यह ब्लॉग खोजें

सोमवार, 16 सितंबर 2019

युवा दस्ता की कमेटी गठित

रांची। दुर्गा पूजा, छठ पूजा एवं दीपावली काली पूजा को लेकर युवा दस्ता की कमिटी गठित की गई। युवा दस्ता के संस्थापक चुन्नू मिश्रा, मौलेश सिंह एवं डॉ राजेश गुप्ता छोटू की अध्यक्षता में औद्योगिक युवा दस्ता के अध्यक्ष इंदरजीत सिंह को निर्वाचित किया गया।  मुख्यथिति में कोतवाली रांची डी.एस.पी अजीत कुमार विमल एवं रांची सहर के विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग मौजूद थे।
युवा दस्ता के चुन्नू मिश्र, मौलेश सिंह एवं राजेश गुप्ता छोटू जी सभी निर्वाचित पदाधिकारी को माला पहना कर स्वागत किया।
मौके पर डी.एस.पी साहब ने युवाओं को दिशा निर्देश दिए एवम उनकी जिम्मेवारी को बताया। इंदरजीत सिंह ने कहा कि उनके औधोगिक छेत्र में 52 पूजा पंडाल है, हर जगह युवा दस्ता की टीम 24 घंटे सेवा देगी। अभी तक 104 लोगों ने युवा दस्ता की सदस्य्ता ले ली है। पूजा के समय युवा दस्ता की अहम भूमिका रहती है। आम जनता की सेवा के लिए युवा दस्ता हमेसा तैयार रहता।
धन्यवाद ज्ञापन युवा दस्ता के सक्रिय सदस्य  संदीप जी ने किया।
समिति इस प्रकार है।
औधोगिक
 अध्यक्ष-  इंदरजीत सिंह
उपाध्यक्ष-  प्रिंस झा,सोमनाथ बाउरी, आकाश रजवार, अप्पू वेद प्रकाश

महामंत्री- अभिलेख सिंह, प्रणव सिंह, अनीश राज, मन्नू सिंह, रंजन कुमार,


हटिया प्रभारी- आकाश कुमार, आदित्य शर्मा

हिनू प्रभारी- चंदन सिंह

सेक्टर 2- रवि सिंह, नीतीश कुमार

 कार्यक्रम प्रभारी- आनंद शंकर मुणडा, कातिक  राम, अंभय सिंह

, टिकू झा (कोकर) ,

 शजेश कुमार राम (काके)

 कोशल कुमार सोनी (अपर बाजार )

अभिषेक कु (लोवाडीह)

 मनीष कुमार साहु (बड़ागाई)

 गौरव कु (किशोर गंज)

 अमित सोनी/ अयुष कु  ( रातु रोड) 

मोही कु (रातु रोड ) ,
 अजय कु शामा (चुटीया) , मो रोकी (बड़ा तालाब) ,

 सत्यजीत गोइन / अभिनव / संदीप रजक    (मेन रोड),

 गामीण क्षेत्र -महेश महतो एवं मदन कुमार-
 मनीष कुमार केसारी (पिसकानगड़ी),

दिपक कुमार तिवारी( रातु),

 पशुपति नाथ शाहदेव (ठाकुर गाॅव),

रविवार, 15 सितंबर 2019

संजीवन हास्पीटल ने की विदेशी छात्रों के प्रशिक्षण की पहल


* चीन,रूस,किर्गिस्तान, बांग्लादेश के मेडिकल छात्रों के लिए एफएमजीई प्रशिक्षण


कोलकाता। पश्चिम बंगाल के सबसे बड़े और सबसे प्रतिष्ठित स्वास्थ्य ज्ञान प्रबंधन के अस्पतालों में से एक, फुलेश्वर स्थित संजीबन हॉस्पीटल ने चीन, रूस, किर्गिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले मेडिकल छात्रों के एक बड़े समूह को फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एग्जामिनेशन (एफएमजीई) प्रशिक्षण देने की अपनी नई पहल की घोषणा की। अभी हाल ही में कुछ समय से संजीबन हॉस्पिटल चिकित्सा अध्ययन, पैरामेडिकल प्रशिक्षण और नर्सिंग के क्षेत्र में प्रमुख भूमिका निभा रहा है।
संजीबन हॉस्पिटल ने लिंकन यूनिवर्सिटी कॉलेज (एलयूसी), मलेशिया के साथ भी एक करार किया है, जिसके अंतर्गत संजीबन हॉस्पिटल डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (एमडी) कोर्स का संचालन करेगा, जो भारत के एमबीबीएस डिग्री के समकक्ष है। संजीबन में छात्रों को विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। लिंकन यूनिवर्सिटी कॉलेज एक क्यूएस विश्व रैंकिंग वाला विश्वविद्यालय है।
सर्वेक्षण के अनुसार, जनसंख्या की दृष्टि से भारत में डॉक्टरों की संख्या बहुत कम है। 2030 तक नागरिकों की सेवा के लिए देश को कम से कम 20 लाख डॉक्टरों की आवश्यकता होगी। प्रत्येक वर्ष भारत से लगभग 10,000 छात्र मेडिकल डिग्री के लिए विदेश में अध्ययन करना चयन करते हैं। वे अपनी वापसी के बाद चिकित्सा कार्यबल में महत्वपूर्ण रूप से वृद्धि कर सकते हैं। लेकिन उन्हें भारत में प्रैक्टिसस करने की अनुमति हासिल करने के लिए, पहले नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (एनबीई) द्वारा संचालित एफएमजीई में क्वालिफाई करना होता है।
छात्रों और डॉक्टरों को प्रशिक्षण देने के लिए संजीबन हॉस्पिटल ने एफएमजीई कोचिंग के एक अग्रणी संस्थान, अराइज मेडिकल एकेडमी, हैदराबाद से अनुबंध किया है। सिद्धांत और नैदानिक कौशल का यह 10-दिवसीय आवासीय पाठ्यक्रम छात्रों को आवश्यक ज्ञान और कौशल के साथ उत्कृष्ट डॉक्टर बनने में मदद करेगा।
संजीबन हॉस्पि्टल के निदेशक डॉ. सुभाशीष मित्रा ने बताया कि “छात्र अपनी प्रशिक्षण अवधि के दौरान हॉस्पिटल के अधिकारियों द्वारा प्रदान की गई सभी सुविधाओं से प्रसन्नन एवं संतुष्टै थे। प्रशिक्षुओं के मामले में, संजीबन हाॅस्पिटल इस क्षेत्र में व्यावहारिक ज्ञान का अनुभव करने के लिए एक आदर्श स्थान बन गया है। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य मेडिकल छात्रों के लिए बिल्कुुल नया मंच प्रदान करके उच्च-गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य शिक्षा प्रणाली का निर्माण करना है।

महिला समर्पण ने किया डी क्लब का आयोजन


रांची। मारवाड़ी युवा मंच महिला समर्पण शाखा हर महीने के रविवार के भांति इस बार भी मोराबादी बापू वाटिका के समीप डी क्लब का आयोजन किया  |
जहां पर सुबह आने वाले राहगीरों की बीपी चेक, शुगर चेक,  वजन जांच की जाती है एवं उचित सलाह भी दी जाती है, वह भी निःशुल्क |
आज के इस व्यस्त जिंदगी में हम अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना भूल जाते हैं कुछ ज्यादा परेशानियां आने से पहले समय  पर  स्वास्थ्य का जांच होना बहुत जरूरी है | इसलिए समर्पण यह कोशिश करती है कि इसी डी क्लब की सेवा से लोगों की स्वास्थ्य का ध्यान रखा जाए |
60 लोगो की आज जांच  की गई  |
 आज के इस डी क्लब के प्रोग्राम में रेडी लैब के एक्सपर्ट  अजय कुमार के साथ अध्यक्ष मीनू अग्रवाल, सचिव मनीषा पोद्दार,  संयोजिका अंकिता केडिया,  सुनीता सोनी,  सुजाता डोकानिया, कविता सोमानी,  डिंपल सोनी,  मीडिया प्रभारी रश्मि मालपानी मौजूद थी  |

हर महीने के तीसरे रविवार को जांच शिविर लगाएगा मारवाड़ी युवा मंच


रांची। आज 15 सितंबर को मारवाड़ी युवा मंच, रांची शाखा के तत्वावधान में मोरहाबादी स्थित ऑक्सीजन पार्क में निःशुल्क जांच शिविर लगाया गया।

जांच शिविर के माध्यम से शुगर, रक्तचाप, की जांच की गई। शिविर में लगभग 100 लोगों ने शुगर एवं रक्तचाप की जाँच करवाई।

निःशुल्क जांच शिविर लगाने में राजगढ़िया स्पेशिलिटी का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

मारवाड़ी युवा मंच, रांची शाखा के अध्यक्ष विशाल पाड़िया ने कहा कि, नियमित जांच के माध्यम से लोगो मे रोग के प्रति जागरूकता फैलती है। उन्होंने कहा कि भागदौड़ की जिंदगी में रोगों के प्रति सचेत नियमित जांच से रहा जा सकता है।

सचिव विकास अग्रवाल ने कहा कि, युवा मंच के द्वारा, हर महीने के तीसरे रविवार को निःशुल्क जांच शिविर लगाया जा सकता है। उन्होंने शहर वासियों से आग्रह किया कि हर महीने के तीसरे रविवार को शहर वासी निःशुल्क जांच का लाभ उठा सकते है।

निःशुल्क जांच शिविर में रोहित सरावगी, विकास गोयल, समेत अन्य सदस्य शामिल थे।

राजा नरपति सिंह बालिका उचिच विद्यालय में शिक्षक-अभिभावक मीट


चक्रधरपुर। राजा नरपति सिंह बालिका उच्च विद्यालय में आज शिक्षक अभिभावक संघ की बैठक का आयोजन किया गया जिसमें बहुत संख्या में अभिभावकों की उपस्थिति रही ।कार्यक्रम का आरंभ स्वागत गान से किया गया फिर बाल संसद के परिचय साथ ही नये शिक्षकों का परिचय सह स्वागत अभिनंदन किया गया।अभिभावकों को ज्ञान सेतु के बारे में विस्तार से बताया गया और जल संरक्षण की जानकारी दी गयी।साथ ही सभी छात्राओं को प्रतिदिन विद्यालय आने के लिये प्रोत्साहित करने को कहा गया।कार्यक्रम में 99% उपस्थित बच्चियों व क्लास 10 वीं की प्रथम द्वितीय व तृतीय आने वाली छात्राओं को पुरस्कार दिया गया।मुख्य अतिथि तनवीर अख्तर अंसारी सर के द्वारा संबोधित किया गया साथ प्राचार्य आरती प्रधान के द्वारा विद्यालय की प्रगति व सभी साधनों की जानकारी दी गयी।कार्यक्रम में सभी शिक्षकों ने अपना पूरा सहयोग दिया।नजीब असरफ, शाहनाज परवीन, नीतू साहू, भवानी महतो ,राजन प्रधान,मंजू कंदयायग,जयश्री मुंडू,प्रभावती महतो श्रवण महतो शामिल हुए।

कर्तव्यनिष्ठा की प्रतिमूर्ति हैं एसपी इंद्रजीत माहथा


चाईबासा। कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी और लगन के बलबूते इंसान सफलता की सीढ़ियां चढ़ता जाता है।  कम समय में ही लोगों के बीच लोकप्रियता हासिल करने में सफल हो जाता है। ऐसी ही एक शख्सियत हैं पश्चिम सिंहभूम के पुलिस आरक्षी अधीक्षक इंद्रजीत माहथा। श्री माहथा वर्ष 2009 बैच के आईपीएस हैं। अपनी बेहतरीन कार्यशैली से उन्होंने पुलिस महकमे में तो एक विशेष पहचान स्थापित कर ही ली है, इसके अलावा जनता के बीच भी उन्होंने अच्छी खासी लोकप्रियता अर्जित की है। अपने सेवाकाल के दौरान वह जहां भी पदस्थापित रहे, अपनी प्रतिभा प्रदर्शित कर जनता का दिल जीतने में सफल रहे हैं। श्री माहथा का भारतीय पुलिस सेवा में चयन होने के बाद पहला पदस्थापन राजधानी रांची के हटिया में एएसपी के पद पर हुआ। यहां उन्होंने अपनी बेहतरीन कार्यशैली का परिचय देते हुए बखूबी अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। मृदुभाषी, अनुशासन प्रिय और अपराध नियंत्रण के प्रति सदैव सक्रिय रहने वाले श्री माहथा अपने दायित्वों के प्रति सजग रहते हैं। सरायकेला-खरसावां जिले के पुलिस अधीक्षक पद पर रहते हुए उन्होंने अपराध नियंत्रण और नक्सली गतिविधियों को काबू करने की दिशा में कई उल्लेखनीय कार्य किए, जिसे उक्त जिले की जनता आज भी याद कर उनके प्रति सम्मान का इजहार करती है। सरायकेला-खरसावां जिले के निवासियों को उन्होंने बेहतर विधि व्यवस्था देने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब सरायकेला-खरसांवा से उनका स्थानांतरण अन्यत्र हुआ, तब वहां के निवासियों ने उनका स्थानांतरण रुकवाने के लिए सड़कों पर उतर कर आंदोलन भी किया। विभागीय कार्यों का निष्पादन और थानों में लंबित मामलों के जल्द से जल्द निपटान के लिए वह सदैव प्रयासरत रहते हैं। अपने मातहत कर्मियों को भी वह हमेशा निर्देशित करते रहते हैं कि मामलों को जल्द से जल्द निपटायें। उनका यह प्रयास होता है कि किसी भी मामले में निर्दोष व्यक्ति को नहीं फंसाया जाए। श्री माहथा तकरीबन ढाई वर्षों तक पलामू में भी एसपी के पद पर पदस्थापित रहे। पलामू के अति उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण में उन्हें सफलता मिली। अपनी बेहतरीन कार्य कुशलता की बदौलत श्री माहथा जनता के चहेते पुलिस अधिकारियों की सूची में अग्रिम पंक्ति में हैं। शहर को अपराध मुक्त बनाने की दिशा में वह सदैव प्रयासरत रहते हैं। आम जनता के साथ उनका मैत्रीपूर्ण संबंध होता है। पुलिस-पब्लिक फ्रेंडली वातावरण निर्माण के लिए वह सतत प्रयासरत रहते हैं। उनका मानना है कि पुलिस जनता की सेवक और रक्षक हैं। इसी रूप में जनता के साथ उनका मित्रवत व्यवहार होना जरूरी है। फिलवक्त श्री माहथा पश्चिम सिंहभूम चाईबासा जिले के एसपी हैं। जिले में अपराध पर काबू पाने के लिए उन्होंने सभी थानों को विशेष रूप से दिशा निर्देशित किया है। अपराध नियंत्रण उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने आदिवासियों के स्वशासन को भी मान सम्मान दिया है। कोल्हान- पोड़ेया हाट के इलाके में परंपरागत मानकी-मुंडा प्रशासन प्रचलित है। 1832 के कोल विद्रोह के बाद तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने विलकिंसंस रूल्स के जरिए इस व्यवस्था को संवैधानिक मान्यता भी प्रदान की थी। आजादी के बाद लंबे समय तक इस व्यवस्था की उपेक्षा की गई। इंद्रजीत माहथा ने मानकी-मुंडा प्रशासन और पंचायती राज व्यवस्था के बीच एक संतुलन कायम किया। तमाम मानकियों और मुंडाओं को पहचान पत्र जारी किया और काम करने की आजादी दी। रघुवर सरकार ने भी उन्हें मालगुजारी की रसीद काटने का अधिकार देकर उनका मान बढ़ाया। विभागीय कार्यों के प्रति सजग और सक्रिय रहना श्री माहथा की दिनचर्या में शामिल है। वे कहते हैं कि जनता को स्वच्छ शासन-प्रशासन देना  सरकारी अधिकारियों का दायित्व बनता है। इस दिशा में सकारात्मक प्रयास के साथ जुटे रहना चाहिए। चाईबासा क्षेत्र के सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों में उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के प्रति भी गंभीरता दिखाते हुए ग्रामीणों का दिल जीत लिया है। वह आम जनता के मित्र हैं, तो अपराधियों के लिए जानी दुश्मन के समान हैं। वह खासकर ग्रामीण युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जुड़े रहकर अपने उज्जवल भविष्य निर्माण के प्रति संवेदनशील रहने की अपील करते हैं। श्री माहथा की कार्यशैली अन्य पुलिस कर्मियों के लिए अनुकरणीय हैं। उनका व्यक्तित्व प्रेरणास्रोत है।
प्रस्तुति : विनय मिश्रा

