रांची। निर्मला कॉन्वेंट हाई स्कूल, इडलाहातू में दिनांक 10 जून 2019 को इंटर हाउस एक दिवसीय चेस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसका शुभारंभ विद्यालय प्रबंधन समिति की सचिव श्रीमति सीमा शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया । इस प्रतियोगिता में कक्षा 6 से कक्षा 10 तक के विद्यार्थियों ने भाग लिया । विद्यालय परिवार एवं बच्चों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि चेस (शतरंज) एक प्राचीन खेल है जो तार्किक क्षमता को बढ़ाता है । उन्होंने कहा कि इनडोर गेम होने के कारण यह काफी सुरक्षित एवं मानसिक विकास के लिए बहुत जरूरी भी है । विभिन्न हाउस स्टूडेंट्स ने इस प्रतियोगिता में बड़े उत्साह एवं उत्सुकता के साथ भाग लिया । सभी प्रतिभागियों ने इस प्रतियोगिता में जीत सुनिश्चित करने के लिए अपना दम - खम लगा दिया । यह कई राउंड्स में जाकर अंततः समाप्त हुई । जहां विभिन्न हाउस के विद्यार्थियों को विजेता घोषित किया गया । विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत करते हुए विद्यालय के प्राचार्य श्री विजय कुमार शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस चेस प्रतियोगिता से अनुभव प्राप्त कर जीवन में आने वाली शैक्षिक तथा और शैक्षणिक सभी प्रकार की चुनौतियों का दिमागी मजबूती से सामना करना सीखे साथ ही उन्होंने लंबे समय से छुट्टी के बाद बच्चों के अध्ययन को रोचक बनाने के लिए शिक्षकों को भी कई दिशा-निर्देश दिए । वहीं विद्यालय के वाइस प्रिंसिपल श्री विमलेश कुमार अवस्थी ने कहा कि समर वैकेशन के बाद बच्चों का पढ़ाई से लगाव थोड़ा छूट जाता है हालांकि गृह कार्य के रूप में उन्हें कुछ पठन कार्य दिए गए थे जिसने अध्ययन कि निरंतरता को बनाए रखने में मदद किया । फिर बच्चों कि रुझान को विद्यालय की ओर आकर्षित करने एवम् उनके दिमाग को एकाग्रचित करने के उद्देश्य से विद्यालय में चेस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है । जिसमे अधिकाधिक बच्चों ने रुचि लिया ।
यह ब्लॉग खोजें
सोमवार, 10 जून 2019
निर्मला कॉन्वेंट में इंटर हाउस चेस प्रतियोगिता
रांची। निर्मला कॉन्वेंट हाई स्कूल, इडलाहातू में दिनांक 10 जून 2019 को इंटर हाउस एक दिवसीय चेस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसका शुभारंभ विद्यालय प्रबंधन समिति की सचिव श्रीमति सीमा शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया । इस प्रतियोगिता में कक्षा 6 से कक्षा 10 तक के विद्यार्थियों ने भाग लिया । विद्यालय परिवार एवं बच्चों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि चेस (शतरंज) एक प्राचीन खेल है जो तार्किक क्षमता को बढ़ाता है । उन्होंने कहा कि इनडोर गेम होने के कारण यह काफी सुरक्षित एवं मानसिक विकास के लिए बहुत जरूरी भी है । विभिन्न हाउस स्टूडेंट्स ने इस प्रतियोगिता में बड़े उत्साह एवं उत्सुकता के साथ भाग लिया । सभी प्रतिभागियों ने इस प्रतियोगिता में जीत सुनिश्चित करने के लिए अपना दम - खम लगा दिया । यह कई राउंड्स में जाकर अंततः समाप्त हुई । जहां विभिन्न हाउस के विद्यार्थियों को विजेता घोषित किया गया । विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत करते हुए विद्यालय के प्राचार्य श्री विजय कुमार शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस चेस प्रतियोगिता से अनुभव प्राप्त कर जीवन में आने वाली शैक्षिक तथा और शैक्षणिक सभी प्रकार की चुनौतियों का दिमागी मजबूती से सामना करना सीखे साथ ही उन्होंने लंबे समय से छुट्टी के बाद बच्चों के अध्ययन को रोचक बनाने के लिए शिक्षकों को भी कई दिशा-निर्देश दिए । वहीं विद्यालय के वाइस प्रिंसिपल श्री विमलेश कुमार अवस्थी ने कहा कि समर वैकेशन के बाद बच्चों का पढ़ाई से लगाव थोड़ा छूट जाता है हालांकि गृह कार्य के रूप में उन्हें कुछ पठन कार्य दिए गए थे जिसने अध्ययन कि निरंतरता को बनाए रखने में मदद किया । फिर बच्चों कि रुझान को विद्यालय की ओर आकर्षित करने एवम् उनके दिमाग को एकाग्रचित करने के उद्देश्य से विद्यालय में चेस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है । जिसमे अधिकाधिक बच्चों ने रुचि लिया ।
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी
झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी काशीनाथ केवट 15 नवम्बर 2000 -वी...
-
वो दिन भी खूब थे...तब जम कर नाटक किया करते थे ...कई सपने देखा करते..नाटको से ये कर देंगे..वो कर देंगे...क्रांति ला देंगे ...आन्दोलन खड़ा...
-
शहरी इलाके की प्राइम लोकेशन पर बसी स्लम बस्ती. उसपर भू-माफिया की गिद्धदृष्टि. उसे खाली कराने के लिए इलाके के सबसे बड़े माफिया डान के साथ कर...
-
मनोहरपुर। पुलिस और पब्लिक के बीच बेहतर समन्वय कायम करना समय की मांग है। लेकिन कम ही अधिकारी यह समायोजन कर पाते हैं। लेकिन सजग और कर्तव्य...
-
झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी काशीनाथ केवट 15 नवम्बर 2000 -वी...
-
झारखंड के अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आये 11 साल हो गए. इस बीच जितनी भी सरकारें बनीं उनमें मुख्यमंत्री का पद आदिवासियों के लिए अघोषित ...

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें