सामाजिक कार्यकर्ता नौशाद खान ने रांची स्टेशन का उर्दू में लिखा नाम हटाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए हिंदी और अंग्रेजी के साथ उर्दू में भी लिखे जाने का अनुरोध किया है। श्री नौशाद के मुताबिक उर्दू का जन्म और विकास भारत में हुआ फिर इसके साथ सौतेला व्यवहार करना अनुचित है। यह किसी समुदाय विशेष की भाषा नहीं है। उर्दू भाषा को समृद्ध बनाने में हिंदुओं और सिखों का उतना ही योगदान है जितना मुसलमानों का। उन्होंने ऱेलवे विभाग को पूर्वाग्रह से मुक्त होने का आग्रह करते हुए उर्दू में पुनः नाम लिखवाने का आग्रह किया है।
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शुक्रवार, 13 सितंबर 2019
उर्दू के साथ सौतेला व्यवहार न करे रेलवे विभाग
सामाजिक कार्यकर्ता नौशाद खान ने रांची स्टेशन का उर्दू में लिखा नाम हटाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए हिंदी और अंग्रेजी के साथ उर्दू में भी लिखे जाने का अनुरोध किया है। श्री नौशाद के मुताबिक उर्दू का जन्म और विकास भारत में हुआ फिर इसके साथ सौतेला व्यवहार करना अनुचित है। यह किसी समुदाय विशेष की भाषा नहीं है। उर्दू भाषा को समृद्ध बनाने में हिंदुओं और सिखों का उतना ही योगदान है जितना मुसलमानों का। उन्होंने ऱेलवे विभाग को पूर्वाग्रह से मुक्त होने का आग्रह करते हुए उर्दू में पुनः नाम लिखवाने का आग्रह किया है।
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