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रविवार, 4 नवंबर 2018

स्कूल को सहयोग करने के लिए जताया आभार


* संजीवनी संस्था का शुक्रगुजार हैं डॉ. केपी डे

रांची। जगन्नाथपुर बस्ती स्थित बिरसा शिक्षा निकेतन को सामाजिक संस्था " संजीवनी " द्वारा किए गए सहयोग के लिए स्कूल के संचालक व लोकप्रिय समाजसेवी डॉ. केपी डे ने आभार जताया है। डॉ. डे ने कहा कि कुछ लोग सिर्फ काम में विश्वास करते हैं। प्रचार- प्रसार से उन्हें कोई खास मतलब नहीं रहता है। संजीवनी नामक संस्था पीड़ित मानवता की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहती है। डॉ. डे के मुताबिक संजीवनी से जुड़े समाजसेवी अनिल केडिया, राजेश चौधरी, आनंद खेमका, राजकुमार अग्रवाल, प्रवीण सहित अन्य सदस्यों का अद्भुत सहयोग स्कूल को मिलता रहा है। उन्होंने बताया कि स्कूल के बच्चों को अंग्रेजी सिखाने के लिए पांच साल तक दो शिक्षकों को वेतन संजीवनी संस्था की ओर से दिया गया। बच्चों को कंप्यूटर प्रशिक्षण कार्यक्रम से जोड़ने के लिए स्कूल में दानस्वरूप कंप्यूटर दिया गया। डॉ. डे ने बताया कि स्कूल के शिक्षक व छात्र संजीवनी व इससे जुड़े समाजसेवियों का शुक्रगुजार हैं, जिनके सहयोग से छात्र लाभान्वित हो रहे हैं। संजीवनी से सचमुच छात्रों को संजीवनी मिल रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि " नेकी कर, दरिया में डाल " की तर्ज पर संजीवनी से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता प्रचार - प्रसार से दूर रहते हैं। संस्था हाशिए पर रहने को विवश समाज के कमजोर वर्ग के लोगों को सहयोग कर पीड़ित मानवता की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। डॉ. डे ने कहा कि बिरसा शिक्षा निकेतन के छात्र व शिक्षक संजीवनी के प्रति सदैव आभारी रहेंगे।

गुरुवार, 1 नवंबर 2018

स्लम एरिया में शिक्षा का अलख जगा रहे डॉ.केपी डे


* रामकृष्ण मिशन व अन्य संस्थाओं का मिल रहा सहयोग।
रांची। कुछ लोग अपने जीवन में परोपकार को सर्वोपरि मानते हैं। समाजसेवा में जीवन समर्पित कर देते हैं। इसके पीछे उनका कोई स्वार्थ नहीं होता। ऐसे ही एक शख्स हैं एच ई सी परिसर स्थित जगन्नाथपुर झोपड़ी (स्लम एरिया)क्षेत्र के निवासी डॉ.केपी डे। डॉ.डे वर्ष 1982 में पश्चिम बंगाल के वर्दमान जिला से रांची आए। जगन्नाथपुर क्षेत्र के योगदा सत्संग महाविद्यालय से होमियोपैथी चिकित्सा की डिग्री ली। इसके बाद उसी क्षेत्र में होमियोपैथिक चिकित्सा पद्धति से मरीजों का इलाज करने लगे। कुछ दिनों तक यह सिलसिला चलता रहा। डॉ. साहब की ख्याति उनकी व्यवहारकुशलता और बेहतर इलाज के कारण बढ़ने लगी। जगन्नाथपुर क्षेत्र मे अधिकतर गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोग रहते हैं। स्लम एरिया है। आदिवासी और पिछड़े तबके के लोग अधिक हैं। डॉ. डे ने अत्यंत पिछड़े व गरीबों का इलाज नि:शुल्क करना शुरू किया। इससे उनकी लोकप्रियता बढ़ने लगी। चिकित्सा के क्षेत्र में उनकी सेवा और गरीबों के प्रति उनके दयाभाव की चर्चा चहुंओर होने लगी। इस दौरान उन्होंने देखा कि स्लम एरिया में शिक्षा का अभाव है। बच्चों के अभिभावकों को भी अपने बच्चों को पढ़ाई की तनिक भी चिंता नहीं है। बच्चों के मां-बाप नशापान के आदि हैं। पूरे क्षेत्र में हड़िया-दारू की संस्कृति हावी है। इससे आदिवासी और अन्य पिछड़े समुदाय के लोगों का विकास बाधित हो रहा है। शिक्षा के प्रति जागरूकता नहीं है।
 यह सब देखकर उनके मन में इस क्षेत्र के बच्चों को शिक्षित करने की इच्छा जगी। उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र की सेवाएं अपने सहयोगी मित्रों के हवाले कर बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया। इस क्रम में वर्ष 1992 में जगन्नाथपुर के स्लम एरिया में स्थित एक छोटे से कमरे में बिरसा शिक्षा निकेतन नामक स्कूल की शुरुआत की। शुरुआती दौर में उन्हें अभिभावकों के विरोध का भी सामना करना पड़ा। डॉ. डे सुबह उठकर बच्चों को घर से बुलाकर स्कूल लाया करते, जबकि बच्चों के अभिभावक (माता पिता) नशा का सेवन कर घरों में सोये रहते थे।  डॉ. डे ने नशाखोरी के विरुद्ध भी अभियान  शुरु किया। नशा मुक्त समाज की परिकल्पना के साथ स्लम एरिया में जागरूकता फैलाने लगे। शुरू में तो उन्हें काफी विरोध और ताने का सामना करना पड़ा। लेकिन इससे बेपरवाह वह अपने मुहिम में लगे रहे। धीरे धीरे उनका प्रयास रंग लाने लगा। क्षेत्र में हड़िया-दारू की संस्कृति पर काफी हद तक  लगाम लगा। नशा पान के विरोध में भी लोग जागरूक हो रहे हैं। बिरसा शिक्षा निकेतन में वर्तमान में लगभग सात सौ बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को संस्कार युक्त शिक्षा देने में डॉ. डे प्रयासरत हैं। स्कूल की प्राचार्या रीता संध्या टोप्पो व अन्य शिक्षक काफी परिश्रमी हैं। उनकी लगन व परिश्रम से स्कूल के बच्चे शिक्षित हो रहे हैं। इस स्कूल से पढ़कर निकले कई बच्चे रांची के प्रतिष्ठित स्कूलों में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं। आज हर वर्ग के बीच डॉ. डे के इस प्रयास की सराहना की जाती है। स्कूल का संचालन सामान्य शुल्क और सामाजिक सहयोग से होता है। डॉ. डे बताते हैं कि समय समय पर रामकृष्ण मिशन, सार्वजनिक उपक्रम सेल, मेकॉन,भारतीय स्टेट बैंक, हटिया शाखा, लायंस क्लब, रोटरी क्लब मिडटाउन, एच ई सी व एच ई सी महिला समिति सहित अन्य संस्थाओं की ओर से स्कूल को संसाधनों से लैस करने में सहयोग किया जाता है। वह बताते हैं कि शिक्षा के बिना समाज का विकास संभव नहीं है। बच्चे देश का भविष्य हैं। उन्हें शिक्षित होना जरूरी है। इस दिशा में सरकारी व गैर सरकारी दोनों स्तर पर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। इसके अलावा नशा मुक्त समाज का होना भी जरूरी है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि लोगों को सादा जीवन और उच्च विचार के सिद्धांत को अपनाने की आवश्यकता है। इससे समाज और राष्ट्र सशक्त होगा।

हैदर मोबाइल वर्ल्ड का शुभारंभ


* मोबाइल मरम्मत पर 50 प्रतिशत की छूट

रांची। नामी-गिरामी ब्रांडेड कंपनियों के मोबाइल हैंडसेट का प्रतिष्ठान हैदर मोबाइल वर्ल्ड का शुभारंभ गुरुवार को किया गया। प्रतिष्ठान का उद्घाटन आइपीएस अधिकारी रंजीत प्रसाद ने किया।   शहर के मेनरोड स्थित उर्दू लाइब्रेरी के निकट (अंजुमन प्लाजा कॉम्पलेक्स के सामने) खोले गए हैदर मोबाइल वर्ल्ड में देश की लगभग सभी ब्रांडेड कंपनियों के मोबाइल उपलब्ध होंगे। इस संबंध में प्रतिष्ठान के व्यवस्थापक अनीश हैदर ने बताया कि यहां ग्राहकों के लिए एक हजार से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक के मोबाइल उपलब्ध कराए गए हैं। इसमें आई फोन, सैमसंग, वीवो, ओप्पो, एम आई, रियल मी, वन प्लस सहित अन्य कंपनियों के मोबाइल शामिल हैं। अनीश हैदर ने बताया कि यहां मोबाइल मरम्मत के लिए  अत्याधुनिक तकनीकी युक्त मशीन लगाया गया है। हर प्रकार के मोबाइल मरम्मत की सुविधा यहां उपलब्ध होगी। झारखंड में पहली बार मोबाइल मरम्मत के लिए अत्याधुनिक मशीन स्थापित किया गया है। ग्राहकों को मोबाइल मरम्मत कराने के लिए अब अधिक समय तक इंतजार नहीं करना होगा। मोबाइल मरम्मत पर 50 प्रतिशत की छूट की सुविधा दी जाएगी। इस अवसर पर मो. जमील अहमद, सैयद नफीस हैदर, सैयद शादाब हैदर, सैयद हसीब हैदर, नौशाद खान, डॉ. असलम परवेज , सैयद फसीह अहमद, एस एम खुर्शीद, प्रो.(डॉ. ) मसूद जामी, मुफ्ती अब्दुल्ला अजहर, परवेज हसन, डॉ. मजीद आलम डॉ. होदा, सैयद नेहाल अहमद, हाजी उमर,खुर्शीद हसन रूमी सहित रांची और इसके आसपास के गणमान्य लोग मौजूद थे।

ग्लैम सुपर मॉडल इंडिया 2018 के ग्रैंड फिनाले के विजेता बने सागर कश्यप एवं इतरा राजपूत



