देवेंद्र गौतम
पाकिस्तान की साझा की हुई सूचना सही निकली। पुलवामा में सेना की
पेट्रोलिंग गाड़ी पर एलइडी से हमला हुआ जिसमें पांच जवान घायल हो गए। वाहन पर 44
राजपुताना राइफल के जवान मौजूद थे। हमले के बाद आतंकियों और सुरक्षाकर्मियों के
बीच फायरिंग हुई जिसमें एक आतंकी ढेर हो गया।
यह भारत का विश्वास जीतने और आतंकी गतिविधियों से पाक सरकार का कोई
सरोकार नहीं होने का प्रमाण देने की सोची समझी रणनीति हो सकती है। पाकिस्तान का
कोई भरोसा नहीं। वह गिरगिट की तरह रंग बदलना जानता है। अभी विश्व समुदाय के समक्ष
अपनी छवि सुधारना उसके लिए जीवन-मरण का प्रश्न बन गया है। अर्थ व्यवस्था को संकट
से निकालने के लिए उसे तरह-तरह के मुखौटे लगाने की जरूरत पड़ेगी। वह बहुत ही शातिर
देश है। जारिर तौर पर यह पराजय स्वीकार करने और आत्मसमर्पण करने जैसा प्रतीत होता
है। लेकिन इसके पीछे एक कदम आगे बढ़ने के लिए दो कदम पीछे हटने की नीति हो सकती
है। फिलहाल उसके बड़बोलापन और डींग हांकने की प्रवृत्ति पर परिस्थितियों का इतना
जोरदार चाबुक पड़ा है कि वह पूरी तरह तिलमिला उठा है। वह अपनी खुली आतंकी नीति को
जारी रखने की स्थिति में नहीं है। वह पर्दे रहकर ही अपनी हरकतों को अंजाम दे सकता
है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि उसकी सरज़मीन पर मौजूद आतंकी आकाओं को भारत के
हवाले करने की शर्त के साथ राजनयिक संबंधों को पुनर्स्थापित करे और सेना को अपना
काम करने की छूट जारी रखे। आतंकी संगठनों के जायज-नाजायज आर्थिक स्रोतों की नाकेबंदी
करे। पाकिस्तान अभी प्रत्यक्ष रूप से कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकियों की
फंडिंग करने की स्थिति में नहीं है। पाक सेना और आइएसआई ड्रग तस्करी के जरिए अपनी
खुराफातें जारी रख सकते हैं। ऐसे में भारत की खुफिया एजंसियां ड्रग तस्करी के जाल
को काटने की रणनीति अपना सकती हैं।
कुल मिलाकर मौजूदा परिस्थियों में भारत सरकार को अपनी पाकिस्तान नीति
में काफी कुछ बदलाव की जरूरत पड़ेगी। लेकिन इसे बहुत सोच समझकर तय करना होगा और
बहुत सतर्कता के साथ अमली जामा पहनाना होगा।

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