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शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2019

* प्रशासनिक दक्षता की मिसाल पेश करते रहे हैं उपेंद्र नारायण उरांव

 


सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय का व्यापक दृष्टिकोण रखते हुए सामाजिक उत्थान और उत्कर्ष के लिए सतत प्रयत्नशील रहना व्यक्ति की महानता का परिचायक होता है। समाज को हमेशा सही दिशा दिखाने और रचनात्मक कार्यों में सहभागिता निभाते हुए अपने प्रशासनिक कार्यों को भी बखूबी निष्पादित करते रहना किसी भी अधिकारी की विशेषता कहलाता है। ऐसी ही एक शख्सियत हैं भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी और वर्तमान में झारखंड राज्य खाद्य आयोग के सदस्य उपेंद्र नारायण उरांव। श्री उरांव मूल रूप से रांची के मांडर क्षेत्र के निवासी हैं। लेकिन काफी दिनों से बिहार के पूर्णिया में बस गए हैं। वह पढ़ाई-लिखाई में वह हमेशा अव्वल रहे। ग्रेजुएशन करने के बाद श्री उरांव बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में शामिल हुए और सफल रहे। उनकी पहली पदस्थापना बतौर प्रखंड विकास पदाधिकारी तांत नगर में हुई। वह गुमला जिले के चैनपुर में भी बीडीओ के पद पर कार्यरत रहे। श्री उरांव एकीकृत बिहार और झारखंड के एकमात्र ऐसे अधिकारी हैं, जिन्हें अपने सेवाकाल के दौरान सात अनुमंडल का पदाधिकारी रहने का गौरव प्राप्त है। वह बिहार के भभुआ, खड़गपुर,(मुंगेर),लखीसराय, झंझारपुर और झारखंड के धनबाद और चक्रधरपुर में अनुमंडल पदाधिकारी के पद पर रह चुके हैं। वह जहां भी पदस्थापित रहे, अपनी प्रशासनिक दक्षता और क्षमता का परिचय देते हुए एक कर्तव्यनिष्ठ और उत्कृष्ट अधिकारी की पहचान बनाने में सफल रहे। श्री उरांव जब चक्रधरपुर में अनुमंडल पदाधिकारी थे, उसी समय रांची जिले के बुंडू को नया अनुमंडल बनाया गया था। श्री उरांव को बुंडू के प्रथम अनुमंडल पदाधिकारी बनने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। प्रशासनिक पद पर रहते हुए अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने जनहित में कई ऐसे उल्लेखनीय कार्य किए, जो मील का पत्थर साबित हुआ है। वह झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ के भी पदधारी रहे हैं। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के हितों के संरक्षण के लिए सतत प्रयासरत रहे हैं। श्री उरांव दुमका में डीडीसी के पद पर भी कार्यरत रहे। झारखंड सरकार के खाद्य आपूर्ति विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी। इस दौरान खाद्य सुरक्षा कानून के अनुपालन के प्रति वह काफी गंभीर रहे हैं। उनकी उत्कृष्ट कार्यशैली, अनुभव और प्रशासनिक दक्षता के आधार पर राज्य सरकार ने उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद भी उनकी सेवाएं राज्य खाद्य आयोग में बतौर सदस्य के रूप में ले रही है। श्री उरांव जात-पात, धर्म-संप्रदाय की संकीर्णताओं से परे हैं। वह सभी धर्मों का समान आदर करते हैं। समाज के लिए सकारात्मक कार्यों में बढ़चढ़कर हिस्सा लेते हैं।  वह एक शालीन, सरल और सहज व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति हैं। व्यस्त दिनचर्या के बावजूद उनकी सहभागिता सामाजिक कार्यों में भी होती है। राज्य खाद्य आयोग में सदस्य के रूप में  जन शिकायतों के निवारण के लिए विभिन्न स्थानों पर शिविर लगाकर जनसुनवाई के माध्यम से लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए वह सतत प्रयासरत रहते हैं। श्री उरांव की विशेषता रही है कि वह अपने कार्यों के प्रति सदैव गंभीर रहे हैं। अपने उत्तरदायित्वों के निर्वहन के लिए वह सदैव प्रयासरत रहते हैं। प्रशासनिक पद पर रहते हुए सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन की दिशा में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए,जिसका लाभ जनता को मिलता रहा है। जनहित के कार्यों को तवज्जो देना उनकी प्राथमिकताओं में शुमार है। मृदुभाषी उपेंद्र नारायण उरांव का व्यवहार सबों के साथ मित्रवत होता है। उनका मानना है कि शालीनता और संस्कार जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। इसके माध्यम से हम हर दिल अजीज बन सकते हैं। समाज के प्रति अपने संदेश में वह कहते हैं कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर समाज हित के प्रति भी हमें सजग रहने की आवश्यकता है। यह स्वस्थ और स्वच्छ समाज निर्माण में काफी सहायक होता है। वहीं, युवाओं के प्रति अपने संदेश में श्री उरांव कहते हैं कि युवाओं को अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल सकारात्मक कार्यों में करना चाहिए। इससे हमारा देश और समाज सशक्त होगा और विश्व पटल पर भारत विकासशील देशों की श्रेणी में अग्रिम पंक्ति में खड़ा हो सकेगा।
 प्रस्तुति : विनय मिश्रा

बुधवार, 9 अक्टूबर 2019

औद्योगिक संबंधों को विकसित करने वाले कर्मयोगी हैं राणा शुभाशीष



प्रतिभा और कर्तव्यनिष्ठा की जीती जागती मूर्ति हैं बहुमुखी प्रतिभा के धनी राणा शुभाशीष चक्रवर्ती। वे वर्तमान में एचईसी के निदेशक (उत्पादन व विपणन) के पद पर कार्यरत हैं। उनकी शिक्षा-दीक्षा रांची में ही हुई। उनके पिता स्व. प्रो.जगन्नाथ चक्रवर्ती और माता स्व. तृप्ति चक्रवर्ती ने उन्हें संस्कारयुक्त शिक्षा दिलाने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखी। अपने माता पिता को प्रेरणास्रोत मानते हुए श्री चक्रवर्ती अपने जीवन पथ पर सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने बीआईटी, मेसरा से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। तत्पश्चात इग्नू से डिप्लोमा इन मैनेजमेंट का कोर्स किया। इसके बाद एमबीए (मार्केटिंग मैनेजमेंट) में बीआईटी, मेसरा से प्रथम श्रेणी की डिग्री प्राप्त की। पढ़ाई के प्रति उनका जुनून, इतनी डिग्रियां हासिल करने के बाद भी कम नहीं हुआ। फिलवक्त श्री चक्रवर्ती पीएचडी कर रहे हैं। उनके शोध का विषय "सार्वजनिक क्षेत्र में कारपोरेट सामाजिक जिम्मेदारियों की चुनौतियां और अवसर" है। राणा एस. चक्रवर्ती को 52 वें इंजीनियर्स दिवस समारोह पर इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स, झारखंड द्वारा प्रतिष्ठित "एमिनेंट इंजीनियर पुरस्कार" से सम्मानित किया गया।  उन्हें यह पुरस्कार एचईसी के विपणन में उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए दिया गया। उन्हें "भारत की ऊर्जा सुरक्षा में विद्युत क्षेत्र की भूमिका" पर तकनीकी पेपर प्रस्तुत करने के लिए इंस्टीच्यूशंस ऑफ इंजीनियर्स की ओर से 'विश्वेश्वरैया गोल्ड मेडल'  भी मिला है। उन्होंने भारत और विदेशों में विभिन्न संस्थाओं द्वारा आयोजित सेमिनार में पर्यावरण इंजीनियरिंग, विपणन, प्रबंधन और उद्योग के क्षेत्र में तकनीकी कागजात भी प्रस्तुत किए हैं। जिसके लिए उन्हें पुरस्कृत किया जाता रहा है। श्री चक्रवर्ती सार्वजनिक उपक्रम, मेकॉन लिमिटेड में तकरीबन 32 वर्षों तक बतौर अधिकारी विभिन्न पदों पर सेवारत रहे।  मेकाॅन में कार्यकाल के दौरान अपनी बेहतरीन कार्यशैली से उन्होंने कई उपलब्धियां हासिल की हैं, जो मील का पत्थर साबित हुई हैं। अपने सहयोगियों से मित्रवत व्यवहार करना, जिम्मेदारियों को बखूबी निभाना और प्रत्येक कार्यों को समयबद्धता तथा प्रसन्नता से पूरा करना उनकी विशेषता है। प्राथमिकताएं तय कर निर्णय लेने की उनमें अद्भुत क्षमता है। सकारात्मक सोच के साथ अपने कर्तव्यों का बखूबी निर्वहन उनकी दिनचर्या में शुमार है। एचईसी में उत्पादन बढ़ाने और औद्योगिक वातावरण विकसित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।  विदित हो कि राणा चक्रवर्ती ने उस समय एचईसी के निदेशक का पद संभाला, जब एचईसी के समक्ष कई चुनौतियां थी। एचईसी के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा था। श्री चक्रवर्ती ने उन चुनौतियों का सामना करते हुए उससे निबटने की ठोस रणनीति बनाकर टीम भावना से काम करना शुरू किया। एचईसी के ग्राहकों और कर्मचारियों के भरोसे को मजबूत किया। इसका सकारात्मक परिणाम सामने है। उन्होंने इसरो, विजाग स्टील, कोल इंडिया, रक्षा क्षेत्र आदि सेक्टर से कार्यादेश प्राप्त करने में सफलता पाई। इस  दौरान वह विदेशों से भी कार्यादेश प्राप्त करने में सफल रहे। इस क्रम में उन्होंने इंडोनेशिया, जापान सहित अन्य देशों का भी दौरा किया। देश-विदेश से एचईसी के लिए कार्यादेश प्राप्त करने की दिशा में श्री चक्रवर्ती सतत प्रयासरत हैं। एचईसी की दशा और दिशा सुधारने में अपनी महती भूमिका निभा रहे हैं। श्री चक्रवर्ती को विपणन व प्रबंधन क्षेत्र के अतिरिक्त पर्यावरण, इंजीनियरिंग,ऊर्जा सहित अन्य क्षेत्रों में भी काफी अनुभव प्राप्त है। उनके इस अनुभव का लाभ एचईसी को मिल रहा है। श्री चक्रवर्ती की पहचान एक मल्टीटैलेंट पर्सनैलिटी के रूप में स्थापित हो चुकी है। उनकी इन्हीं विशेषताओं के कारण 28 मार्च 2019 को स्टैंडिंग कॉन्फ्रेंस ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेज (स्कोप) के कार्यकारी बोर्ड का सदस्य चयनित किया गया। श्री चक्रवर्ती अपने उत्तरदायित्व के प्रति सदैव सजग रहते हैं। समाज के प्रति अपने संदेश में वह कहते हैं कि अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदार पहल करते हुए सकारात्मक सोच के साथ कार्य करते रहें। इससे हमारा देश सशक्त व समृद्ध होगा और विश्व पटल पर भारत का दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा।
 प्रस्तुति : नवल किशोर सिंह

सोमवार, 7 अक्टूबर 2019

नवरात्र में झारखंड को मिला तारामंडल का तोहफा


मुख्यमंत्री रघुवर दास ने चिरौंदी स्थित साइंस सेंटर में नवनिर्मित वराहमिहिर तारामंडल का उद्घाटन किया
 साथ में झारखंड प्रौद्योगिकी (टेक्निकल) विश्वविद्यालय के नवनिर्मित भवन का भी ऑनलाइन उद्घाटन
 साइंस सेंटर परिसर में ही 1 करोड़ 80 लाख की लागत से बनने वाले इनोवेशन हब भवन का भी शिलान्यास
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★ रांची बनेगा खगोलीय शिक्षा का राष्ट्रीय केंद्र