रांची। करीब एक साल से देश भर के विभिन्न राज्यों के मॉडल सेलक्षन को चल रही प्रतियोगिता ग्लैम सुपर मॉडल इंडिया 2018 का ग्रांड फिनाले  आज कोलकत्ता में सम्पन्न हुआ। जिसमें भारत के अनेक राज्यों से प्रतिभागियों ने भाग लिया। बिहार के सागर कश्यप एवं इतरा राजपूत ग्लैम सुपर मॉडल इंडिया 2018 के रूप में चुना गया। मालूम हो कि 10 जून को रांची में भी ऑडिशन सम्पन्न हुआ था जिसमें करीब 50 युवा-युवतियों ने भाग लिया था।
वहीं प्रथम रनर अप  यश राज एवं रिमा शर्मा  बनी। द्वितीय रनर अप आदिल शान और  आशका रायचन्द (कोलकत्ता) को घोषित किया गया। साथ ही बेस्ट स्टाइल का अवार्ड मुम्बई की राखी परमार को मिला। बेस्ट वाक का अवार्ड सागर कश्यप एवं दिल्ली की वर्षा राठौर को मिला। बेस्ट टैलंेंट का अवार्ड भागलपुर के उत्तम कुमार को मिला। बेस्ट स्माइल का अवार्ड आशंका रायचन्द्र जबकि बेस्ट पर्सनालिटी का अवार्ड पटना के समीर सिंह को मिला। बेस्ट फिजिक का अवार्ड आदिल शान को मिला। वोटिंग द्वारा (सोशल मीडिया) पोपुलर का अवार्ड ़ऋषभ सेठ एवं मिस पोपुलर का अवार्ड  रिमा शर्मा  को मिला। बेस्ट स्कीन अवार्ड  अंजलि अपूर्वा को मिला। इस शॉ के जज शोभोमिता (इंडिया टॉप मॉडल एंड फिल्म एक्ट्रेस), पुपुल भुइआन (वॉलीवुड एक्ट्रेस एंड ओपेरो मिसेज इंडिया ग्लोबल 2018), जफर आर्यन (एमडी, फिंच इंटरटेनमेन्ट), प्रशांत कुमार  फैषन डिजाइनर एवं सुशील कुमार थे। शॉ को कोरियाग्राक एवं डायरेक्ट केरल के शैम खान ने किया। इस प्रतियोगिता का आयोजन फिंच इंटरटेनमेन्ट द्वारा किया गया।
फिंच इंटरटेनमेन्ट की ओर से आयोजित इस प्रतियोगिता के संबंध में प्रबंध निदेषक जफर आर्यन ने बताया कि मॉडल हंट का यह प्रोग्राम देश भर में काफी सफल रहा और पहली बार पटना के युवाओं ने देशस्तरीय प्रतियोगिता का सफल आयोजन कर प्रतिभागियों को एक बड़ा प्लेटफार्म प्रदान किया है। भविष्य में भी इस प्रकार के अन्य कार्यक्रम  आयोजित किए जायेंगे ताकि मॉडलिंग के क्षेत्र में कैरियर की चाहत रखने वाले युवा-युवतियों को सही राह और उचित मंच मिल सके। मि0 आर्यन ने सफल आयोजन के लिए प्रतिभागियों के साथ साथ स्पांसर के समर्थन को भी धन्यवाद दिया।

