरी किस्त की राशि सितंबर माह के अंत तक या अक्टूबर माह के प्रथम सप्ताह तक उपलब्ध कराने का लक्ष्य विभाग द्वारा रखा गया है.

कृषि मंत्री श्री सिंह ने कहा कि जहां वर्ष 2013-14 में राज्य की कृषि फसल दर -4.5 प्रतिशत थी. पिछले साढे 4 साल में राज्य की कृषि दर बढ़कर +14.2 प्रतिशत हो गई है.

राज्य के 35 लाख किसानों को आच्छादित कर उन्हें योजना का लाभ देना प्राथमिकता
इस अवसर पर संबोधन करते हुए कृषि सचिव श्रीमती पूजा सिंघल ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास के नेतृत्व में "मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना" राज्य के किसानों की समृद्धि के लिए संजीवनी साबित होगी. इस योजना के तहत किसानों को मिलने वाली निर्धारित राशि का लाभ उनके बैंक अकाउंट में सीधे डीबीटी के माध्यम से दिए जाने वाली पहली योजना है. इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सभी जिलों में उपायुक्तों की टीम 24 घंटे डाटा एंट्री और अपडेशन करने का कार्य कर रही है. उन्होंने कहा कि आज सभी जिलों में कार्यक्रम किया जा रहा है. इस योजना को पूरी तरह पारदर्शी रखा गया है. आज से कृषि आशीर्वाद योजना के पोर्टल पर किसान अपना अकाउंट नंबर पब्लिक डोमेन में डालेंगे तो उन्हें यह पता चल पाएगा कि उनको कितनी राशि स्वीकृत की गई है.

इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री रणधीर सिंह, राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश, राज्यसभा सांसद श्री महेश पोद्दार, रांची सांसद श्री संजय सेठ, हटिया विधायक श्री नवीन जायसवाल, खिजरी विधायक श्री रामकुमार पाहन, मंडार विधायक श्रीमती गंगोत्री कुजूर, मेयर श्रीमती आशा लकड़ा, मुख्यसचिव श्री डी के तिवारी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ सुनील कुमार वर्णवाल, कृषि सचिव श्रीमती पूजा सिंघल, निदेशक श्री छवि रंजन व हजारों की संख्या में किसान उपस्थित थे।

झूलन उत्सव में शामिल होने की अपील


चक्रधरपुर की समाजसेवी नीतू साहू ने तमाम श्रद्धालुओं को झूलन उत्सव में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि चक्रधरपुर में झूलन उत्सव का आयोजन बहुत ही सुंदर किया गया है।समयाभाव के कारण वे "झूलन उत्सव " में नही जा पा रही थीं लेकिन आज विशेष समय निकाल कर शाम को श्याम बाबा जी की दरबार में हाजरी लगाने गयी।सच बताऊ बहुत आनंद आया ऐसा लगा जैसे पूरा माहौल राधाकृष्ण मय हो गया है ।भक्तिमय वातावरण में मन झूम उठा।तनमन भावविभोर हो गया ।और साथ मे " मेरी सहेली " महिला सशक्तिकरण ग्रुप का साथ सोने पर सुहागा हो गया।आज तो हमसब नीतू साहू प्रतिभा विकाश  सुषमा साहू नीता शंकर किरण तिवारी चन्दा मोदी  सुजाता ,मोरिशा ,कंचन भाभी उपस्थित थे पर आप सभी से निवेदन करती हूं कि अपना बहुमूल्य समय निकाल कर जरूर अपने कान्हा व राधा रानी से मिलने जरूर जाय ।सच बहुत आनंद आयगा मन भावविभोर हो जायेगा।और मेरी सहेली की तरफ से एक दिन का प्रसाद वितरण का भी आयोजन किया गया।तो भागमभाग भरी जिंदगी में कुछ समय झूलन उत्सव के लिये जरूर निकाले।हम सब मिल कर एक दिन सब  गोपियों बन कर कन्हैया को रिझाने जाएंगे। 

कांवरियों की सेवा के लिए सहायता सामग्री रवाना


चाईबासा । प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी मुर्गा महादेव  जाने वाले कांवरियों  की सेवा के लिए चाइबासा  के श्री बोल बम सेवा समिति द्वारा सेवा समिति के भोजन एवं अन्य सहायता सामग्री के वाहनों का जत्था रवाना किया गया ।
इस सेवा शिविर के वाहनों के जत्थे को चाइबासा मुख्यालय के डीएसपी अमरनाथ पांडे ने नारियल फोड़कर रवाना किया । बोल बम सेवा समिति द्वारा झिकपानी , ईलीगड्ढा , गम्हरिया , जगन्नाथपुर , दामोदरपुर , कोटगढ़ और नौवामुंडी में शिविर का आयोजन कर रास्ते में कांवरियों  को भोज सामग्री एवं  चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराई जाती है । इस अवसर पर चाइबासा मैरेज हाउस में कांवरियों की सेवा में लगे श्रद्धालुओं के लिए एक प्रसाद भोग का आयोजन किया गया  । बोल बम सेवा समिति के संस्थापक महेश गोयल  और सुशील रुंगटा ने संयुक्त रूप से बताया कि बोल बम सेवा समिति चाइबासा पिछले 42 वर्षों से कांवरियों की सेवा के लिए लगी हुई है । इसमें चाइबासा के गणमान्य लोगों का सहयोग मिलता है । इस शिविर में मुख्य रूप से अध्यक्ष नारायण पाड़िया , सचिव संजय गर्ग , गौरी अग्रवाल , रमेश चौमाल , पप्पू गोयल , अनिल मुरारका , दिलीप अग्रवाल , ओम शर्मा , गोपाल साहू , शिव बजाज ,  मानिक दास , गीगा दाहिमा , कमल लाठ की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है ।

जल शक्ति अभियान के तहत सघन वृक्षारोपण


विनय मिश्रा
चक्रधरपुर। चक्रधरपुर नगर परिषद के नव पदस्थापित कार्य पालक पदाधिकारी महेंद्र राम के योगदान देने के साथ ही सरकार के द्वारा जिन योजनाओं को मूर्त रूप देनी है उसको गति देने का कार्य प्रारंभ कर दिया है इसी क्रम में कार्यपालक पदाधिकारी ने जल शक्ति  अभियान के अंतर्गत वृक्षा रोपन का कार्य सघन  रूप से चलाया जा रहा हैं साथ  साथ ही श्री राम ने विकास कार्य  गति देने का निर्देश दिया है इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभुको को सह समय भुगतान का निर्देश दिया है जिससे केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त योजना सह समय पूर्ण हो सके साथ ही साथ उज्वला योजना के अंतर्गत एक वार्ड दीदी का चयन यथा किया जा रहा  है  साथ में  चक्रधरपुर नगर परिषद अधीन 7 वार्डो में मुहल्ला क्लिनिक संचालन के लिए तैयारी की जा रही हैं इसको मुर्त रूप देने के लिए यथा  प्रारंभ किया जा रहा हैं नया कार्यपालक पदाधिकारी महेंद्र राम के प्रभार ग्रहण करने लेने के साथ ये प्रतीत होने लगा कि चक्रधरपुर नगर परिषद की विकास  के कारण इसकी अलग पहचान बनेगी

शिक्षाविद निरुप के नि:शुल्क शिक्षण संस्थान में विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया


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चक्रधरपुर। शिक्षाविद निरुप कुमार प्रधान में समर्थ नाम की एक संस्था का गठन किया है इस संस्था में के अंतर्गत गरीब एवं आर्थिक असमर्थ को नि:शुल्क प्रतियोगिता परीक्षा एवं नि:शुल्क बुनियादी शिक्षा दी जाएगी ।साथ ही साथ सामाजिक कल्याण के कार्यों को भी संपन्न किया जाएगा।इसके संस्थापक शिक्षाविद निरुप हैं।

 इसी संस्था द्वारा 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया इसमें नि:शुल्क बुनियादी शिक्षा के सभी बच्चे इकट्ठे होकर इस कार्यक्रम का आयोजन किए। इसमें झारखंड की संस्कृति का एक दृश्य देखने को मिला ! जिसमें सभी बच्चे एवं शिक्षक सरना नृत्य को प्रस्तुत किए।


इस कार्यक्रम में अतिथि के रूप में कई गणमान्य लोग उपस्थित थे जिसमें समाजसेवी विनोद भगेरिया एवं उनकी पत्नी श्रीमती विशाखा ,पूर्व प्राचार्य नागेश्वर प्रधान,कविवर रणविजय कुमार ,समाजसेवी सदानंद होता, सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मी दिग्गी इत्यादि गणमान्य उपस्थित होकर सभी बच्चों का उत्साह बढ़ाएं।

 इस दौरान सभी अतिथि गण भी इस नृत्य में सम्मिलित होकर इस का मान बढ़ाएं एवं सर्वश्रेष्ठ नृत्य का पुरस्कार भी उनके हाथों से बच्चों को दिया गया। इस तरह यह कार्यक्रम सफल रहा एवं आगामी वर्ष भी इस दिवस को धूमधाम से मनाने का संकल्प लिया गया।

इस कार्यक्रम में श्री निरूप ने ढोल बजाकर बच्चों के साथ नृत्य किया एवं इसका संबोधन श्री नील अभिमन्यु के द्वारा संपन्न हुआ।

शुक्रवार, 9 अगस्त 2019

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में दो फीसद की बढ़ोत्तरी




नई दिल्ली। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी हालिया रिपोर्ट के मुताबिक जून, 2019 में औद्योगिक उत्‍पादन सूचकांक (आईआईपी) 130.2 अंक रहा जो जून, 2018 के मुकाबले 2.0 फीसदी ज्‍यादा है। इसका मतलब यही है कि जून, 2019 में औद्योगिक विकास दर 2.0 फीसदी रही। उधरअप्रैल-जून, 2019 में औद्योगिक विकास दर पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 3.6 फीसदी आंकी गई है।जून, 2019 में खननविनिर्माण (मैन्‍युफैक्‍चरिंग) एवं बिजली क्षेत्रों की उत्‍पादन वृद्धि दर जून, 2018 के मुकाबले क्रमश: 1.6 फीसदी, 1.2 फीसदी तथा 8.2 फीसदी रही। उधरअप्रैल-जून 2019 में इन तीनों क्षेत्रों यानी सेक्‍टरों की उत्‍पादन वृद्धि दर पिछले वित्‍त वर्ष की समान अवधि की तुलना में क्रमश: 3.0, 3.1 तथा 7.2 फीसदी आंकी गई है। उद्योगों की दृष्टि से विनिर्माण क्षेत्र के 23 उद्योग समूहों (दो अंकों वाली एनआईसी-2008 के अनुसार) में से समूहों ने जून, 2018 की तुलना में जून, 2019 के दौरान धनात्मक वृद्धि दर दर्ज की है। इस दौरान बुनियादी धातुओं के विनिर्माण’ ने 17.7 प्रतिशत की सर्वाधिक धनात्‍मक वृद्धि दर दर्ज की है। इसके बाद ‘खाद्य उत्पादों के विनिर्माण’ का नम्बर आता है जिसने 16.5 प्रतिशत की धनात्‍मक वृद्धि दर दर्ज की है। इसी तरह ‘तंबाकू उत्‍पादों के विनिर्माण’ ने 10.3 प्रतिशत की धनात्‍मक वृद्धि दर दर्ज की है। वहींदूसरी ओर उद्योग समूहकागज एवं कागज उत्‍पादों के विनिर्माण’ ने (-) 19.9 प्रतिशत की सर्वाधिक ऋणात्‍मक वृद्धि दर दर्ज की है। इसके बाद 'फर्नीचर के विनिर्माणका नंबर आता है जिसने (-) 14.3 प्रतिशत की ऋणात्‍मक वृद्धि दर दर्ज की है। इसी तरह मोटर वाहनों, ट्रेलरों एवं सेमी-ट्रेलरों के विनिर्माण ने (-) 13.9 प्रतिशत की ऋणात्‍मक वृद्धि दर दर्ज की है।
उपयोग आधारित वर्गीकरण के अनुसार जून, 2019 में प्राथमिक वस्‍तुओं (प्राइमरी गुड्स)पूंजीगत सामानमध्‍यवर्ती वस्तुओं एवं बुनियादी ढांचागत/निर्माण वस्‍तुओं की उत्‍पादन वृद्धि दर जून, 2018 की तुलना में क्रमश: 0.5 फीसदी, (-) 6.5, 12.4 फीसदी और (-)1.8 फीसदी रही। जहां तक टिकाऊ उपभोक्‍ता सामान का सवाल हैइनकी उत्‍पादन वृद्धि दर जून, 2019 में (-) 5.5 फीसदी रही है। इसी तरह गैर-टिकाऊ उपभोक्‍ता सामान की उत्‍पादन वृद्धि दर जून, 2019 में 7.8 फीसदी रही।




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