शनिवार, 14 सितंबर 2019

...और नायक से खलनायक बन गए गडकरी




देवेंद्र गौतम
मोटर वाहन अधिनियम में भारी-भरकम जुर्माने के प्रावधान के पक्ष में केंद्रीय परिवहन मंत्री का तर्क किसी के गले नहीं उतर पा रहा। यहां तक कि भाजपा शासित राज्य भी उसे हू-ब-हू लागू करने को तैयार नहीं। सबसे पहले पीएम मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के गृह प्रदेश गुजरात से ही इनकार के स्वर फूटे। गुजरात सरकार ने जुर्माने की राशि में 90 फीसद कटौती कर दी। विपक्षी दलों के शासन वाले प्रदेशों ने इसे लागू करने से पूरी तरह मना कर दिया। बिहार और झारखंड जैसे राज्यों ने इसे लागू करने के लिए तीन माह का समय तय किया। एक सितंबर को इसे लागू किए जाने के बाद देश के विभिन्न इलाकों में पुलिस और जनता के बीच हिंसक टकरावों की खबरें आने लगीं। दिल्ली में बहुत से लोगों ने निजी वाहनों पर चलना बंद कर दिया। बसों और मेट्रो में भीड़ बढ़ गई। स़ड़कों पर चालान का आतंक पसरने लगा। लेकिन गडकरी साहब इसके बाद भी कहते रहे कि यह स़ड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता लाने के लिए किया गया है। राजस्व इकट्ठा करना सरकार का मकसद नहीं है। यह अलग बात है कि झारखंड जैसे छोटे राज्य में 60 घंटे के अंदर 25 लाख का जुर्माना वसूल लिया गया। देशभर में करोड़ों की वसूली हो गई।
यह पहला मौका है जब नितिन गडकरी की सोच पर सवालिया निशान लगा। वे उसी जमात का हिस्सा नज़र आने लगे जो मोदी सरकार के मंत्रियों और उनके भक्तों की विशिष्टता रही है। सत्ता का अहंकार गडकी के अंदर इससे पहले कभी परिलक्षित नहीं हा था। उनके मंत्रालय में 2014 से लेकर अभी तक जितने काम हुए उन्हें सराहा गया। उनके मंत्रालय के प्रदर्शन को मोदी सरकार की उपलब्धि माना गया। वे कभी किसी तरह के विवाद में नहीं रहे। उटपटांग बयानबाजी से भी दूर रहे। लेकिन न्यू मोटर व्हेकिल एक्ट ने उन्हें जनता की नज़र में नायक से खलनायक बना दिया। उन्होंने आर्थिक मंदी में आम जनता की वित्तीय स्थिति पर सोचने की कोई जरूरत नहीं समझी। यदि तमाम राज्य सरकारें उनके तर्क से सहमत होकर जबरिया चालान काटने में लगी रहतीं तो देश में गृहयुद्ध तक की नौबत सकती थी। गडकरी जी इतने अमानवीय, जिद्दी और असंवेदनशील हो सकते हैं किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। भारी जुर्माना लगाने से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आ जाएगी यह गडकरी की सोच हो सकती है। दुर्घटनाओं का कारण जर्जर सड़कें और ट्रैफिक सिग्नलों की गड़बड़ी भी हो सकती है यह बात उनके जेहन में नहीं आई। उन्होंने अमेरिका, जर्मनी और फ्रांस की नकल करनी चाही लेकिन उनकी सड़कों का अपनी सड़कों से उनकी यातायात प्रणाली की अपनी प्रणाली से तुलना करके नहीं देखी। बड़े गर्व के साथ उन्होंने कहा कि उनका भी चालान कटा है। तो क्या भारत का हर नागरिक उनकी तरह धनी है कि लाख-पचास हजार से उसे फर्क नहीं पड़ता।
2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान जब भाजपा की ओर से नितिन गडकरी का प्रधानमंत्री के वैकल्पिक उम्मीदवार के रूप में नाम आ रहा था तो लोग उत्साहित थे कि एक सुलझे हुए नेता के हाथ में सत्ता की लगाम आ सकती है जो कम से कम बिना किसी तैयारी नोटबंदी और जीएसटी जैसा पागलपन भरा निर्णय नहीं लेंगे। लेकिन अब लोगों को लग रहा है कि अच्छा हुआ कि ऐसी नौबत नहीं आई अन्यथा सत्ता हाथ में आने पर गडकरी तो इससे भी ज्यादा क्रूर और अमानवीय हो सकते थे।
भाजपा नेताओं के साथ समस्या यह है कि सत्ता में आने के बाद उनकी नजर विकसित देशों पर लगी रही और वे भारत की मूलभूत समस्याओं को पूरी तरह भूल गए।  


स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी

  झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी  काशीनाथ केवट  15 नवम्बर 2000 -वी...