बुधवार, 31 अक्टूबर 2018

प्रतिभा को किसी सहारे की जरूरत नहीं पड़ती



* बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं राजीव किशोर 

कहते हैं प्रतिभा छिपाए नहीं छिपती। प्रतिभावान लोग अपने मेहनत और ईमानदारी के बलबूते सफलता की सीढ़ियां खुद-ब-खुद चढ़ते हैं। उन्हें किसी के सहारे की जरूरत नहीं होती है। ऐसे व्यक्ति जिस क्षेत्र में रहते हैं, अपनी प्रतिभा का परचम लहराते रहते हैं। इसकी मिसाल हैं राजधानी रांची निवासी बहुमुखी प्रतिभा के धनी राजीव किशोर। राजीव फिलवक्त अडाणी पावर लिमिटेड के झारखंड प्रोजेक्ट में कॉरपोरेट कम्युनिकेशन हेड की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा- दीक्षा बिहार में हुई। मगध विश्वविद्यालय से उन्होंने वर्ष 1998 में इतिहास में स्नातक डिग्री हासिल की। इसके बाद मास कम्युनिकेशन में स्नातकोत्तर डिग्री ली। उन्हें लिखने- पढ़ने का शौक बचपन से ही था। पत्रकारिता की डिग्री लेने के बाद राजीव की लेखन प्रतिभा और हिलोरें मारने लगी। वर्ष 2000 में उन्होंने पटना से प्रकाशित राष्ट्रीय स्तर के एक हिन्दी दैनिक में बतौर संवाददाता काम शुरू किया। इस दौरान उन्होंने खोजी पत्रकारिता की। अपराध जगत की कई खबरों की तह तक जाकर उसे उजागर किया और अपनी लेखन प्रतिभा का परचम लहराया। बिहार की जेलों के हालात, बाहुबलियों की करतूतों, बिहार में बाढ़ राहत घोटाला जैसी कई खोजी खबरें व रिपोर्ट लिखकर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित की। वर्ष 2007 तक वह पटना में पत्रकारिता के क्षेत्र में परचम लहराते रहे। इस क्रम में उन्होंने पत्रकारिता पेशे की गरिमा बनाए रखा। इसके बाद राजीव दिल्ली चले गए। वहां "आज तक " न्यूज चैनल के नेशनल क्राइम ब्यूरो में नामचीन पत्रकार शम्स ताहिर खान की टीम में काम किया। वहां चर्चित आरुषि हत्याकांड, मुंबई आतंकी हमले सहित अन्य मामलों से संबंधित स्क्रिप्टिंग की। वह बताते हैं कि कतिपय व्यक्तिगत कारणों से उन्हें दिल्ली छोड़ना पड़ा। इसके बाद वह रांची आ गए। पेशे से पत्रकार रहे राजीव पत्रकारिता के क्षेत्र में ही अपना कैरियर बनाना चाहते थे। इसलिए रांची में भी उन्होंने पत्रकारिता का दामन थाम लिया। यहां भी राष्ट्रीय स्तर के एक हिन्दी दैनिक में बतौर वरीय संवाददाता काम शुरू किया। लेकिन, कहावत है "मेरे मन कछु और था, कर्ता के कछु और "। परिस्थितियों के शिकार होकर राजीव ने अखबार की नौकरी छोड़कर कॉरपोरेट सेक्टर की कंपनी ज्वाइन किया। वह अभिजीत ग्रुप के कॉरपोरेट कम्युनिकेशन विभाग के प्रभारी रहे। इस बीच उन्होंने अपनी प्रतिभा प्रदर्शित कर कंपनी को बेहतर सेवाएं दी। उनकी कार्यकुशलता और कार्यक्षमता देखकर झारखंड के पतरातू में प्लांट लगा रहे जिंदल स्टील एंड पावर ने ऑफर किया। वह जेएसपीएल के कॉरपोरेट कम्युनिकेशन विभाग का कामकाज देखने लगे। यहां भी उन्होंने बेहतरीन प्रतिभा का परिचय दिया। जेएसपीएल में कार्य के दौरान ही उन्हें अडाणी पावर से आफर मिला। इसके बाद वह जुलाई 2017 में अडाणी पावर के झारखंड परियोजना से जुड़़ गए। वर्तमान में राजीव अडाणी पावर में कॉरपोरेट कम्युनिकेशन हेड के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। उनका मानना है कि प्रतिभा का सदुपयोग करते हुए ईमानदारी व लगन से काम करें तो सफलता कदम चूमेगी। अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन और ऊर्जा का इस्तेमाल सकारात्मक और रचनात्मक कार्यों में लगाएं।

रविवार, 28 अक्टूबर 2018

बेटी के बिना परिवार अधूराः हरींद्रानंद



 ‘बेटी है तो सृजन है, बेटी है तो कल है’ विषयक संगोष्ठी

रांची। शिव शिष्य परिवार, रांची के तत्वावधान में ‘‘बेटी है तो सृजन है, बेटी है तो कल है’’ विषयक एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन ‘‘बांग्ल सांस्कृतिक परिषद’’, धुर्वा, रांची में किया गया। कालखंड के प्रथम शिव शिष्य हरीन्द्रानन्द जी ने आज के सामाजिक परिवेश के परिप्रेक्ष्य में कहा कि शिव की बनाई हुई दुनिया में हम भेदभाव क्यों करते हैं ? शिव तो स्वयं अर्धनारीश्वर हैं। हम किस दौर से गुजर रहे हैं, यह समझ से परे है। बेटियों के बिना तो परिवार ही अधूरा हो जाता है। सम्मान तो बहुत छोटी बात है, हमारा अस्तित्व ही खतरे में आ जाएगा क्योंकि यही बेटियां बड़ी होकर मां बनती हैं। हमारे गुरू शिव अपनी बनाई हुई सृष्टि में भेदभाव नहीं करते। शिव की शिश्यता ही मानवता के सुमन खिलाएगा और हमारी दुनिया, हमारा समाज सुवासित और समृद्ध होगा।
संगोष्ठी का शुभारंभ राष्ट्रगान से हुआ। आगतों का स्वागत श्री गौतम ने किया। शिव शिष्य परिवार के मुख्य सलाहकार अर्चित आनन्द ने बेटियों के सम्मान विषय पर बोलते हुए कहा कि हमारे समाज में बेटियों को बराबर का दर्जा मिले इसके लिए हम कृतसंकल्पित हैं। हमारा पूरा परिवार देश की बेटियों के साथ खड़ा है। सम्मान पाना उनका हक है। हम कुछ नया नहीं कर रहे हैं अपितु हमारी संस्कृति रही है कि बेटियों को पूजा जाता है। हाल ही में नवरात्रि में कुमारी- पूजन तथा शक्ति आराधना का पर्व समूचे देश-विदेश में बड़ी निष्ठा एवं श्रद्धा से मनाया गया है। उन्होंने कहा कि शिव शिष्यता ने समाज को जागरूक करने का प्रयास किया है। आज हमारी बेटियां बाहर निकलती हैं, पढती हैं, शिव चर्चा करती हैं।
              उपाध्यक्ष बरखा ने बेटियों को ‘‘अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी’’ के परिप्रेक्ष में कहा कि रजिया सुल्तान, रानी लक्ष्मी बाई, इंदिरा गांधी, कल्पना चावला आदि ने बेटियों को सबला प्रमाणित किया। हमें जागृत होना होगा एवं समाज को जागृत करना होगा। जागरण जब भी होगा तो जन मानस की जागृति से ही अन्यथा उदाहरण अपवाद होकर रह जायेंगे। देश में बेटियों की स्थिति पर सचिव अभिनव आनन्द ने भी अपने विचार रखे। जहां नारी की पूजा होगी, सम्मान होगा वहीं देवता विराजते हैं। निहारिका एवं अन्य लोगों ने भी अपने विचार प्रकट किये।
         संगोष्ठी में देशभर से लगभग चार हजार लोग आए थे। महिलाओं की संख्या अधिक थी।

कोडरमा की धरती से सीएम रघुवर दास का एलान





12 जनवरी तक 1 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार

नारी शक्ति का सम्मान करें, समृद्धि स्वतः आएगीगरीबी उन्मुलन से ही होगा बाल श्रम उन्मूलनबाल मित्र संयोजकों को सरकार देगी 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि10 हजार शिक्षकों को राज्य स्थापना दिवस पर सौंपेंगे नियुक्ति पत्रराज्य के मुख्यमंत्री बाल श्रम उन्मूलन के प्रति गंभीरः कैलाश सत्यार्थी


कोडरमा। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कोडरमा की धरती से कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं और युवतियों को सरकार हुनरमंद बनाना चाहती है। कौशल विकास के माध्यम से यह कार्य सुनिश्चित किया जा रहा है। 12 जनवरी तक सरकार 1 लाख लोगों को रोजगार प्रदान करेगी। 34 हजार को पूर्व में रोजगार से आच्छादित किया जा चुका है। 10 हजार शिक्षकों का चयन किया गया है, जिन्हें 15 नवंबर को नियुक्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। राज्य गठन के उपरांत 14 साल में 38 हजार स्कूलों में से मात्र 7 हजार में बेंच डेस्क की व्यवस्था थी। वर्तमान सरकार ने पूरे 38 हजार स्कूलों में बेंच डेस्क की व्यवस्था कर दी है। सभी स्कूलों को बिजली से आच्छादित किया गया है।
बाल श्रम उन्मूलन हमारा लक्ष्य
सीएम रघुवर दास ने कहा कि बाल श्रम का उन्मूलन हो, यह हमेशा से मेरा लक्ष्य रहा है। जब श्रम मंत्री के रूप में मुझे कार्य करने का अवसर मिला तो मैंने खुद कई जगह छापेमारी कर बाल श्रमिकों को मुक्त कराया था। बाल श्रम उन्मूलन हेतु राज्य सरकार ने कानून बनाया है, इस दिशा में कार्य भी होते हैं। लेकिन बाल श्रम का सबसे बड़ा कारण गरीबी है। गरीबी के उन्मूलन साथ ही बाल श्रम का भी उन्मूलन हो जाएगा। यही वजह है कि राज्य सरकार गरीबी दूर करने हेतु प्रयासरत है और काफी हद तक इसमें हमें सफलता भी प्राप्त हो रही है। हम गरीबी उन्मूलन के संकल्प के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहें हैं। हम ऐसा राज्य चाहते हैं जहां कोई बच्चा अशिक्षित ना रहे। हर बच्चे को पोषाहार मिले। उपरोक्त बातें मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कही। श्री दास कोडरमा में कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन फाउंडेशन द्वारा आयोजित अभ्रक क्षेत्रों को बाल श्रम मुक्त बनाने की पहल बनाने के प्रयास कार्यक्रम में बोल रहे थे। श्री दास ने कहा कि बाल श्रम और मानव तस्करी तभी रुकेगी जब समाज भी संवेदनशील होकर प्रयास करे। जनजातीय क्षेत्र में यह समस्या अधिक है इसलिए सरकार का ध्यान इन क्षेत्रों में अधिक है।

पूरे राज्य में हो बाल पंचायत समिति का गठन
मुख्यमंत्री ने कहा कि कैलाश सत्यार्थी जी आप पूरे राज्य में बाल पंचायत समिति का गठन करें। राज्य सरकार आपके साथ है। बाल श्रम में रोक लगे यह हमारी भी मंशा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार बाल मित्र संयोजकों को 500 रुपये प्रोत्साहन के तौर पर देगी।
मिटाकर रहेंगे पलायन का कलंक
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की बच्चियों को रोजगार दिलाने के नाम पर प्लेसमेंट एजेंसी के लोग उनका मानसिक और शारीरिक शोषण करते हैं। यह सब उन्हें राज्य से बाहर ले जाकर किया जा रहा है। इन कार्यों पर रोक लगे उस हेतु पार्लियामेंट में बिल पेश हो चुका है। मुख्यमंत्री ने राज्य के श्रम विभाग को निदेश दिया कि ऐसे सेल का गठन करें जो राज्य से बाहर हेतु श्रमिकों को ले जा रही एजेंसी का पूरा विवरण दर्ज कर सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल मजदूरी और बच्चे बच्चियों के काम हेतु पलायन के कलंक को झारखण्ड मिटा कर रहेगा।
बेटा हो या बेटी ये हमारे लिए अनमोल, नारी शक्ति का करें सम्मान

श्री रघुवर दास ने कहा कि हर बच्चे की उनका संवैधानिक अधिकार प्राप्त हो, इस दिशा में सरकार कार्य कर रही है। अभिभावक भी इस बात का ख्याल रखें कि बेटा या बेटी दोनों को समान दृष्टि से देखें। बेटी को जरूर पढ़ाये। प्रधानमंत्री जी ने नारा दिया है बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओं...राज्य सरकार ने इस कड़ी को आगे बढ़ाते हुए नारा दिया...पहले पढ़ाई फिर विदाई। क्योंकि जितना अधिक बेटी पढ़ेगी देश उतना ही विकास करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्व त्योहार व अन्य दिनों हम नारी शक्ति की पूजा करते हैं, उनके सम्मान में शीश नवाते हैं। इसलिए नारी सशक्तिकरण बेहद जरूरी है। सृष्टि की जननी का सम्मान सभी को करना चाहिए। बेटी ही या बेटा दोनों ही हमारा धन हैं। अगर एक बेटी पढ़ती है तो उसमें दो परिवारों में संस्कार का संचार करने की काबलियत होती ह
मुख्यमंत्री जी की भावना को नमनः कैलाश स्त्यार्थी
नॉबेल पुरस्कार से सम्मानित श्री कैलाश सत्यार्थी ने इस अवसर पर कहा कि झारखण्ड को एक ऐसा मुख्यमंत्री प्राप्त हुआ है जो बाल श्रम उन्मूलन को लेकर काफी गंभीर हैं। इनकी कार्यप्रणाली से 1 दिन ऐसा आएगा जब झारखंड बाल श्रम से मुक्त होगा। मुख्यमंत्री जी की इस संवेदना उनकी भावना को मेरा नमन। भगवान बिरसा की भूमि पर आकर गौरवान्वित हूं। अपने नोबेल शांति पुरस्कार के बाद पहली बार कोडरमा आया हूं कोडरमा की मिट्टी कीचड़ में मैंने समय बिताया है उसकी ताकत थी जो नोबेल पुरस्कार के मेडल के रूप में लौटी। यह सोने का मेडल आपका है, पूरे झारखंड का है। श्री सत्यार्थी ने कहा कि जब तक गांव के बच्चे को शिक्षा आजादी से आगे पढ़ने वह पेट भर जीवन जीने का अधिकार नहीं मिल जाता तब तक हमारा यह संघर्ष जारी रहेगा। कोडरमा में माईका का उत्पादन हो यह हम भी चाहते हैं लेकिन इसमें शामिल बाल मजदूरी को समाप्त करना होगा। उत्पादन प्रभावित करना हमारी मंशा नहीं है लेकिन अपराध और गैरकानूनी काम ना हो यह सुनिश्चित होना चाहिए। कोडरमा के 126 गांव में बालमित्र गांव का निर्माण हुआ है। जहां बाल मजदूरी नहीं होता है। बाल विवाह नहीं होता है। क्योंकि इस को मिटाने का संकल्प खुद बच्चे और युवाओं ने ले रखा है। सब बच्चे स्कूल जाएंगे, सब पढ़ेंगे, सब बढ़ेंगे यही हमारा उद्देश्य है। श्री सत्यार्थी ने बताया कि बाल पंचायत का परिणाम है कि जिन इलाकों में लड़कियां स्कूल नहीं जाती थी उन इलाकों में 500 से अधिक लड़कियों ने पंचायत चुनाव में भाग लिया 600 से अधिक बच्चियों ने बाल विवाह से इनकार किया। यह संभव हुआ बेटियों के अन्याय के को अस्वीकार करने से। बिरसा मुंडा की इस पावन भूमि ने उन्हें ताकत प्रदान की। हम सबको मिलकर संकल्प लेना है अगर विकास करना है तो हमें सहभागिता बनानी है हमें समन्वय में करना है और यह तय करना है कि कोई बाल मजदूरी ना हो। यह सहयोग से ही संभव है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रघुवर दास के अलावा नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी, सुमेधा सत्यार्थी, राज्य की शिक्षा मंत्री नीरा यादव, एनसीपीसीआर के प्रियांक कानूनगो, बरकट्ठा के विधायक जानकी प्रसाद यादव, बरही के विधायक मनोज यादव, श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव राजीव अरुण एक्का, श्रमायुक्त  विप्रा भाल, अध्यक्ष बाल संरक्षण आयोग, आरती कुजूर, आयुक्त उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल सुरेंद्र कुमार सिंह, जिला परिषद की अध्यक्षा शालिनी गुप्ता नगर पंचायत की अध्यक्षा कांति देवी,  पी नागरो मालाथी,  गुरुतारोण हक, कोडरमा के उपायुक्त, एसपी तथा बहुत बड़ी संख्या में बाल पंचायत के बच्चे उपस्थित थे।

स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...