रांची जिले के प्रसिद्ध समाजसेवी एवं नशा मुक्त और भ्रष्टाचार मुक्त का आंदोलन कर्ता निपु सिंह ने कहा कि पूर्व विदेश मंत्री व दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री सुषमा स्वराज का जाना भाजपा के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति है इसका भरपाई नहीं की जा सकती है उनकी काबिलियत को विदेशों में भी चर्चा होती है और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को न्याय और हक के लिए हमेशा सक्रिय रहती थी श्री सिंह ने कहा कि सुषमा के कारण ही झारखंड में विदेश मंत्रालय बनने जा रहा है और पक्षी नहीं विपक्ष भी सुषमा के व्यवहार से प्रभावित रहते थे उन्होंने कहा कि वह महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत थी वह अपने भाषण से पूरे देश की जनता का दिल जीत लेती थी श्री सिंह ने जोर देकर कहा कि सुषमा स्वराज जी को इस दुनिया में नहीं रहना हमारे देश के लिए अपूरणीय क्षति है इसकी भरपाई करना काफी मुश्किल होगी भगवान उनकी आत्मा की शांति प्रदान करें एवं दुख की घड़ी में उनके परिवार वालों को शक्ति प्रदान करें
यह ब्लॉग खोजें
गुरुवार, 8 अगस्त 2019
सुषमा का जाना पार्टी ही नही, देश की क्षति : सिंह
रांची जिले के प्रसिद्ध समाजसेवी एवं नशा मुक्त और भ्रष्टाचार मुक्त का आंदोलन कर्ता निपु सिंह ने कहा कि पूर्व विदेश मंत्री व दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री सुषमा स्वराज का जाना भाजपा के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति है इसका भरपाई नहीं की जा सकती है उनकी काबिलियत को विदेशों में भी चर्चा होती है और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को न्याय और हक के लिए हमेशा सक्रिय रहती थी श्री सिंह ने कहा कि सुषमा के कारण ही झारखंड में विदेश मंत्रालय बनने जा रहा है और पक्षी नहीं विपक्ष भी सुषमा के व्यवहार से प्रभावित रहते थे उन्होंने कहा कि वह महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत थी वह अपने भाषण से पूरे देश की जनता का दिल जीत लेती थी श्री सिंह ने जोर देकर कहा कि सुषमा स्वराज जी को इस दुनिया में नहीं रहना हमारे देश के लिए अपूरणीय क्षति है इसकी भरपाई करना काफी मुश्किल होगी भगवान उनकी आत्मा की शांति प्रदान करें एवं दुख की घड़ी में उनके परिवार वालों को शक्ति प्रदान करें
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
स्वर्ण जयंती वर्ष का झारखंड : समृद्ध धरती, बदहाल झारखंडी
झारखंड स्थापना दिवस पर विशेष स्वप्न और सच्चाई के बीच विस्थापन, पलायन, लूट और भ्रष्टाचार की लाइलाज बीमारी काशीनाथ केवट 15 नवम्बर 2000 -वी...
-
वे बचपन के दिन थे ....मोहल्ले में दो बच्चों की मौत होने के बाद काना-फूसी शुरू हो गयी और एक बूढी विधवा को 'डायन' करार दिया गया....
-
कई साल पहले की बात है ...शायद बी. एस सी. कर रही थी ..मेरी आँखों में कुछ परेशानी हुई तो डोक्टर के पास गयी..वहां नेत्रदान का पोस्टर लगा द...
-
मनोहरपुर। पुलिस और पब्लिक के बीच बेहतर समन्वय कायम करना समय की मांग है। लेकिन कम ही अधिकारी यह समायोजन कर पाते हैं। लेकिन सजग और कर्तव्य...
-
वह दिन गए जब पत्रों का आदान-प्रदान कबूतरों के जरिये होता था. वो दिन भी गए जब यह कष्ट डाकियों को उठाना पड़ता था. अब यह काम सैटेलाईट के जरिये...
-
कई दिनों की बारिश के बाद बादल एकदम चुप से थे..न गरजना न बरसना ... ठंडी हवाएं जरुर रह-रह कर सहला जाती थी...धूली, निखरी प्रकृति की सुन्...

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें