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बुधवार, 31 अक्टूबर 2018

प्रतिभा को किसी सहारे की जरूरत नहीं पड़ती



* बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं राजीव किशोर 

कहते हैं प्रतिभा छिपाए नहीं छिपती। प्रतिभावान लोग अपने मेहनत और ईमानदारी के बलबूते सफलता की सीढ़ियां खुद-ब-खुद चढ़ते हैं। उन्हें किसी के सहारे की जरूरत नहीं होती है। ऐसे व्यक्ति जिस क्षेत्र में रहते हैं, अपनी प्रतिभा का परचम लहराते रहते हैं। इसकी मिसाल हैं राजधानी रांची निवासी बहुमुखी प्रतिभा के धनी राजीव किशोर। राजीव फिलवक्त अडाणी पावर लिमिटेड के झारखंड प्रोजेक्ट में कॉरपोरेट कम्युनिकेशन हेड की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा- दीक्षा बिहार में हुई। मगध विश्वविद्यालय से उन्होंने वर्ष 1998 में इतिहास में स्नातक डिग्री हासिल की। इसके बाद मास कम्युनिकेशन में स्नातकोत्तर डिग्री ली। उन्हें लिखने- पढ़ने का शौक बचपन से ही था। पत्रकारिता की डिग्री लेने के बाद राजीव की लेखन प्रतिभा और हिलोरें मारने लगी। वर्ष 2000 में उन्होंने पटना से प्रकाशित राष्ट्रीय स्तर के एक हिन्दी दैनिक में बतौर संवाददाता काम शुरू किया। इस दौरान उन्होंने खोजी पत्रकारिता की। अपराध जगत की कई खबरों की तह तक जाकर उसे उजागर किया और अपनी लेखन प्रतिभा का परचम लहराया। बिहार की जेलों के हालात, बाहुबलियों की करतूतों, बिहार में बाढ़ राहत घोटाला जैसी कई खोजी खबरें व रिपोर्ट लिखकर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित की। वर्ष 2007 तक वह पटना में पत्रकारिता के क्षेत्र में परचम लहराते रहे। इस क्रम में उन्होंने पत्रकारिता पेशे की गरिमा बनाए रखा। इसके बाद राजीव दिल्ली चले गए। वहां "आज तक " न्यूज चैनल के नेशनल क्राइम ब्यूरो में नामचीन पत्रकार शम्स ताहिर खान की टीम में काम किया। वहां चर्चित आरुषि हत्याकांड, मुंबई आतंकी हमले सहित अन्य मामलों से संबंधित स्क्रिप्टिंग की। वह बताते हैं कि कतिपय व्यक्तिगत कारणों से उन्हें दिल्ली छोड़ना पड़ा। इसके बाद वह रांची आ गए। पेशे से पत्रकार रहे राजीव पत्रकारिता के क्षेत्र में ही अपना कैरियर बनाना चाहते थे। इसलिए रांची में भी उन्होंने पत्रकारिता का दामन थाम लिया। यहां भी राष्ट्रीय स्तर के एक हिन्दी दैनिक में बतौर वरीय संवाददाता काम शुरू किया। लेकिन, कहावत है "मेरे मन कछु और था, कर्ता के कछु और "। परिस्थितियों के शिकार होकर राजीव ने अखबार की नौकरी छोड़कर कॉरपोरेट सेक्टर की कंपनी ज्वाइन किया। वह अभिजीत ग्रुप के कॉरपोरेट कम्युनिकेशन विभाग के प्रभारी रहे। इस बीच उन्होंने अपनी प्रतिभा प्रदर्शित कर कंपनी को बेहतर सेवाएं दी। उनकी कार्यकुशलता और कार्यक्षमता देखकर झारखंड के पतरातू में प्लांट लगा रहे जिंदल स्टील एंड पावर ने ऑफर किया। वह जेएसपीएल के कॉरपोरेट कम्युनिकेशन विभाग का कामकाज देखने लगे। यहां भी उन्होंने बेहतरीन प्रतिभा का परिचय दिया। जेएसपीएल में कार्य के दौरान ही उन्हें अडाणी पावर से आफर मिला। इसके बाद वह जुलाई 2017 में अडाणी पावर के झारखंड परियोजना से जुड़़ गए। वर्तमान में राजीव अडाणी पावर में कॉरपोरेट कम्युनिकेशन हेड के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। उनका मानना है कि प्रतिभा का सदुपयोग करते हुए ईमानदारी व लगन से काम करें तो सफलता कदम चूमेगी। अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन और ऊर्जा का इस्तेमाल सकारात्मक और रचनात्मक कार्यों में लगाएं।

रविवार, 28 अक्टूबर 2018

बेटी के बिना परिवार अधूराः हरींद्रानंद



 ‘बेटी है तो सृजन है, बेटी है तो कल है’ विषयक संगोष्ठी

रांची। शिव शिष्य परिवार, रांची के तत्वावधान में ‘‘बेटी है तो सृजन है, बेटी है तो कल है’’ विषयक एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन ‘‘बांग्ल सांस्कृतिक परिषद’’, धुर्वा, रांची में किया गया। कालखंड के प्रथम शिव शिष्य हरीन्द्रानन्द जी ने आज के सामाजिक परिवेश के परिप्रेक्ष्य में कहा कि शिव की बनाई हुई दुनिया में हम भेदभाव क्यों करते हैं ? शिव तो स्वयं अर्धनारीश्वर हैं। हम किस दौर से गुजर रहे हैं, यह समझ से परे है। बेटियों के बिना तो परिवार ही अधूरा हो जाता है। सम्मान तो बहुत छोटी बात है, हमारा अस्तित्व ही खतरे में आ जाएगा क्योंकि यही बेटियां बड़ी होकर मां बनती हैं। हमारे गुरू शिव अपनी बनाई हुई सृष्टि में भेदभाव नहीं करते। शिव की शिश्यता ही मानवता के सुमन खिलाएगा और हमारी दुनिया, हमारा समाज सुवासित और समृद्ध होगा।
संगोष्ठी का शुभारंभ राष्ट्रगान से हुआ। आगतों का स्वागत श्री गौतम ने किया। शिव शिष्य परिवार के मुख्य सलाहकार अर्चित आनन्द ने बेटियों के सम्मान विषय पर बोलते हुए कहा कि हमारे समाज में बेटियों को बराबर का दर्जा मिले इसके लिए हम कृतसंकल्पित हैं। हमारा पूरा परिवार देश की बेटियों के साथ खड़ा है। सम्मान पाना उनका हक है। हम कुछ नया नहीं कर रहे हैं अपितु हमारी संस्कृति रही है कि बेटियों को पूजा जाता है। हाल ही में नवरात्रि में कुमारी- पूजन तथा शक्ति आराधना का पर्व समूचे देश-विदेश में बड़ी निष्ठा एवं श्रद्धा से मनाया गया है। उन्होंने कहा कि शिव शिष्यता ने समाज को जागरूक करने का प्रयास किया है। आज हमारी बेटियां बाहर निकलती हैं, पढती हैं, शिव चर्चा करती हैं।
              उपाध्यक्ष बरखा ने बेटियों को ‘‘अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी’’ के परिप्रेक्ष में कहा कि रजिया सुल्तान, रानी लक्ष्मी बाई, इंदिरा गांधी, कल्पना चावला आदि ने बेटियों को सबला प्रमाणित किया। हमें जागृत होना होगा एवं समाज को जागृत करना होगा। जागरण जब भी होगा तो जन मानस की जागृति से ही अन्यथा उदाहरण अपवाद होकर रह जायेंगे। देश में बेटियों की स्थिति पर सचिव अभिनव आनन्द ने भी अपने विचार रखे। जहां नारी की पूजा होगी, सम्मान होगा वहीं देवता विराजते हैं। निहारिका एवं अन्य लोगों ने भी अपने विचार प्रकट किये।
         संगोष्ठी में देशभर से लगभग चार हजार लोग आए थे। महिलाओं की संख्या अधिक थी।

कोडरमा की धरती से सीएम रघुवर दास का एलान





12 जनवरी तक 1 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार

नारी शक्ति का सम्मान करें, समृद्धि स्वतः आएगीगरीबी उन्मुलन से ही होगा बाल श्रम उन्मूलनबाल मित्र संयोजकों को सरकार देगी 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि10 हजार शिक्षकों को राज्य स्थापना दिवस पर सौंपेंगे नियुक्ति पत्रराज्य के मुख्यमंत्री बाल श्रम उन्मूलन के प्रति गंभीरः कैलाश सत्यार्थी


कोडरमा। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कोडरमा की धरती से कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं और युवतियों को सरकार हुनरमंद बनाना चाहती है। कौशल विकास के माध्यम से यह कार्य सुनिश्चित किया जा रहा है। 12 जनवरी तक सरकार 1 लाख लोगों को रोजगार प्रदान करेगी। 34 हजार को पूर्व में रोजगार से आच्छादित किया जा चुका है। 10 हजार शिक्षकों का चयन किया गया है, जिन्हें 15 नवंबर को नियुक्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। राज्य गठन के उपरांत 14 साल में 38 हजार स्कूलों में से मात्र 7 हजार में बेंच डेस्क की व्यवस्था थी। वर्तमान सरकार ने पूरे 38 हजार स्कूलों में बेंच डेस्क की व्यवस्था कर दी है। सभी स्कूलों को बिजली से आच्छादित किया गया है।
बाल श्रम उन्मूलन हमारा लक्ष्य
सीएम रघुवर दास ने कहा कि बाल श्रम का उन्मूलन हो, यह हमेशा से मेरा लक्ष्य रहा है। जब श्रम मंत्री के रूप में मुझे कार्य करने का अवसर मिला तो मैंने खुद कई जगह छापेमारी कर बाल श्रमिकों को मुक्त कराया था। बाल श्रम उन्मूलन हेतु राज्य सरकार ने कानून बनाया है, इस दिशा में कार्य भी होते हैं। लेकिन बाल श्रम का सबसे बड़ा कारण गरीबी है। गरीबी के उन्मूलन साथ ही बाल श्रम का भी उन्मूलन हो जाएगा। यही वजह है कि राज्य सरकार गरीबी दूर करने हेतु प्रयासरत है और काफी हद तक इसमें हमें सफलता भी प्राप्त हो रही है। हम गरीबी उन्मूलन के संकल्प के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहें हैं। हम ऐसा राज्य चाहते हैं जहां कोई बच्चा अशिक्षित ना रहे। हर बच्चे को पोषाहार मिले। उपरोक्त बातें मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कही। श्री दास कोडरमा में कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन फाउंडेशन द्वारा आयोजित अभ्रक क्षेत्रों को बाल श्रम मुक्त बनाने की पहल बनाने के प्रयास कार्यक्रम में बोल रहे थे। श्री दास ने कहा कि बाल श्रम और मानव तस्करी तभी रुकेगी जब समाज भी संवेदनशील होकर प्रयास करे। जनजातीय क्षेत्र में यह समस्या अधिक है इसलिए सरकार का ध्यान इन क्षेत्रों में अधिक है।

पूरे राज्य में हो बाल पंचायत समिति का गठन
मुख्यमंत्री ने कहा कि कैलाश सत्यार्थी जी आप पूरे राज्य में बाल पंचायत समिति का गठन करें। राज्य सरकार आपके साथ है। बाल श्रम में रोक लगे यह हमारी भी मंशा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार बाल मित्र संयोजकों को 500 रुपये प्रोत्साहन के तौर पर देगी।
मिटाकर रहेंगे पलायन का कलंक
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की बच्चियों को रोजगार दिलाने के नाम पर प्लेसमेंट एजेंसी के लोग उनका मानसिक और शारीरिक शोषण करते हैं। यह सब उन्हें राज्य से बाहर ले जाकर किया जा रहा है। इन कार्यों पर रोक लगे उस हेतु पार्लियामेंट में बिल पेश हो चुका है। मुख्यमंत्री ने राज्य के श्रम विभाग को निदेश दिया कि ऐसे सेल का गठन करें जो राज्य से बाहर हेतु श्रमिकों को ले जा रही एजेंसी का पूरा विवरण दर्ज कर सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल मजदूरी और बच्चे बच्चियों के काम हेतु पलायन के कलंक को झारखण्ड मिटा कर रहेगा।
बेटा हो या बेटी ये हमारे लिए अनमोल, नारी शक्ति का करें सम्मान

श्री रघुवर दास ने कहा कि हर बच्चे की उनका संवैधानिक अधिकार प्राप्त हो, इस दिशा में सरकार कार्य कर रही है। अभिभावक भी इस बात का ख्याल रखें कि बेटा या बेटी दोनों को समान दृष्टि से देखें। बेटी को जरूर पढ़ाये। प्रधानमंत्री जी ने नारा दिया है बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओं...राज्य सरकार ने इस कड़ी को आगे बढ़ाते हुए नारा दिया...पहले पढ़ाई फिर विदाई। क्योंकि जितना अधिक बेटी पढ़ेगी देश उतना ही विकास करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्व त्योहार व अन्य दिनों हम नारी शक्ति की पूजा करते हैं, उनके सम्मान में शीश नवाते हैं। इसलिए नारी सशक्तिकरण बेहद जरूरी है। सृष्टि की जननी का सम्मान सभी को करना चाहिए। बेटी ही या बेटा दोनों ही हमारा धन हैं। अगर एक बेटी पढ़ती है तो उसमें दो परिवारों में संस्कार का संचार करने की काबलियत होती ह
मुख्यमंत्री जी की भावना को नमनः कैलाश स्त्यार्थी
नॉबेल पुरस्कार से सम्मानित श्री कैलाश सत्यार्थी ने इस अवसर पर कहा कि झारखण्ड को एक ऐसा मुख्यमंत्री प्राप्त हुआ है जो बाल श्रम उन्मूलन को लेकर काफी गंभीर हैं। इनकी कार्यप्रणाली से 1 दिन ऐसा आएगा जब झारखंड बाल श्रम से मुक्त होगा। मुख्यमंत्री जी की इस संवेदना उनकी भावना को मेरा नमन। भगवान बिरसा की भूमि पर आकर गौरवान्वित हूं। अपने नोबेल शांति पुरस्कार के बाद पहली बार कोडरमा आया हूं कोडरमा की मिट्टी कीचड़ में मैंने समय बिताया है उसकी ताकत थी जो नोबेल पुरस्कार के मेडल के रूप में लौटी। यह सोने का मेडल आपका है, पूरे झारखंड का है। श्री सत्यार्थी ने कहा कि जब तक गांव के बच्चे को शिक्षा आजादी से आगे पढ़ने वह पेट भर जीवन जीने का अधिकार नहीं मिल जाता तब तक हमारा यह संघर्ष जारी रहेगा। कोडरमा में माईका का उत्पादन हो यह हम भी चाहते हैं लेकिन इसमें शामिल बाल मजदूरी को समाप्त करना होगा। उत्पादन प्रभावित करना हमारी मंशा नहीं है लेकिन अपराध और गैरकानूनी काम ना हो यह सुनिश्चित होना चाहिए। कोडरमा के 126 गांव में बालमित्र गांव का निर्माण हुआ है। जहां बाल मजदूरी नहीं होता है। बाल विवाह नहीं होता है। क्योंकि इस को मिटाने का संकल्प खुद बच्चे और युवाओं ने ले रखा है। सब बच्चे स्कूल जाएंगे, सब पढ़ेंगे, सब बढ़ेंगे यही हमारा उद्देश्य है। श्री सत्यार्थी ने बताया कि बाल पंचायत का परिणाम है कि जिन इलाकों में लड़कियां स्कूल नहीं जाती थी उन इलाकों में 500 से अधिक लड़कियों ने पंचायत चुनाव में भाग लिया 600 से अधिक बच्चियों ने बाल विवाह से इनकार किया। यह संभव हुआ बेटियों के अन्याय के को अस्वीकार करने से। बिरसा मुंडा की इस पावन भूमि ने उन्हें ताकत प्रदान की। हम सबको मिलकर संकल्प लेना है अगर विकास करना है तो हमें सहभागिता बनानी है हमें समन्वय में करना है और यह तय करना है कि कोई बाल मजदूरी ना हो। यह सहयोग से ही संभव है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रघुवर दास के अलावा नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी, सुमेधा सत्यार्थी, राज्य की शिक्षा मंत्री नीरा यादव, एनसीपीसीआर के प्रियांक कानूनगो, बरकट्ठा के विधायक जानकी प्रसाद यादव, बरही के विधायक मनोज यादव, श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव राजीव अरुण एक्का, श्रमायुक्त  विप्रा भाल, अध्यक्ष बाल संरक्षण आयोग, आरती कुजूर, आयुक्त उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल सुरेंद्र कुमार सिंह, जिला परिषद की अध्यक्षा शालिनी गुप्ता नगर पंचायत की अध्यक्षा कांति देवी,  पी नागरो मालाथी,  गुरुतारोण हक, कोडरमा के उपायुक्त, एसपी तथा बहुत बड़ी संख्या में बाल पंचायत के बच्चे उपस्थित थे।

शुक्रवार, 26 अक्टूबर 2018

अस्पताल के रास्ते में लापता हो गया घायल सुरेंद्र साहु


कांग्रेसी नेता की पहल पर दर्ज हुई प्राथमिकी, बंधी न्याय की आस

रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के पूर्व सचिव आदित्य विक्रम जयसवाल ने बुधवार को चुटिया वासियों के आग्रह पर चुटिया थाना पहुंचे  और पीड़िता रीता देवी से मुलाकात की तथा उनके परिवार में हुए घटना की जानकारी ली। इस दौरान पीड़िता रीता देवी ने कांग्रेस नेता  जयसवाल को बताया कि विगत कल मंगलवार को एक अज्ञात मालवाहक आॅटो ने मेरे पति सुरेन्द्र साहु (40 वर्षीय) रात्रि आठ बजे चुटिया थाना स्थित कैनरा बैंक के समीप धक्का मार दिया, इसके बाद आस-पास के पब्लिक ने घायल सुरेन्द्र साहु को उसी ऑटो में बैठाकर अस्पताल भिजवाया था, ऐसी जानकारी मुझे मिली। जिसकी शिकायत चुटिया थाना में की। हमलोगों ने भी काफी छानबीन की लेकिन कुछ पता नहीं चला। पुलिस को सूचना देने के बाद भी मेरे पति का पता नहीं चल पाया है। तमाम घटना क्रम सुनने के बाद श्री जयसवाल ने सर्वप्रथम अपनी टीम के साथ चुटिया थाना जाकर अज्ञात आॅटो चालक पर एफआईआर दर्ज कराया और पुलिस प्रशासन से अविलंब रीता देवी के पति सुरेन्द्र साहु को खोजबीन करने तथा मालवाह आॅटो नंबर जेएच 01 एडब्ल्यू 3743 के चालक पर एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

  जयसवाल ने कहा कि राजधानी रांची में अापराधिक घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही है,  पुलिस अपनी ड्यूटी जनता के हित में करें। चौक चौराहे पर कई अपराधिक घटनाएं घट रही है जिस पर कड़ी ध्यान देने की जरूरत है उन्होंने सरकार से मांग की है कि राजधानी वासियों की सुरक्षा की गारेंटी दें नहीं तो कांग्रेस पार्टी सरकार एवं प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर हो जाएगी। इस मौके पर अनिल सिंह, आसिफ जियाउल, कृष्णा सहाय , मनोज साहू,  अजय साहू , आरती देवी , सुमित्रा देवी , सावित्री देवी , फुदवा देवी आदि मौजूद थे।

मंगलवार, 23 अक्टूबर 2018

26 को देशभर में प्रदर्शित होगी झारखंड में निर्मित फीचर फिल्म गांव


* पीपली लाइव की तर्ज पर झारखंड में बनी पहली फीचर फिल्म
रांची। फीचर फिल्म निर्माण के क्षेत्र में झारखंड ने एक बड़ा कदम  बढ़ाया है। पीपली लाइव के अंदाज में एक नई फीचर फिल्म बनी है "गांव "।  पोटर्स व्हील प्रोडक्शन के बैनर तले झारखंड में बनी यह फिल्म "26 अक्टूबर को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म की शूटिंग झारखंड की इटखोरी और जमशेदपुर में हुई है। फिल्म में स्थानीय कलाकारों को भी मौका दिया गया है। यह जानकारी मंगलवार को प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में फिल्म के निदेशक गौतम सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि इस फिल्म की कथा इटखोरी (चतरा) के एक गांव से प्रेरित है और यह वास्तविक कथा पर आधारित है। यह एक मुख्य धारा की हिन्दी फिल्म है। उन्होंने बताया कि फिल्म में ग्रामीण भारत और नगरीय भारत के अंतर को दर्शाया गया है। फिल्म के कथानक में कई उपकथाओं का समावेश है, लेकिन आर्थिक उदारीकरण के नाम पर मासूम ग्रामीणों को कर्जदार बनाने, फिर उनके जमीन का दोहन करने को बड़े ही व्यवहारिक रूप से चित्रित किया गया है। फिल्म को पूरी तरह से झारखंडी परिवेश में झारखंड में ही फिल्माया गया है। उन्होंने बताया कि फिल्म में अभिनेत्री नेहा महाजन और अभिनेता में शादाब कमल, गोपाल सिंह सहित अन्य नामचीन कलाकर मुख्य भूमिका में है। उन्होंने बताया कि फिल्म का बजट कुल पांच करोड़ रूपये का है। उन्होंने यह भी बताया कि फिल्म के रिलीज होने से पहले ही इसे पांच अवार्ड मिल चुके हैं। इनमें बेस्ट फीचर फिल्म अवार्ड भी शामिल हैं।

सोमवार, 22 अक्टूबर 2018

शिक्षित समाज से होगा विकासः बिनोद कुमार



बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं वरीय अधिवक्ता

कुछ लोग महज डिग्री हासिल कर पैसे कमाने को हीं जीवन का लक्ष्य मानते है। वहीं समाज में एैसे भी लोग है जो विभिन्न क्षेत्रो में डिग्री हासिल कर उसका सदुपयोग परोपकार के लिए भी करते हैं एैसी हीं एक शख्सियत में शामिल है राजधानी के बरियातू स्थित रामेश्वरम काॅलोनी निवासी वरीय अधिवक्ता बिनोद कुमार। बिहार के औरंगाबाद जिले के अम्बा कुटुम्बा गाँव के स्थायी निवासी बिनोद कुमार की प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा उनके पैतृक गांव में ही हुई। वहीं से उन्होंने मैट्रिक पास किया। तत्पश्चात् आगे के शिक्षा के लिए रांची आ गये। यहां से इण्टरमीडिएट और ग्रेजुएशन किया। उनके घर का माहौल समाजिक, शैक्षणिक और धार्मिक था। उनके पिता स्व0 चंद्रदेव सिंह जाने माने समाजिक कार्यकत्र्ता थे। वह आजीवन अपने गांव के मुखिया रहे। वहीं उनकी माता तिलेश्वरी कुंवर धार्मिक प्रवृति की महिला हैं। समाज सेवा से भी इनका गहरा तालुक्कात रहा है। घर में समाजिक वातावरण रहनें के कारण बिनोद कुमार भी इससे प्रभावित हुए। पढ़ाई के दौरान समाज सेवा में भी जुटे रहे। स्नातक की डिग्री लेने के बाद यु.पी.एस.सी की तैयारी के लिए दिल्ली की ओर रूख किया। वहीं से लाॅ की डिग्री ली इसके बाद पटना लौट आये। पटना विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में एम.ए. किया। इस क्रम में देश के दिग्गज विधि विशेषज्ञों के संपर्क में आये और उनसे प्रेरित होकर वर्ष 2001 में पटना हाई कोर्ट में वकालत शुरू की। वर्ष 2003 तक पटना हाई कोर्ट में अधिवक्ता के रूप में काम करते रहे इसके बाद इनको पटना भी रास नहीं आया और रांची चले आये। वर्ष 2004 से झारखण्ड हाई कोर्ट में बतौर वरीय अधिवक्ता कार्यरत हैं। इन्होंने अपने पुत्र व पुत्री को इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करा कर सक्षम बनाया है। बिनोद कुमार की पत्नी नीता सिंह एक कुशल गृहणी के साथ साथ एक समाजिक कार्यकत्र्ता भी हैं वह अपने पति के समाजिक कार्यों में भी सहभागिता निभाती हैं। फिलवक्त बिनोद कुमार लाॅ फर्म ग्लोबल लीगल साॅल्युशन के संचालक हैं। वह बताते है, कि इसके माध्यम से सक्षम लोगों को कानूनी सेवाएं मुहैया कराने के अलावा गरीब तबके के लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराते हैं। अपने पेशे के प्रति समर्पण का भाव रखते हुए उनकी अभिरूचि राजनीति में भी रहीं है। इसी वजह से राजनीति में भी रूझान रहा है। नतीजतन हाल हीं में उन्होंने प्रख्यात समाजवादी नेता लोकनायक जय प्रकाश नारायण से प्रेरित होकर राष्ट्रीय राजनीतिक संगठन जय प्रकाश जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पद भार संभाला है उनका मानना है कि शिक्षित समाज और साफ सुथरे राजनीतिक संगठन से हीं देश व राज्य समृद्ध हो सकता है वह राजनीति में जय प्रकाश नारायन को अपना प्रेरणास्रोत मानते हैं वहीं शैक्षणिक योग्यताएँ हासिल करने के लिए अपने गुरू पटना विश्वविद्यालय के विख्यात शिक्षाविद लाला निखिलेश कुमार सिन्हा को श्रेय देते हैं। बिनोद कुमार का मानना है कि शिक्षित समाज से हीं देश का विकास संभव है।

श्री केडिया सभा रांची के तत्वाधान में श्री केड सती दादी मां का मंगल पाठ



रांची। श्री केडिया सभा रांची के तत्वाधान में दिनांक 21 अक्टूबर दिन रविवार को हरमू रोड स्थित दिगंबर जैन भवन गली स्थित  चंद्र प्रकाश जी केडिया, सुशीला केडिया के आवास केडिया भवन में बड़े ही धूमधाम से श्री केड  सती दादी मां का मंगल पाठ संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर रंग-बिरंगे फूलों गजरों, गुब्बारों, चुनरी, ढोल, चूड़ी एवं अन्य आकर्षक श्रृंगारों से दादी मां के दरबार को भव्य रूप से सजाया गया। इसके बाद दीप प्रज्वलित कर दादी माँ के पावन चरणों में भजनों की अमृत गंगा बहाई गई। 101 महिलाओं की ओर से सस्वर मंगल पाठ किया गया।
मंगल पाठ की शुरुआत सर्वप्रथम गणेश वंदना म्हारा प्यारा रे गजानन आइजो से हुई, फिर दादीजी के मंगल पाठ का भजन होंगे ठाठ निराले तेरे होंगे ठाठ निराले तू भी दादी का घर में मंगल पाठ करा ले, मेहंदी भजन मेहंदी राचन लागी हाथों में मुंडलजी रे नाम री,चुनड़ी भजन ल्याया थारी चुनड़ी करल्यो म स्वीकार, बधाई भजन लुट रहा लुट रहा लुट रहा है रे दादी का खजाना लूट रहा है, छप्पन भोग का भजन आओ आओ बेगा आओ है छप्पन भोग तैयार जी मधुर भजनों के साथ भक्तों ने दादी मां को रिझाया।तत्पश्चात दादी मां की महाआरती की गई। सभी भक्तों ने मिलकर दादी मां को फलों, मिठाइयों, मेवा, रबड़ी और पान का भोग लगाया। तत्पश्चात भक्तों में प्रसाद वितरण किया गया। सभी सुहागिनों को सदा सुहागन रहने का आशीर्वाद के साथ साथ एक एक उपहार भी दिया गया। सबको दादी मां की हल्दी लगाई गई। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में विशेष रूप से सभा के महामंत्री  ललित केडिया, राजकुमार केडिया, सज्जन छावछरिया, राजेंद्र केडिया, संजय केडिया, निर्मल केडिया,विजय केडिया, अरुण केडिया दिलीप केड़िया एवं सभा के सभी सदस्य ने अपने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई इसके लिए केडिया सभा अपने सभी सहयोग एवं दादी मां के भक्तों का सदा आभारी रहेगा

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...