★ इनोवेशन हब से विज्ञान के विकास को बढ़ावा

★ समग्र विकास में विज्ञान का महत्वपूर्ण स्थान
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रांची। मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि रांची खगोलीय शिक्षा का राष्ट्रीय केंद्र बनेगा। हमारी सरकार का विज्ञान और तकनीकी के प्रगति पर पूरा जोर है। समय के साथ आगे बढ़ना जरूरी है। नई-नई तकनीकों को अगर हम बदलते समय के साथ नहीं अपनाएंगे तो चीजें समय के साथ आगे नहीं बढ़ पायेंगी। विज्ञान के विकास के बिना राज्य या देश तरक्की नहीं कर सकता। शिक्षा, कारोबार, उद्योग या फिर सरकारी मशीनरी इन सभी क्षेत्रों के विकास में विज्ञान और नई तकनीकों का महत्वपूर्ण स्थान है। उक्त बातें मुख्यमंत्री ने आज चिरौंदी स्थित साइंस सेंटर में नवनिर्मित वराहमिहिर तारामंडल एवं झारखंड प्रौद्योगिकी (टेक्निकल) विश्वविद्यालय के नवनिर्मित भवन के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहीं।

तारामंडल खगोलीय विद्या के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा

मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि तारामंडल खगोलीय विद्या के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि वराहमिहिर तारामंडल झारखंड के छात्र-छात्राओं और शोधकर्ताओं में एक नई ऊर्जा का संचार करेगा। इन्हें खगोलीय विद्या के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।

प्रोत्साहन राशि दे रही है सरकार

मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि विज्ञान के प्रचार प्रसार एवं शिक्षाविद छात्र-छात्राओं में विज्ञान के प्रति रुचि जागृत करने के लिए अभियंत्रण एवं डिप्लोमा टॉपर को प्रोत्साहित राशि सरकार दे रही है। शोधकर्ता एवं कार्यशाला सेमिनार व्याख्यान आयोजन के लिए अनुग्रह राशि भी सरकार मुहैया करा रही है।

खगोलविद् वराहमिहिर के नाम पर है तारामंडल

मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि वराहमिहिर तारामंडल झारखंड का पहला अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित तारामंडल है। इस तारामंडल का नाम बड़े चिंतन के साथ वराहमिहिर रखा गया है। वराहमिहिर महान दार्शनिक खगोलशास्त्री और गणितज्ञ थे। वराहमिहिर गुप्त काल के छठवीं सदी में उज्जैन में जन्म लिए थे।

इनोवेशन हब भवन का शिलान्यास

मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि चिरौंदी स्थित इस साइंस सेंटर में ही एक करोड़ 80 लाख रुपए की लागत से नई इनोवेशन भवन का भी शिलान्यास आज हो रहा है। इस भवन का भी निर्माण कार्य समय सीमा के अंतर्गत पूरा करना राज्य सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि हम ज्ञान विज्ञान एवं तकनीकी के युग में जी रहे हैं। वर्तमान समय की मांग है कि इस क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाय । इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए सरकार ने इनोवेशन हब भवन निर्माण करने का संकल्प लिया है। सरकार का लक्ष्य है कि यह कार्य समय सीमा के अंतर्गत पूरा हो।

तकनीकी क्षेत्र में पढ़ाई करने वाले छात्र छात्राओं को काफी लाभ पहुंचेगा

मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि नामकुम स्थित झारखंड प्रौद्योगिकी (टेक्निकल) विश्वविद्यालय का भी उद्घाटन आज हो रहा है। इस विश्वविद्यालय के शुभारंभ होने से राज्य के तकनीकी क्षेत्र में पढ़ाई करने वाले छात्र छात्राओं को काफी लाभ पहुंचेगा। इस क्षेत्र में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को अब बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी उन्हें यहीं से डिग्रियां प्राप्त होंगी। तकनीकी के इस युग में बच्चे और ज्यादा मजबूत होंगे। मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि वैज्ञानिकों ने हमेशा देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में हो रहे विकास देश को नए आयाम देंगे। मुख्यमंत्री ने विज्ञान के क्षेत्र में रुचि रखने वाले छात्र छात्राओं से अपील किया कि वे पूरी निष्ठा के साथ अपनी पढ़ाई करें और जीवन के पथ पर निरंतर आगे बढ़ते रहें। आने वाले समय में झारखंड से भी वैज्ञानिक उभरकर देश और दुनिया में राज्य का नाम रोशन करें। उन्होंने राज्यवासियों को दुर्गा पूजा की शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने तारामंडल पर बनाई गई लघु फिल्म भी देखी।

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री डॉ नीरा यादव, सांसद रांची श्री संजय सेठ, कांके विधायक श्री जीतू चरण राम, मेयर रांची श्रीमती आशा लकड़ा, उच्च शिक्षा सचिव श्री शैलेश कुमार सिंह, तकनीकी निदेशक डॉ अरूण कुमार, सेंटर के कार्यपालक निदेशक श्री जीएसपी गुप्ता सहित बड़ी संख्या में वैज्ञानिक, स्कूली छात्र-छात्राएं एवं अन्य उपस्थित थे।

आप सभी गुरु नानक देव के सत्य वचनों से प्रेरणा लेंः रघुवर दास

★गरीबों दीन-दुखियों की मदद करें
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जमशेदपुर। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने झारखंड वासियों को गुरु नानक देव जी के सत्य वचन से प्रेरणा लेने को कहा उन्होंने कहा हमारे डबल इंजन की सरकार श्री गुरु नानक देव जी के पद चिन्हों पर चलते हुए झारखंड के गरीबों के हित के लिए  दिनरात लगी है। मुख्यमंत्री जमशेदपुर स्थित गुरुद्वारा में अरदास के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा हम सभी को मिलकर गरीब दीन दुखियों की मदद करनी चाहिए। सिखों की एक ऐसी संस्था है पूरे देश में जो ना सिर्फ सिखों की ही सेवा करती है बल्कि समाज के सभी वर्गों चाहे वह किसी भी धर्म जाति से क्यों ना जुड़ा हो उन सब की मदद के लिए हर वक्त आगे रहती है। उसी की तर्ज पर पर सबका विकास सबका साथ के साथ हमारे डबल इंजन की सरकार कार्यरत है।

दुर्गा बाड़ी में मां दुर्गे की आराधना में शामिल हुए सुबोध कांत सहाय



रांची। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय दुर्गोत्सव के दौरान महा अष्टमी के दिन शहर के अल्बर्ट एक्का चौक स्थित दुर्गा बाड़ी में मां दुर्गे की पूजा-अर्चना में शामिल हुए और माता के दरबार में मत्था टेका। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि नवरात्र मां दुर्गा की उपासना का पावन पर्व है। जीवन में माता का स्थान सर्वोच्च होता है। हमें जन्म देने से लेकर अच्छे संस्कारों से पोषित और पल्लवित करने में मां की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस संबंध में दुर्गा स्तुति में भी वर्णित है कि पुत्र कुपुत्र हो सकता है, पर माता कुमाता नहीं हो सकती। हर हाल में मां पूज्य होती है। मां हमारा सदैव मार्गदर्शन करती रहती है। जीवन में कदम- कदम पर हमारी रक्षा करती हैं। हमारे जीवन की पहली शिक्षक भी मां ही होती हैं। मां सिर्फ जन्मदाता ही नहीं बल्कि जीवन में सत्कर्मों का रास्ता दिखाते हुए हमारा मार्गदर्शन भी करती हैं। उन्होंने कहा कि नवरात्र में मां दुर्गे की आराधना काफी महत्वपूर्ण है। श्री सहाय ने कहा कि जीवन में अच्छे कर्म करते हुए अच्छे रास्ते पर सदैव आगे बढ़ते रहें, इसके लिए उन्होंने मां दुर्गे से आशीष मांगे। इस अवसर पर श्री सहाय के साथ समाजसेवी दीपक लाल व अन्य मौजूद थे। उन्होंने सबों को नवरात्रि और दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं दी और श्रद्धालुओं से सौहार्द्रपूर्ण माहौल में दुर्गा पूजा मनाने की अपील की।

एमआई ऑर्थोपेडिक केयर में निःशुल्क शिविर का आयोजन

92 मरीजो का हुआ इलाज, दवा भी निःशुल्क दिया गया


रांची। शहर के मेन रोड पर अवस्थित (पंजाब स्वीट हाउस के पीछे) रविवार को हड्डी रोग से संबंधित सभी समस्याओं के उपचार के लिए एमआई ऑर्थोपेडिक केयर क्लीनिक में निःशुल्क शिविर का आयोजन किया गया। एमआई ऑर्थोपेडिक केयर के संचालक हड्डी व नस रोग विशेषज्ञ डॉ. एस अली ने बताया कि यहां हड्डी रोग(पुराने घुटने, कमर, गर्दन के दर्द और नस के किसी भी तरह का प्रॉब्लम)से पीड़ित मरीजों के उपचार यहां किया जा रहा है। पुराने से पुराने गठिया, कांधा दर्द, कमर दर्द, एड़ी का दर्द, पीठ का दर्द, हड्डी एव जोड़ का दर्द, हड्डी की जांच, नस का दर्द का इलाज किया जा रहा है। डिजिटल एक्सरे, शुगर जांच, युरिक एसिड जांच, गठिया जांच, केलोस्ट्रोल जांच, सभी तरह के खून जांच पर 20 से 30%की छूट व एमआरआई कराने पर 1 हजार की छूट मरीजो को दिया जा रहा है। इसके अलावा फिजयोथेरेपी डॉ के अली के द्वारा निःशुल्क किया गया। मरीजो को एक्सरसाइज के तरीके भी बताए गए। इस शिविर को कामयाब बनाने में अहमद ज़ीशान अली, तनवीर आलम, अब्दुर्रहमान ने अहम भूमिका निभाई।

रविवार, 6 अक्टूबर 2019

आईएएस अधिकारी मां दुर्गा की पूजा-अर्चना में लीन


*  शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव अमरेंद्र प्रताप सिंह ने की महा सप्तमी की पूजा

विनय मिश्रा
रांची। दुर्गोत्सव के अवसर पर राजधानी रांची पूरी तरह से मां दुर्गे की भक्ति में लीन हो चुकी है। मां भवानी के भक्त भक्ति के सागर में डूब गए हैं। चहुंओर मां के भजनों की गूंज सुनाई दे रही है। दुर्गोत्सव पूरे उफान पर है। शनिवार को मां सप्तमी के दिन मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। वहीं, पंडालों में भी दर्शनार्थियों काफी भीड़ देखी गई। इस अवसर पर राजधानी के अशोक विहार स्थित श्री गणेश अपार्टमेंट में महा सप्तमी के अवसर पर मां दुर्गा की भव्य आरती की गई। मौके पर झारखंड सरकार के शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव और तेज- तर्रार आईएएस अधिकारी अमरेंद्र प्रताप सिंह ने भी मां दुर्गे की पूजा अर्चना की और उनका आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर मुख्य यजमान झारखंड सरकार के भू राजस्व विभाग के संयुक्त सचिव रामकुमार सिन्हा  सपरिवार मां दुर्गा की आरती में शामिल हुए। आचार्य कृष्णानंद ने महासप्तमी के अवसर पर मां दुर्गे की पूजा अर्चना के बाद आरती की और भक्त जनों के बीच प्रसाद वितरित किया। इस अवसर पर काफी संख्या में श्रद्धालुगण मौजूद थे।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...